शीर्ष अदालत के आदेश के बाद विवादित भोजशाला में बसंत पंचमी की पूजा व नमाज को लेकर कड़ी सुरक्षा
नोमान
- 22 Jan 2026, 08:04 PM
- Updated: 08:04 PM
नयी दिल्ली/धार, 22 जनवरी (भाषा) मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित 11वीं सदी की भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर में शुक्रवार को बसंत पंचमी और जुमे की नमाज के मद्देनजर किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
इस वर्ष हिंदू पर्व बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ने के कारण दोनों समुदायों ने पूजा-अर्चना और नमाज़ के लिए दावा किया था। स्थिति को देखते हुए उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को हस्तक्षेप किया और समय-विभाजन का स्पष्ट फार्मूला तय किया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश दिया कि शुक्रवार, 23 जनवरी को धार्मिक गतिविधियां समय के अनुसार होंगी। इसके तहत हिंदू समुदाय को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा की अनुमति होगी, जबकि मुस्लिम समुदाय को दोपहर एक बजे से तीन बजे तक नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है।
शीर्ष अदालत ने मुस्लिम समुदाय को यह भी निर्देश दिया कि नमाज में शामिल होने वाले व्यक्तियों की सूची अग्रिम रूप से जिला प्रशासन को उपलब्ध कराई जाए।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने दोनों समुदायों से आपसी सम्मान और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में राज्य एवं जिला प्रशासन का सहयोग करने की अपील की।
अदालत के आदेश को लागू कराने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन ने करीब 8,000 सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की है, जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की टुकड़ियां भी शामिल हैं।
उच्चतम न्यायालय के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए, भोजशाला मुक्ति यज्ञ समिति के गोपाल शर्मा ने कहा, "भोजशाला की स्थिति और इसकी गौरवशाली स्थापना के संबंध में, हमारे हिंदू पूर्वजों ने 1952 में महाराजा भोज उत्सव समिति का गठन किया था ताकि राजा भोज, सरस्वती और भोजशाला के विचारों को आम लोगों तक पहुंचाया जा सके, और बसंत पंचमी मनाना शुरू किया।"
उन्होंने कहा, "हिंदू समाज आज भी इस परंपरा का पालन करता आ रहा है। बसंत पंचमी 23 जनवरी को है और चूंकि उस दिन शुक्रवार है, इसलिए कुछ भ्रम पैदा हो गया है। उच्चतम न्यायालय के आज के आदेश में कहा गया है कि हिंदू समुदाय ने लगातार पूजा करने का फैसला किया है। इसलिए, सूर्योदय से सूर्यास्त तक लगातार पूजा की जाएगी।"
कमाल मौला नमाज़ इंतेजामिया कमेटी के प्रमुख ज़ुल्फ़िकार पठान ने कहा कि समुदाय उच्चतम न्यायालय के फैसले को स्वीकार करता है।
पठान ने कहा, " उच्चतम न्यायालय के आदेश में कहा गया है कि परिसर के अंदर सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से नमाज अदा की जाए। सात अप्रैल, 2003 के आदेश को बरकरार रखा गया है। इसलिए, मेरी सभी से अपील है कि शांति और व्यवस्था बनाए रखें।"
उन्होंने कहा कि समुदाय इस आदेश की आगे समीक्षा करेगा और प्रतिक्रिया देगा।
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया।
सिंह ने कहा, "जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती है, तो हिंदू दोपहर 12 बजे से पहले जाते हैं, और मुसलमान दोपहर एक बजे से तीन बजे तक नमाज़ अदा करते हैं। फिर, दोपहर तीन बजे से, हिंदू भी फूल चढ़ा सकते हैं। अब उच्चतम न्यायालय के फैसले का पालन करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।"
गौरतलब है कि भोजशाला, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित स्मारक है। हिंदू समुदाय इसे देवी सरस्वती (वाग्देवी) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है।
एएसआई द्वारा सात अप्रैल 2003 को किए गए प्रबंध के तहत परिसर में मंगलवार को हिंदुओं को पूजा और शुक्रवार को मुस्लिमओं को नमाज की अनुमति दी गई थी।
न्यायालय ने बृहस्पतिवार को यह भी निर्देश दिया कि नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की सूची जिला प्रशासन को दी जाए।
हिंदू और मुस्लिम समूहों ने 23 जनवरी शुक्रवार को भोजशाला परिसर में धार्मिक कार्यक्रमों के लिए अनुमति मांगी थी। शुक्रवार को बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती पूजा भी है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा, '' एएसजी (अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल) और महाधिवक्ता, दोनों ने उचित सुझाव दिया है कि यह जानने के बाद कि कल (शुक्रवार) दोपहर एक से तीन बजे के बीच नमाज के लिए मुस्लिम समुदाय से कितने लोगों के आने की संभावना है, परिसर के भीतर एक विशेष और अलग स्थान उपलब्ध कराया जाए, ताकि निर्धारित समय पर नमाज अदा की जा सके।''
न्यायालय ने कहा, ''इसी प्रकार, पहले की तरह, बसंत पंचमी के अवसर पर पारंपरिक अनुष्ठान के लिए हिंदू समुदाय को एक अलग स्थान उपलब्ध कराया जाए।''
न्यायालय 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा। याचिका में, बसंत पंचमी पर हिंदुओं को पूजा-अर्चना करने का विशेष अधिकार देने का अनुरोध किया गया था।
अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के मार्फत दायर याचिका का मंगलवार को तत्काल सुनवाई के लिए उल्लेख किया गया था।
जैन ने कहा था कि एएसआई के 2003 के आदेश में शुक्रवार के दिन बसंत पंचमी पड़ने से उत्पन्न होने वाली स्थिति का समाधान नहीं किया गया है।
उन्होंने बसंत पंचमी के अवसर पर पूरे दिन हिंदुओं के लिए विशेष, निर्बाध पूजा-अर्चना की अनुमति देने का अनुरोध किया था।
भाषा दिमो बृजेन्द्र राजकुमार नोमान
नोमान
2201 2004 दिल्ली