बंगाल: आंकड़ों में विसंगतियों वाले मतदाताओं के नाम की सूची जारी करने की समससीमा पर अनिश्चितता
प्रशांत
- 24 Jan 2026, 03:34 PM
- Updated: 03:34 PM
कोलकाता, 24 जनवरी (भाषा) निर्वाचन आयोग को शनिवार तक आंकड़ों में विसंगतियों वाले मतदाताओं की सूची प्रकाशित करने के उच्चतम न्यायालय के निर्देश का पालन करने में अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) को समय पर आवश्यक सॉफ्टवेयर प्राप्त नहीं हुआ है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
उच्चतम न्यायालय ने 19 जनवरी को निर्वाचन आयोग को ''तार्किक विसंगतियों'' की सूची में शामिल लोगों और ''अनमैप्ड'' मतदाताओं के नाम पंचायत और ब्लॉक कार्यालयों में प्रदर्शित करने का निर्देश दिया था।
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ''हमें शुक्रवार रात तक सॉफ्टवेयर नहीं मिला। अगर सॉफ्टवेयर आखिरी समय में भी हमारे पास पहुंचता है, तो भी कुछ ही घंटों में इतनी बड़ी मात्रा में आंकड़ों को डाउनलोड करना, प्रिंट करना और प्रदर्शित करना बेहद मुश्किल होगा।''
उन्होंने बताया, ''बीएलओ पहले से ही सुनवाई प्रक्रिया में लगे हुए हैं। व्यवस्था के लिहाज से यह एक बड़ी चुनौती है।''
प्रकाशित होने वाली सूची में उन लोगों के नाम भी शामिल होंगे जिनके आंकड़ों में विसंगतियां हैं। साथ ही उन मतदाताओं के नाम भी शामिल होंगे जिनके डेटा का 2002 की मतदाता सूची रिकॉर्ड से मिलान नहीं हुआ है यानी 'अनमैप्ड' मतदाता, जिनकी कुल संख्या लगभग 1.26 करोड़ है।
अधिकारियों ने कहा कि अंतिम दिन में इस देरी से निर्देशों का पालन करने को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।
एक अन्य अधिकारी ने कहा, ''हमारे पास आंकड़े हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन पूरी तरह से बीएलओ पर निर्भर करता है।'' उन्होंने कहा कि ''मौजूदा परिस्थितियों में अदालत की समय सीमा को पूरा करना संभव नहीं हो सकता है।''
इस बीच, एक अधिकारी ने बताया कि 'अनमैप्ड' श्रेणी में रखे गए तीन लाख से अधिक मतदाता नोटिस दिए जाने के बावजूद सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुए।
उन्होंने कहा, ''लगभग 10 प्रतिशत 'अनमैप्ड' मतदाता सुनवाई में नहीं आए।''
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को तेज करने के लिए निर्वाचन आयोग (ईसी) ने विधानसभा क्षेत्र स्तर पर 294 अतिरिक्त वरिष्ठ सूक्ष्म पर्यवेक्षक नियुक्त करने का फैसला किया है।
अधिकारी ने कहा, ''इसका उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना और लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करना है।''
राज्य में कुल 7.62 करोड़ गणना प्रपत्र मतदाताओं के बीच वितरित किए गए थे और निर्वाचन आयोग ने 16 दिसंबर को मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की थी, जिसमें मृत्यु, स्थानांतरण और दोहराव वाली प्रविष्टियों के कारण 58 लाख से अधिक नाम हटाए गए।
मसौदा सूची में शामिल करीब 1.26 करोड़ मतदाताओं को "तार्किक विसंगतियों" या 2002 की मतदाता सूची से उनकी प्रविष्टियों का मिलान न होने के कारण सत्यापन सुनवाई के नोटिस जारी किए गए हैं। राज्य में इससे पहले 2002 में एसआईआर हुआ था।
अधिकारियों के अनुसार ''तार्किक विसंगतियों'' में पिता के नाम में त्रुटि या मेल न होना, छह से अधिक बच्चों वाले मतदाता, माता-पिता या दादा-दादी के साथ आयु का अविश्वसनीय अंतर तथा 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को ''नए मतदाता'' के रूप में दर्शाया जाना शामिल है।
सुनवाइयों के सात फरवरी तक समाप्त होने की संभावना है, जबकि अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को प्रकाशित की जानी है। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने संकेत दिया है कि समय-सीमा बढ़ाई भी जा सकती है।
भाषा
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