दिल्ली सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर कैदियों के लिए सजा में छूट की घोषणा की
प्रशांत
- 25 Jan 2026, 09:49 PM
- Updated: 09:49 PM
नयी दिल्ली, 25 जनवरी (भाषा)दिल्ली सरकार ने रविवार को गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में पर कुछ श्रेणियों के दोषियों की सजा माफ करने की घोषणा की, जिसका लाभ दो हजार से अधिक कैदियों को मिलेगा।
गृह मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह छूट दिल्ली की अदालतों द्वारा सजा सुनाए गए दोषियों और 26 जनवरी तक जेल में बंद कैदियों पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधानों के तहत निर्धारित शर्तों के अधीन लागू होगी।
सूद ने कहा, ''इस फैसले से करीब 2,000 कैदियों को लाभ होगा।''
इस संबंध में जारी एक बयान के अनुसार, 65 वर्ष से अधिक आयु की और 10 वर्ष से अधिक की सजा काट रही महिला कैदियों को 90 दिन की छूट मिलेगी, जबकि पांच वर्ष से अधिक और 10 वर्ष तक की सजा काट रही महिलाओं को 60 दिन की छूट मिलेगी।
बयान में कहा गया कि एक वर्ष से लेकर पांच वर्ष तक की सजा काट रहे कैदियों को 30 दिन की छूट दी जाएगी, और एक वर्ष तक की सजा काट रहे कैदियों को 20 दिन की छूट मिलेगी।
इसमें कहा गया कि अन्य सभी कैदियों के लिए, 10 साल से अधिक की सजा काट रहे लोगों के लिए 60 दिन, पांच साल से अधिक से लेकर 10 साल तक की सजा काट रहे लोगों के लिए 45 दिन, एक साल से अधिक से लेकर पांच साल तक की सजा काट रहे लोगों के लिए 30 दिन और एक साल की सजा काट रहे लोगों के लिए सजा में 15 दिन की छूट दी जाएगी।
सूद ने कहा कि यह विशेष छूट दिल्ली कारागार नियम, 2018 के तहत मिलने वाली नियमित छूट के अतिरिक्त होगी।
उन्होंने कहा कि 26 जनवरी तक पैरोल या फरलो पर चल रहे कैदी भी पात्र होंगे, बशर्ते उस अवधि के दौरान उनके किसी भी दुर्व्यवहार की रिपोर्ट न की गई हो।
सूद ने कहा कि यह लाभ केवल उन दोषियों को दिया जाएगा जिन्हें 26 जनवरी, 2025 से 25 जनवरी, 2026 तक पिछले एक वर्ष में किसी भी कारागार अपराध के लिए दंडित नहीं किया गया है।
बयान के अनुसार, हालांकि, कुछ श्रेणियों के कैदियों को इस छूट से बाहर रखा गया है, जिनमें मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा पाए लोग और सरकारी बकाया देने में चूकने की वजह से जेल में बंद दोषी शामिल हैं।
इसमें कहा गया कि एनडीपीएस अधिनियम, पॉक्सो अधिनियम, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, जासूसी संबंधी अपराधों, कोर्ट मार्शल मामलों, न्यायालय की अवमानना, भारतीय न्याय संहिता के तहत महिलाओं के खिलाफ अपराधों और परक्राम्य लिखत अधिनियम जैसे निर्दिष्ट दीवानी अपराधों के तहत दोषी ठहराए गए कैदी भी अपात्र हैं।
बयान के अनुसार, गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचित अपवाद श्रेणियों के अंतर्गत आने वाले मामलों को भी, जिनमें संविधान की संघ सूची में शामिल विषयों से संबंधित अपराध शामिल हैं, सजा में छूट के दायरे से बाहर रखा गया है।
भाषा
धीरज प्रशांत
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