प्रलोभन और पूर्वाग्रह से दूर रहें; मतदान करते समय विवेक का प्रयोग करें: राष्ट्रपति मुर्मू
धीरज
- 25 Jan 2026, 05:49 PM
- Updated: 05:49 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 25 जनवरी (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारतीय लोग अपने विवेक के आधार पर और प्रलोभन, पूर्वाग्रह तथा गलत सूचनाओं से दूर रहकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे, जिससे देश की चुनावी प्रणाली मजबूत होगी।
उन्होंने चुनाव में बड़ी संख्या में मतदान करने के लिए आगे आने वाली महिलाओं की भी सराहना की।
दिल्ली में आयोजित 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुर्मू ने कहा कि मतदान का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भी अनिवार्य है कि सभी नागरिक अपने संवैधानिक कर्तव्यों को ध्यान में रखते हुए इसका इस्तेमाल करें।
निर्वाचन आयोग के स्थापना दिवस को पिछले 16 वर्षों से राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है।
संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को जब भारतीय संविधान को अपनाया तो इसके 16 अनुच्छेद तुरंत प्रभाव से लागू हो गए। इनमें से एक अनुच्छेद निर्वाचन आयोग के गठन से संबंधित था।
भारत के गणतंत्र बनने से एक दिन पहले 25 जनवरी 1950 को निर्वाचन आयोग अस्तित्व में आया।
संविधान का शेष भाग 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
उन्होंने रेखांकित किया कि सबसे बुजुर्ग मतदाता, दिव्यांग मतदाता और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोग भी अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं।
मुर्मू ने कहा कि जन-भागीदारी जमीनी स्तर पर लोकतंत्र की भावना को व्यावहारिक रूप देती है।
उन्होंने उल्लेख किया कि निर्वाचन आयोग ने यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कई प्रयास किए हैं कि ''कोई भी मतदाता पीछे न छूट जाए''।
राष्ट्रपति ने कहा कि मतदान केवल एक राजनीतिक अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया में नागरिकों के विश्वास का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि यह नागरिकों के लिए अपनी आकांक्षाओं को व्यक्त करने का एक माध्यम भी है।
मुर्मू ने कहा कि बिना किसी भेदभाव के सभी वयस्क नागरिकों को प्राप्त मतदान का अधिकार, राजनीतिक और सामाजिक न्याय एवं समानता के संवैधानिक आदर्शों को ठोस अभिव्यक्ति प्रदान करता है।
उन्होंने रेखांकित किया कि संविधान में निहित ''एक व्यक्ति, एक वोट'' का सिद्धांत संविधान निर्माताओं के आम लोगों की बुद्धिमत्ता पर दृढ़ विश्वास का परिणाम है।
वहीं, उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने कहा कि पिछले 75 वर्षों में, भारत की चुनावी यात्रा संविधान में निहित मूल्यों को बनाए रखते हुए, इसके लोकतंत्र की ताकत, लचीलेपन और समावेशिता का एक उल्लेखनीय प्रमाण रही है।
राधाकृष्णन ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि जिम्मेदारी और जागरूकता के साथ मतदान के अधिकार का प्रयोग करके नागरिक समावेशी एवं विश्वसनीय लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में योगदान करते हैं।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भाग लेने का आग्रह करते हुए कहा कि मतदाता होना केवल संवैधानिक विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक ऐसा महत्वपूर्ण कर्तव्य है जो प्रत्येक नागरिक को भारत के भविष्य को आकार देने में अपना मत रखने का अधिकार देता है।
मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''राष्ट्रीय मतदाता दिवस की शुभकामनाएं। यह दिन हमारे राष्ट्र के लोकतांत्रिक मूल्यों में हमारी आस्था को और गहरा करने का दिन है।''
उन्होंने कहा, ''मतदाता होना केवल एक संवैधानिक विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि एक महत्वपूर्ण कर्तव्य है जो प्रत्येक नागरिक को भारत के भविष्य को आकार देने में अपनी आवाज उठाने का अधिकार देता है।''
प्रधानमंत्री ने कहा, ''आइए, हम लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में निरंतर भाग लेकर अपने लोकतंत्र की भावना का सम्मान करें, जिससे एक विकसित भारत की नींव मजबूत हो सके।''
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मतदान दिवस के अवसर पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक वार्षिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह ''भारत के लोकतंत्र की आत्मा के साथ संवाद'' करने का एक अवसर है।
उन्होंने कहा कि ''एक व्यक्ति, एक वोट, प्रत्येक वोट का एक मूल्य'' सिद्धांत बी आर आंबेडकर की देन है।
इस अवसर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि विश्व भर के सभी लोकतंत्र यह मानते हैं कि एक स्वच्छ मतदाता सूची एक मजबूत लोकतंत्र की आधारशिला है।
उन्होंने कहा कि संविधान और कानून के अनुसार, केवल 18 वर्ष या इससे अधिक आयु के लोग, जो सामान्यतः किसी निर्वाचन क्षेत्र में रहते हैं और भारत के नागरिक हैं, उस निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पंजीकरण कराने के पात्र हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, ''इस मूलभूत उद्देश्य को पूरा करने के लिए, निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए और कोई भी अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो जाए।''
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया कि हाल के दिनों में निर्वाचन आयोग जैसी संस्थाओं को लगातार दबाव का सामना करना पड़ा है और इसलिए, उनकी स्वतंत्रता की रक्षा करना ''हमारी जिम्मेदारी'' है, ताकि लोकतंत्र न केवल जीवित रहे, बल्कि वास्तव में फले-फूले।
उन्होंने कहा कि ''वोट चोरी'' और एक अनियोजित एसआईआर के माध्यम से ''मतदान के अधिकार'' को छीनना भारत के लंबे समय से पोषित लोकतंत्र को कलंकित करता है।
राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर 'एक्स' पर एक पोस्ट में खरगे ने कहा कि यह दिन याद दिलाता है कि एक राष्ट्र का भविष्य उसके लोगों के पास है और ''हमारी सामूहिक आवाज हमारे साझा भाग्य को आकार दे सकती है''।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ''भारत की जनता स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त चुनावों की हकदार है, जहां स्वच्छ मतदाता सूची और समान अवसर प्राथमिक आवश्यकता है।''
भाषा
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