कर्नाटक के राज्यपाल ने तीन वाक्य में समाप्त किया संबोधन,मुख्यमंत्री ने की आलोचना
मनीषा
- 22 Jan 2026, 05:41 PM
- Updated: 05:41 PM
(तस्वीरों के साथ जारी)
बेंगलुरु, 22 जनवरी (भाषा) कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने बृहस्पतिवार को यहां राज्य विधानमंडल के संयुक्त सत्र में अपना परंपरागत अभिभाषण केवल तीन वाक्यों (सरकार द्वारा तैयार किए गए विस्तृत भाषण के पहले और आखिरी वाक्यों समेत) में समाप्त कर दिया जिसे लेकर मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने राज्यपाल पर अपना खुद का विचार व्यक्त करने का आरोप लगाया और उन्हें केंद्र सरकार की ''कठपुतली'' करार दिया।
गैर-भाजपा शासित तीन दक्षिणी राज्यों (केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक) में दो दिनों में राज्यपाल और सरकार के बीच तीसरी बार टकराव हुआ है।
विधानसभा और विधानपरिषद में अपने संक्षिप्त संबोधन के बाद गहलोत सत्ताधारी कांग्रेस सदस्यों के विरोध के बीच सदन से बाहर चले गए, जिन्होंने उन्हें घेरने का भी प्रयास किया।
राज्यपाल ने मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष यू टी खादर, विधान परिषद अध्यक्ष बसवराज होरट्टी, विपक्ष के नेताओं, मंत्रियों और सदस्यों का अभिवादन करते हुए अपना अभिभाषण शुरू किया।
राज्यपाल ने हिंदी में कहा, '' मैं राज्य विधानमंडल के संयुक्त सत्र में आप सभी का हार्दिक स्वागत करता हूं। मुझे कर्नाटक विधानमंडल के एक और संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए प्रसन्नता हो रही है। मेरी सरकार राज्य के आर्थिक, सामाजिक एवं भौतिक विकास को दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध है। जय हिंद, जय कर्नाटक।''
कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच. के. पाटिल समेत सत्ता पक्ष के अन्य विधायक आश्चर्य से खड़े हो गए और गहलोत से अभिभाषण पूरा करने का अनुरोध किया।
जैसे ही राज्यपाल निकास द्वार की ओर बढ़े, विधान परिषद सदस्य बी. के. हरिप्रसाद समेत सत्ताधारी विधायकों ने नारे लगाकर उनका घेराव करने की कोशिश की लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें हटा दिया।
इसके बाद विधायकों ने कन्नड़ में 'शर्म, शर्म' और 'धिक्कार-धिक्कार', 'राज्यपाल को धिक्कार' के नारे लगाए। राज्यपाल का बचाव करते दिख रहे भाजपा सदस्यों ने 'भारत माता की जय' के नारे लगाए।
सिद्धरमैया ने गहलोत पर राज्य सरकार द्वारा तैयार भाषण के बजाय अपना खुद का भाषण पढ़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्यपाल संविधान द्वारा निर्धारित अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में विफल रहे हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्यपाल ने सरकार द्वारा तैयार पूरा भाषण नहीं पढ़कर संविधान का उल्लंघन किया है और वह केंद्र सरकार के हाथों की ''कठपुतली'' की तरह काम कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने राज्य सरकार द्वारा तैयार भाषण के बजाय अपना भाषण पढ़ा और वह संवैधानिक अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा तैयार पूरा भाषण नहीं पढ़कर राज्यपाल ने संविधान का उल्लंघन किया और वह केंद्र सरकार के हाथों में ''कठपुतली'' की तरह काम कर रहे हैं।
सिद्धरमैया ने संवाददाताओं से कहा, ''हर नए साल में राज्यपाल को संयुक्त सत्र को संबोधित करना होता है और उन्हें राज्य मंत्रिमंडल द्वारा तैयार भाषण पढ़ना होता है। यह संवैधानिक है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 176 और अनुच्छेद 163 में कहा गया है कि राज्यपाल सरकार या मंत्रिमंडल द्वारा तैयार किया गया भाषण पढ़ेंगे।''
