हिमंत सरकार ने छह लाख चाय बागान श्रमिकों को पांच-पांच हजार रु की वित्तीय सहायता वितरित की
नरेश
- 25 Jan 2026, 09:09 PM
- Updated: 09:09 PM
डूमडूमा (असम), 25 जनवरी (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को चाय बागान मजदूरों के लिए पांच-पांच हजार रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता की शुरुआत की। यह कदम राज्य सरकार द्वारा चाय बागान समुदाय के लिए शुरू की गई विकासात्मक योजनाओं की श्रृंखला के तहत उठाया गया है, जिससे छह लाख से अधिक मजदूरों को लाभ मिलेगा।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार आगामी विधानसभा चुनावों से पहले आदिवासियों और चाय बागान जनजातियों तक पहुंचने के प्रयास में उन पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसमें चाय बागानों की 'श्रमिक लाइनों' (श्रमिक बस्तियों) में भूमि के स्वामित्व का आश्वासन देने से लेकर सरकारी नौकरियों में आरक्षण करने और शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने तक शामिल है।
परंपरागत रूप से कांग्रेस के 'वोट बैंक' के रूप में देखे जाने वाले इस समुदाय का भरोसा हासिल करने में भाजपा ने महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है, और 2014 से राज्य में विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भाजपा की जीत में चाय बागान जनजातियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
यह समुदाय ऊपरी और उत्तरी असम के कई निर्वाचन क्षेत्रों में प्रभावशाली है। बड़ी संख्या में इस समुदाय के लोग बराक घाटी में भी आबाद हैं।
'एटी कोली दुती पाट' योजना की शुरुआत करने के अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए शर्मा ने कहा कि जब उन्होंने पदभार संभाला था, तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनसे वंचितों, विशेष रूप से चाय बागानों में रहने वाली जनजातियों के विकास पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा था।
उन्होंने जोर देकर कहा, "हम समुदाय के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और इन पांच वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह असम अपनी समृद्ध चाय की पत्तियों के लिए जाना जाता है, उसी तरह श्रमिकों की मेहनत को भी उचित मान्यता मिलनी चाहिए और राज्य सरकार उस दिशा में काम कर रही है, और इस अवसर पर शुरू की गई योजना इसी दिशा में एक कदम है।
शर्मा ने इस अवसर का उपयोग भाजपा के लिए समर्थन जुटाने के लिए भी किया और लोगों से भाजपा को वोट देने का आग्रह किया ताकि वे "विभिन्न योजनाओं के लाभों का आनंद लेते रहें।"
चाय बागानों में काम करने वाली जनजातियों के लिए विभिन्न कल्याणकारी उपायों के बारे में विस्तार से बताते हुए, शर्मा ने कहा कि पिछले वर्ष राज्य सरकार के ग्रेड-3 और ग्रेड-4 पदों में इस समुदाय के योग्य युवाओं के लिए तीन प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया था, और चयनित युवाओं के पहले बैच को हाल में नियुक्ति पत्र प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने कहा कि यह आरक्षण ग्रेड-1 और ग्रेड-2 पदों पर भी लागू किया जाएगा।
शर्मा ने चाय बागानों में 'लेबर लाइन' (आवासीय बस्ती) का स्वामित्व वहां रहने वाले श्रमिकों को प्रदान करने के लिए मौजूदा कानून में संशोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वामित्व का दावा करने के लिए फरवरी से फॉर्म वितरित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की कुल 27 सीटें चाय बागानों में रहने वाली जनजाति के छात्रों के लिए आरक्षित की गई हैं, जो इस वर्ष से बढ़कर 40 हो जाएंगी।
शर्मा ने बाद में 'एक्स' पर पोस्ट किया, "असम जो भी करता है, बड़े पैमाने पर करता है। आज, छह लाख से अधिक चाय बागान श्रमिकों को उनकी कड़ी मेहनत के लिए कृतज्ञता के प्रतीक के रूप में पांच पांच हजार दिए गए। उनकी कड़ी मेहनत ने चाय को असम का पर्याय बना दिया है।"
उन्होंने कहा कि यह योजना 'असम टी' के 200 साल पूरे होने के उत्सव के अनुरूप भी है।
शर्मा ने कहा, "इस समुदाय ने 200 वर्षों से अधिक समय तक 'असम टी' को उसकी विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए अथक परिश्रम किया है और इसे वास्तव में असम का उद्योग जगत से जुड़ाव कहा जा सकता है। राज्य के लोग उनके अतुलनीय योगदान को स्वीकार करते हैं और हमारी सरकार उनके कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत रहने का वादा करती है।"
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने कहा कि 27 जिलों और 73 विधानसभा क्षेत्रों में फैले 836 चाय बागानों के छह लाख से अधिक चाय बागान श्रमिकों को एकमुश्त वित्तीय सहायता के रूप में 300 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया गया।
भाषा नोमान नरेश
नरेश
2501 2109 डूमडूमा