भारत एक सशक्त राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है: प्रधानमंत्री मोदी
माधव
- 23 Jan 2026, 08:52 PM
- Updated: 08:52 PM
नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत एक दृढ़ राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है और जानता है कि अपनी शक्ति को कैसे बढ़ाना है, उसे जिम्मेदारी से कैसे संभालना है और इसका इस्तेमाल कैसे करना है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती, पराक्रम दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक कमजोर राष्ट्र के लिए अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना मुश्किल होता है और इसलिए नेताजी बोस ने हमेशा एक सशक्त राष्ट्र का सपना देखा था।
मोदी ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ''21वीं सदी में भारत भी एक शक्तिशाली और दृढ़ राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।''
उन्होंने कहा, ''ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत को जख्म देने वालों के घर में घुसकर हमने उन्हें तबाह कर दिया। भारत आज शक्ति बढ़ाना भी जानता है, शक्ति संभालना भी जानता है और उसका इस्तेमाल करना भी जानता है।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सशक्त भारत के दृष्टिकोण का अनुसरण करते हुए, सरकार रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने कहा, ''पहले भारत केवल विदेशों से हथियार आयात करने पर आश्रित रहता था, लेकिन आज भारत का रक्षा निर्यात 23,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वदेशी रूप से निर्मित ब्रह्मोस और अन्य मिसाइलें, कितने ही देशों का ध्यान खींच रही हैं। उन्होंने कहा, ''हम स्वदेशी की ताकत से भारत की सेनाओं का आधुनिकीकरण कर रहे हैं।''
उन्होंने बोस की विरासत को उचित मान्यता न देकर उसका अपमान करने के लिए पिछली सरकारों की कड़ी आलोचना की।
मोदी ने कहा, ''स्वतंत्रता के बाद, हमारे राष्ट्र के इतिहास और उसकी उपलब्धियों को गर्व के साथ मनाया और संजोया जाना चाहिए था। हालांकि, उस समय सरकार में मौजूद नेता असुरक्षा की भावना से ग्रस्त थे।''
उन्होंने कहा, ''उन्होंने हमारी स्वतंत्रता का श्रेय पूरी तरह से एक परिवार को देने की कोशिश की। इस राजनीतिक स्वार्थ के परिणामस्वरूप, देश के समृद्ध इतिहास का एक बड़ा हिस्सा उपेक्षित रह गया।''
मोदी ने कहा कि आजादी के बाद अंडमान निकोबार द्वीप समूह के गौरवशाली इतिहास को सहेजा जाना चाहिए था, लेकिन उस समय सत्ता में आए लोगों में असुरक्षा की भावना थी।
उन्होंने कहा कि वे स्वतंत्रता का श्रेय केवल एक परिवार तक सीमित रखना चाहते थे, और इस राजनीतिक स्वार्थ के चलते राष्ट्र के इतिहास की उपेक्षा की गई।
मोदी ने कहा कि अंडमान निकोबार द्वीप समूह भी औपनिवेशिक शासन की पहचान से बंधे रह गए हैं, और आजादी के 70 साल बाद भी इन द्वीपों को ब्रिटिश अधिकारियों के नामों से ही जाना जाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने इतिहास के इस अन्याय को समाप्त कर दिया है और इसलिए पोर्ट ब्लेयर अब 'श्री विजयपुरम' बन गया है, एक ऐसा नाम जो लोगों को नेताजी की विजय की याद दिलाता है।
उन्होंने कहा कि इसी प्रकार, अन्य द्वीपों का नाम बदलकर स्वराज द्वीप, शहीद द्वीप और सुभाष द्वीप रख दिया गया। उन्होंने कहा कि 2023 में, अंडमान के 21 द्वीपों के नाम 21 परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखे गये।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अंडमान निकोबार में गुलामी से जुड़े नाम मिटाए जा रहे हैं और स्वतंत्र भारत के नए नाम अपनी पहचान बना रहे हैं।
भाषा
देवेंद्र माधव
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