उन्होंने कहा, ''आज उन्होंने मंत्रिमंडल द्वारा तैयार भाषण पढ़ने के बजाय स्वयं का तैयार किया हुआ अभिभाषण दिया। यह भारतीय संविधान के प्रावधानों के विरुद्ध है। यह संविधान के अनुच्छेद 176 और 163 का स्पष्ट उल्लंघन है इसलिए यह राज्यपाल का अभिभाषण नहीं माना जा सकता। उन्होंने संविधान के अनुसार अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया। उन्होंने भारतीय संविधान द्वारा निर्धारित अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया।''
मुख्यमंत्री ने कहा, ''इसलिए हम राज्यपाल के इस रुख का विरोध करेंगे। हम इस पर विचार कर रहे हैं कि उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाए या नहीं। हम आपको सूचित करेंगे।''
कर्नाटक विधानसभा की कार्यवाही पुनः शुरू होते ही, राज्यपाल के अभिभाषण पर विधि मंत्री पाटिल के भाषण को प्रतिष्ठित व्यक्तियों के लिए आयोजित पारंपरिक श्रद्धांजलि से पहले प्राथमिकता दी गई, जिस पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
पाटिल ने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने राष्ट्रगान का अपमान किया, क्योंकि उन्होंने अपने अभिभाषण के अंत में राष्ट्रगान बजने का इंतजार नहीं किया।
विपक्षी विधायकों ने कहा कि श्रद्धांजलि से पहले मंत्री को बोलने की अनुमति देना परंपरा के विरुद्ध है।
सदन के नियमों का हवाला देते हुए नेता प्रतिपक्ष आर अशोक ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण से पहले, उसके दौरान या उसके बाद किसी को भी अनुशासनहीन व्यवहार नहीं करना चाहिए, लेकिन इसका उल्लंघन किया गया। अशोक ने नियम का उल्लंघन करने वाले विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
लोक भवन और कांग्रेस नीत राज्य सरकार के बीच जारी तनावपूर्ण गतिरोध के बीच यह घटनाक्रम हुआ। यह गैर-भाजपा शासित राज्यों में निर्वाचित सरकारों और लोक भवन के बीच टकराव की ताजा घटना है। पिछले दो दिन में यह इस प्रकार की यह तीसरी घटना है।
तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि मंगलवार को वर्ष के पहले सत्र के पहले दिन यह कहते हुए विधानसभा में अपना पारंपरिक अभिभाषण दिए बिना ही सदन से बाहर चले गए थे कि अभिभाषण के पाठ में ''गलतियां'' थीं।
इसी प्रकार, केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने अपने भाषण के कुछ हिस्सों को ''छोड़'' दिया था और लोक भवन ने दावा किया कि राज्यपाल के सुझावों को अभिभाषण के मूल मसौदे से हटा दिया गया था।
गहलोत ने राज्य विधानमंडल के संयुक्त सत्र को संबोधित करने से बुधवार को इनकार कर दिया था। उन्होंने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को केंद्र द्वारा ''निरस्त'' किए जाने संबंधी कुछ संदर्भों पर आपत्ति जताई थी।
इस बीच, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने गहलोत के अभिभाषण पूरा नहीं करने के फैसले का जोरदार बचाव किया और सत्ताधारी कांग्रेस पर केंद्र के खिलाफ जन असंतोष भड़काने के लिए सदन के पटल का 'दुरुपयोग' करने का आरोप लगाया।
उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया से राज्यपाल पर हमला करने की कोशिश करने वाले सत्ताधारी पार्टी के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी मांग की।
भाषा संतोष मनीषा
मनीषा
2201 1741 बेंगलुरु