सरस्वती पूजा पंडालों में पूजा थीम के रूप में एसआईआर का समावेश
नरेश
- 23 Jan 2026, 06:56 PM
- Updated: 06:56 PM
कोलकाता, 23 जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विवाद के बीच सरस्वती पूजा के पंडाल में भी एसआईआर की थीम नजर आई।
बल्लीगंज साइंस कॉलेज में विद्या की देवी की सालाना पूजा को एक तीखे राजनीतिक विमर्श में बदल दिया गया है, जिसमें छात्रों ने पूजा की सजावट को 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल के सबसे ज़्यादा विवादित मुद्दों में से एक का रूप दिया है।
इस कलाकृति के केंद्र में एक गहरा, ब्लैक होल जैसा बैकड्रॉप है, जिस पर दर्जनों फैले हुए हाथ दस्तावेज़ों को पकड़े हुए हैं - स्कूल के प्रवेश पत्र, पहचान पत्र, प्रमाण पत्र - जो छात्रों द्वारा वर्णित "एसआईआर प्रक्रिया के दौरान आम लोगों को अमान्य बना दिए जाने" का प्रतीक हैं। ऊपर कई प्रतीकात्मक फंदे लटके हुए हैं, जो इस प्रक्रिया से जुड़े भय और मानसिक तनाव के कारण कथित आत्महत्याओं की ओर एक स्पष्ट संकेत हैं।
नाम न बताने की शर्त पर, न्यूरोसाइंस के द्वितीय वर्ष के एक छात्र ने कहा, "हम चिंता, अपमान और मिटा दिए जाने की भावना को दिखाना चाहते थे। यह पूजा हमारी प्रार्थना है कि यह उत्पीड़न तुरंत बंद हो जाए।"
एक तरफ हरे रंग की जर्सी लटकी है जिस पर '250' लिखा है, जो सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के बार-बार दोहराए जाने वाले चुनावी लक्ष्य को दर्शाती है। दूसरी तरफ, भगवा रंग की जर्सी पर प्रश्नचिह्न बना है, जो भाजपा और राजनीतिक परिणाम को लेकर अनिश्चितता का स्पष्ट संकेत है।
मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) हाल के महीनों में पश्चिम बंगाल में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस जहां मतदाताओं के उत्पीड़न का आरोप लगा रही है, वहीं विपक्षी भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची से अवैध नाम हटाने के लिए यह प्रक्रिया आवश्यक है। इसके बाद सड़कों पर विरोध प्रदर्शन, नाकेबंदी और झड़पें हुईं, जिससे एक प्रशासनिक संशोधन जन-राजनीतिक आंदोलन में बदल गया।
सरस्वती की मूर्ति के पीछे, टीएमसी सरकार की विकास पहलों की प्रशंसा करने वाले फ्लेक्स बैनर, एसआईआर की आलोचनाओं के साथ-साथ लगे हुए हैं।
बेहाला में प्रतिद्वंद्वी छात्र समूहों के बीच एक कॉलेज में सरस्वती पूजा समारोह पर नियंत्रण को लेकर झड़प हुई, जिसमें कई लोग घायल हो गए और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
हालात इतने बिगड़ गए कि स्थानीय टीएमसी विधायक और पार्षद रत्ना चटर्जी को तनाव कम करने के लिए मौके पर पहुंचना पड़ा। पुलिस ने शांति बहाल करने से पहले कई छात्रों को हिरासत में लिया।
बालीगंज में राजनीतिकरण से प्रेरित पूजा और बेहाला में हिंसक विरोध प्रदर्शन की ये दो घटनाएं इस बात को रेखांकित करती हैं कि बंगाल में एक और महत्वपूर्ण चुनाव की ओर बढ़ती राजनीति किस तरह से छात्र जीवन में गहराई से प्रवेश कर चुकी है।
भाषा तान्या नरेश
नरेश
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