कांग्रेस नेतृत्व ने केरल में चुनाव तैयारियों पर चर्चा की, नाराज थरूर बैठक में शामिल नहीं हुए
नेत्रपाल
- 23 Jan 2026, 06:58 PM
- Updated: 06:58 PM
नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों तथा रणनीति को लेकर शुक्रवार को राज्य से जुड़े वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा की, लेकिन राहुल गांधी तथा प्रदेश के कई अन्य नेताओं के व्यवहार से नाराजगी के चलते लोकसभा सदस्य शशि थरूर इसमें शामिल नहीं हुए।
हालांकि, पार्टी का कहना है कि थरूर कोझिकोड में अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के चलते बैठक में शामिल नहीं हुए तथा वह नाराज नहीं हैं।
खरगे के आवास '10 राजाजी मार्ग' पर हुई बैठक में कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, प्रदेश प्रभारी दीपा दासमुंशी, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सनी जोसेफ, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वी डी सतीशन, वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला तथा कई अन्य नेता शामिल हुए।
सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व ने बैठक में चुनाव तैयारियों पर विस्तार से चर्चा के साथ ही, संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के घटक दलों के बीच जल्द सीट बंटवारा करने तथा एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरने का निर्देश दिया।
केरल में आगामी मार्च-अप्रैल में विधानसभा चुनाव संभावित है। प्रदेश में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ प्रमुख विपक्षी मोर्चा है। स्थानीय निकाय के हालिया चुनावों में यूडीएफ ने बड़ी जीत हासिल की थी।
तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सदस्य थरूर इस बैठक में शामिल नहीं हुए।
थरूर के कार्यालय ने कहा है कि उन्होंने कोझिकोड में केरल साहित्य महोत्सव में अपनी पूर्व प्रतिबद्धताओं के कारण बैठक में शामिल होने में असमर्थता के बारे में पार्टी को सूचित कर दिया था।
हालांकि, थरूर के करीबी सूत्रों ने कहा कि वह बैठक में शामिल नहीं हुए क्योंकि वह इस बात से ''आहत'' हैं कि राहुल गांधी ने हाल में कोच्चि में एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर उनके मौजूद होने के बावजूद उनके नाम का उल्लेख नहीं किया और राज्य के नेताओं द्वारा बार-बार उन्हें ''दरकिनार'' करने की कोशिश की जा रही है।
बैठक के बाद खरगे ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि केरल के लोग बदलाव के लिए तैयार हैं और कांग्रेस नीत यूडीएफ एक प्रगतिशील, विकासोन्मुखी एवं कल्याणकारी शासन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
वेणुगोपाल ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ''केरल की चुनाव तैयारियों को लेकर चर्चा की गई। खरगे और राहुल गांधी ने नेताओं के विचार सुने। हम एकजुट होकर चुनाव में जा रहे हैं और हमें विश्वास है कि हम (यूडीएफ) 100 सीट जीतने जा रहे हैं।''
केरल में विधानसभा की कुल 140 सीट हैं।
कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी दीपा दासमुंशी ने थरूर की नाराजगी की खबरों को खारिज किया और कहा कि वह पार्टी नेतृत्व के साथ खुश हैं।
दासमुंशी ने संवाददाताओं से कहा, ''थरूर कांग्रेस पार्टी और नेतृत्व के साथ खुश हैं, कोई मतभेद नहीं है।''
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चेन्निथला ने भी थरूर की नाराजगी की बात को खारिज किया।
वैसे, थरूर के करीबी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि थरूर के इस बैठक से दूर रहने की वजह उनके साथ हाल में किया गया व्यवहार है तथा उन्हें इस बात से बेहद निराशा हुई कि राहुल गांधी ने 19 जनवरी को कोच्चि में स्थानीय निकाय के चुनाव में जीतने वालों को सम्मानित करने के लिए आयोजित 'महापंचायत' में उनका उल्लेख नहीं किया।
सूत्रों ने कहा कि राहुल गांधी ने मंच पर अन्य वरिष्ठ नेताओं का उल्लेख किया और उनके नाम भी लिए, लेकिन चार बार के सांसद और कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य थरूर का उल्लेख नहीं किया, जबकि वह मंच पर मौजूद थे।
सूत्रों के मुताबिक, थरूर ने खासकर आगामी राज्य विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार करने के मकसद से केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित शिविर के मौके पर मतभेद दूर करने का प्रयास किया था।
उस कार्यक्रम के बाद थरूर ने कहा था कि वह कभी भी पार्टी के रुख से अलग नहीं हटे हैं।
केरल कांग्रेस नेताओं द्वारा वायनाड में आयोजित उस शिविर से आगामी विधानसभा चुनाव में वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) का मुकाबला करने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया गया था। इसमें कथित तौर पर यह सहमति बनी कि थरूर विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे बल्कि पूरे राज्य में चुनाव प्रचार करेंगे।
हालांकि, कुछ दिन बाद प्रदेश इकाई के भीतर मतभेद फिर से उभर आए हैं और थरूर हाल ही में कोच्चि में अपने साथ किए गए व्यवहार से खुश नहीं हैं।
थरूर के बयानों और लेखों की हाल के दिनों में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कांग्रेस नेताओं ने तीखी आलोचना की थी।
पिछले साल भारत-पाकिस्तान संघर्ष और पहलगाम हमले के बाद राजनयिक संपर्क के प्रयासों को लेकर उनकी टिप्पणियों पर विवाद खड़ा हो गया था। उनकी टिप्पणियां कांग्रेस के रुख से भिन्न थीं और पार्टी के कई नेताओं ने उनके इरादों पर सवाल उठाते हुए उन पर कटाक्ष किया था।
हालांकि, थरूर ने कहा है कि विदेश नीति पर रुख में कोई भिन्नता नहीं है।
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