वायनाड में भूस्खलन के दौरान किए गए कार्यों के लिए लेफ्टिनेंट कर्नल शेल्के को सम्मानित किया जाएगा
वैभव
- 23 Jan 2026, 12:45 PM
- Updated: 12:45 PM
नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा) केरल के वायनाड में 2024 की बाढ़ और भूस्खलन के दौरान मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद अत्यधिक जोखिम वाले कई बचाव अभियानों का नेतृत्व करने वाली भारतीय सेना की लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्के का चयन व्यक्तिगत श्रेणी में सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार 2026 के लिए किया गया है।
सरकारी बयान के अनुसार, संस्थागत श्रेणी में सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसएसडीएमए) ने यह पुरस्कार जीता है। प्राधिकरण ने 2005 में स्थापना के बाद से आपदा प्रबंधन अधिकारियों के रूप में 1,185 प्रशिक्षित 'आपदा मित्रों' को तैनात कर आपदा तैयारी और प्रतिक्रिया व्यवस्था को उल्लेखनीय रूप से मजबूत किया।
इस पुरस्कार के लिए एक मई, 2025 से नामांकन आमंत्रित किए गए थे। इसके जवाब में संस्थानों और व्यक्तियों से कुल 271 नामांकन प्राप्त हुए।
वायनाड में बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) अभियानों का नेतृत्व करने के लिए लेफ्टिनेंट कर्नल शेल्के का चयन किया गया। केरल में 2024 की बाढ़ और भूस्खलन के दौरान शेल्के के निरीक्षण में चूरलमाला में 190 फुट लंबे बेली ब्रिज का रात में चार घंटे में निर्माण किया गया जिससे दूरदराज के गांवों तक संपर्क सुविधा बहाल की जा सकी।
बयान के अनुसार, 'कोर ऑफ इंजीनियर्स' के कौशल का उपयोग करते हुए उन्होंने दूरदराज के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुलों, पहुंच मार्गों और आश्रयों का तेजी से निर्माण संभव बनाया, जिससे राहत और बहाली कार्यों में मदद मिली।
बयान में कहा गया, ''उन्होंने तेजी से निकासी, राहत सामग्री का वितरण और आवश्यक सेवाओं की बहाली सुनिश्चित करने के लिए असैन्य प्रशासन और स्थानीय नेताओं के साथ समन्वय किया। लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्के ने मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में उच्च जोखिम वाले कई बचाव अभियानों का नेतृत्व किया जिससे सैकड़ों नागरिकों की जान बची।''
इसमें कहा गया कि 150 टन वजनी उपकरणों का इस्तेमाल कर शेल्के ने ऐसे अभियान चलाए जिनसे समय पर राहत और बहाली के प्रयासों के जरिए हजारों लोगों को लाभ हुआ।
बयान के अनुसार, अधिकारी ने आपदा प्रतिक्रिया और मानवीय अभियानों में 2,300 से अधिक कर्मियों को प्रशिक्षण दिया और अपनी इंजीनियरिंग सेवा के जरिए आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) को अमल में लाने का काम किया।
इसमें कहा गया, ''उनका कार्य व्यावहारिक नेतृत्व और डीआरआर के अभियानों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।''
बयान के अनुसार, 2005 में स्थापित एसएसडीएमए को राज्य में आपदा तैयारी और प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए पुरस्कार के लिए चुना गया।
एसएसडीएमए ने गांव स्तर, प्रखंड मुख्यालय और जिला मुख्यालय-इन तीन स्तरों पर 1,185 प्रशिक्षित 'आपदा मित्रों' को आपदा प्रबंधन अधिकारियों के रूप में तैनात किया।
बयान के अनुसार, सभी ग्राम पंचायतों में आपदा प्रबंधन सहायकों को तैनात किया गया है। इससे सहभागी योजना, क्षमता-निर्माण की पहल और पंचायत-स्तरीय समितियां बनी हैं, जिन्होंने सभी छह जिलों में आपदाओं और जलवायु जोखिमों के प्रति लचीलापन बढ़ाया है।
इसमें कहा गया, ''2016 के मंतम भूस्खलन और 2023 की तीस्ता बाढ़ जैसी गंभीर आपदाओं के दौरान एसएसडीएमए के तत्काल समन्वय और प्रशिक्षित प्रथम प्रतिक्रिया दलों ने 2,563 लोगों को बचाने में मदद की तथा जान-माल के नुकसान को कम किया।''
बयान के अनुसार, प्राधिकरण ने आपदा मित्र के जरिए एक सक्रिय, समुदाय-केंद्रित आपदा जोखिम न्यूनीकरण दृष्टिकोण को संस्थागत रूप दिया है जिसमें पूर्व चेतावनी, तैयारी और स्थानीय क्षमता निर्माण पर जोर दिया गया है।
बयान के अनुसार, सरकार ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भारत में व्यक्तियों और संगठनों द्वारा दिए गए अमूल्य योगदान और निस्वार्थ सेवा को सम्मानित करने के लिए सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार शुरू किया है।
इसमें कहा गया, ''केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में, देश ने आपदा प्रबंधन पद्धतियों, तैयारी, शमन और प्रतिक्रिया तंत्र में उल्लेखनीय सुधार किया है, जिससे प्राकृतिक आपदाओं के दौरान होने वाली मौत की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है।"
यह पुरस्कार हर साल 23 जनवरी को बोस की जयंती पर घोषित किया जाता है।
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