यूनिटेक समूह से जुड़े मामलों में आदेशों का पालन नहीं हुआ तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा:न्यायालय
संतोष
- 22 Jan 2026, 08:04 PM
- Updated: 08:04 PM
नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि रियल एस्टेट समूह यूनिटेक लिमिटेड से जुड़े मामलों में राज्य के किसी भी प्राधिकार की ओर से उसके आदेशों का पालन नहीं किया जाता है तो वह इसे गंभीरता से लेगा। न्यायालय ने प्राधिकारियों को चेतावनी दी कि वे अटकी हुई आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने में बाधा न डालें।
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने यूनिटेक समूह से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए प्राथमिकता अनुसूची तय की और कहा कि नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण तथा हरियाणा के नगर एवं ग्रामीण योजना विभाग जैसे राज्य विकास प्राधिकारों की ओर से सभी आवश्यक अनुमतियां प्रदान की जानी चाहिए।
पहली बार इस मामले की सुनवाई कर रही पीठ ने कहा, "अगर यह पाया जाता है कि राज्य के प्राधिकारों की ओर से शीर्ष अदालत के पहले के आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है, तो हम इसे गंभीरता से लेंगे। हम इन परियोजनाओं को पूरा करने में किसी भी तरह की बाधा पैदा करने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम प्राथमिकता के आधार पर सभी आवेदनों की सुनवाई करने के लिए समय सारणी निर्धारित कर रहे हैं।"
पीठ ने कहा कि अहम मुद्दों का निपटारा होने के बाद सभी शिकायतों का जल्द ही समाधान कर दिया जाएगा।
न्यायमूर्ति पारदीवाला ने फ्लैट खरीदारों की ओर से पेश अधिवक्ता आरसी लाहोटी से कहा, "इस अदालत में सुनवाई कम होगी और आदेश ज्यादा दिए जाएंगे, ताकि चीजें फिर से आगे बढ़ने लगें।"
पीठ ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरणों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रविंदर कुमार को निर्देश दिया कि वह रुकी हुई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए धन जुटाने के वास्ते अप्रयुक्त फ्लैट को बेचने की अनुमति देने के संबंध में यूनिटेक बोर्ड को दिए गए पिछले आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करें।
पीठ को जब बताया गया कि यूनिटेक बोर्ड लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के लिए धन जुटाने की कोशिश कर रहा है, तो उसने कुमार से कहा, "हम आपको चेतावनी दे रहे हैं कि अदालत के पहले के आदेशों का अनुपालन किया जाना चाहिए।"
पिछले साल 16 जनवरी को, हजारों घर खरीदारों को राहत देते हुए और यूनिटेक समूह की ओर से निर्मित फ्लैट के लिए उनके रुके हुए ऋण के वितरण को सुविधाजनक बनाते हुए, शीर्ष अदालत ने सात राज्यों में विभिन्न आवासीय परियोजनाओं को रेरा के तहत पंजीकरण से छूट प्रदान कर दी थी।
न्यायालय ने कहा था कि न्याय के हित में पारित आदेश से यूनिटेक समूह की विभिन्न परियोजनाओं के फ्लैट खरीदारों को ऋण जारी करने और वितरित करने के लिए प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं को समाप्त करने में मदद मिलेगी।
रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम 2016 के तहत, 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल या आठ से अधिक अपार्टमेंट वाली प्रत्येक परियोजना को रेरा के तहत पंजीकृत कराना अनिवार्य है।
भाषा पारुल संतोष
संतोष
2201 2004 दिल्ली