पंचकर्म सहित अन्य पारंपरिक उपचार की चाह में गोवा का रुख कर रहे विदेशी पर्यटक
प्रशांत
- 25 Jan 2026, 08:54 PM
- Updated: 08:54 PM
पणजी, 25 जनवरी (भाषा) पंचकर्म जैसे आयुर्वेद आधारित उपचार पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां आजमाने के इच्छुक विदेशी पर्यटकों के लिए भारत की यात्रा को साधारण छुट्टियों से कहीं आगे कायाकल्प एवं आरोग्य हासिल करने के अवसर में तब्दील कर रहे हैं, और गोवा स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) इस मामले में एक अग्रणी केंद्र के रूप में उभर रहा है।
एआईआईए में उपलब्ध सबसे लोकप्रिय पारंपरिक उपचार पद्धतियों में पंचकर्म शामिल है, जो संस्थान के चिकित्सकों की मानें तो जटिल बीमारियों में भी आशाजनक परिणाम दिखा रहा है।
रूस की 63 वर्षीय नतालिया उन विदेशी पर्यटकों में शामिल हैं, जिनका कहना है कि भारत में छुट्टियां मनाते समय आयुर्वेद आधारित उपचार पद्धति आजमाने के फैसले से उनकी यात्रा के अनुभव में एक शानदार आयाम जुड़ गया।
नतालिया के मुताबिक, वह पिछले सात-आठ साल से कमर दर्द, गर्दन में दर्द और जोड़ों में दर्द की शिकायत के साथ-साथ 'रेटिनल एट्रोफी' की समस्या से जूझ रही हैं, जिससे उनकी आंखों की रोशनी कमजोर हो गई है।
उन्होंने कहा, "एआईआईए में पंचकर्म थेरेपी हासिल करने के बाद मुझे अपनी स्थिति में काफी सुधार महसूस हो रहा है।"
एआईआईए गोवा के चिकित्सकों के अनुसार, नतालिया पिछले तीन साल से जब भी भारत आती हैं, अपने कार्यक्रम में संस्थान में पंचकर्म थेरेपी लेना जरूर शामिल करती हैं।
एआईआईए गोवा में पंचकर्म विभाग के प्रमुख डॉ. प्रवीण बीएस ने कहा कि पंचकर्म एक 'बायो-डिटॉक्सीफिकेशन' (जैव-विषहरण) प्रक्रिया है, जिसमें शरीर की सफाई, चयापचय में सुधार और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर पांच मुख्य उपचार शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि पंचकर्म मन को शांत करने, नींद की गुणवत्ता में सुधार लाने और इंद्रियों को स्पष्टता प्रदान करने में भी मददगार है।
डॉ. प्रवीण ने कहा, "ये पंचकर्म के निवारक पहलू हैं। इस चिकित्सा पद्धति का इस्तेमाल मधुमेह जैसे चयापचय संबंधी विकारों, पार्किंसंस और स्ट्रोक जैसी तंत्रिका संबंधी स्थितियों, गठिया जैसे हड्डी एवं मांसपेशियों संबंधी विकारों, त्वचा संबंधी समस्याओं और बांझपन के उपचार एवं प्रबंधन में भी किया जाता है। यह सेरेब्रल पाल्सी और ऑटिज्म के उपचार में भी सहायक है।"
उन्होंने कहा, "भारतीयों के अलावा, रूस, ब्रिटेन, अमेरिका और फ्रांस जैसे विभिन्न देशों के लोग भी स्वास्थ्य लाभ तथा विभिन्न बीमारियों के इस्तेमाल के लिए संस्थान का रुख कर रहे हैं।"
सूत्रों के मुताबिक, एआईआईए गोवा में रोजाना औसतन 100-125 मरीज विभिन्न पंचकर्म प्रक्रियाओं से गुजरते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में 332 विदेशी मरीजों ने पंचकर्म चिकित्सा का लाभ लिया है।
भाषा पारुल प्रशांत
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