25वां 'भारत रंग महोत्सव' 27 जनवरी से : 289 नाटकों का होगा मंचन
धीरज
- 22 Jan 2026, 04:16 PM
- Updated: 04:16 PM
नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के वार्षिक आयोजन 'भारत रंग महोत्सव' का 25वां संस्करण यहां 27 जनवरी से शुरू होगा। एनएसडी के निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी ने बृहस्पतिवार को यह घोषणा की।
उन्होंने बताया कि महोत्सव में इस बार कई नयी पहल की जा रही हैं, जिनमें 33 महिला निर्देशकों के नाटक का मंचन, 15 देशों के रंगमंच समूहों की भागीदारी और कई नये आयोजन स्थलों को शामिल किया जाना प्रमुख है।
'भारंगम' के नाम से मशहूर इस महोत्सव में देशभर के 40 केंद्रों में कुल 277 भारतीय और 12 अंतरराष्ट्रीय नाटकों का मंचन होगा। अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियों में रूस, स्पेन, चेक गणराज्य, इटली और नेपाल के नाटक शामिल हैं। ये नाटक कुल 228 भाषाओं और स्थानीय बोलियों मंचित होगी। महोत्सव 20 फरवरी को समाप्त होगा।
इसके अतिरिक्त, इस महोत्सव में 19 विश्वविद्यालयों की प्रस्तुतियां और 14 स्थानीय प्रस्तुतियां शामिल होंगी। हालांकि, एनएसडी ने अभी तक विस्तृत प्रदर्शन कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा नहीं की है।
त्रिपाठी ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया, ''इस बार हम प्रत्येक महाद्वीप से कम से कम एक नाटक का मंचन करने जा रहे हैं जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव बना देगा।''
उन्होंने कहा, ''शास्त्रीय नाटकों से लेकर आधुनिक प्रयोगों और संगीत से लेकर शारीरिक रंगमंच व लोक परंपराओं तक, यह महोत्सव रंगमंच के विविध अभ्यासों और संवेदनाओं का एक साझा मंच है।''
इस महोत्सव के दौरान संस्थान अपना खुद का 'ओटीटी' (ओवर द टॉप) चैनल और एक पॉडकास्ट शृंखला भी शुरू करेगी।''
इस बार महोत्सव का दायरा बढ़ाकर इसे पहली बार कई नये शहरों और इलाकों तक पहुंचाया जा रहा है। इनमें लद्दाख, अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप, दमन और दीव, आइजोल (मिजोरम), तुरा (मेघालय), नगांव (असम), मंडी (हिमाचल प्रदेश) और रोहतक (हरियाणा) जैसे नये केंद्र शामिल किए गए हैं।
यह पहली बार होगा कि 'भारंगम'में ट्रांसजेंडर समुदाय, यौनकर्मियों, वरिष्ठ नागरिकों और समाज के अन्य हाशिए पर पड़े समूहों द्वारा तैयार किए गए नाटकों का मंचन किया जाएगा।
इस महोत्सव में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक व शैक्षणिक संस्थान भी अपनी भागीदारी दर्ज करेंगे। इनमें मैथिली-भोजपुरी अकादमी, हिंदी अकादमी, गढ़वाली-कुमाऊंनी-जौनसारी अकादमी और उर्दू अकादमी जैसे प्रमुख संस्थान शामिल होंगे।
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प्रचेता धीरज
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