उडुपी में भगवा झंडा उठाने के लिए कांग्रेस ने की उपायुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग, डीसी ने दी सफाई
माधव
- 21 Jan 2026, 06:47 PM
- Updated: 06:47 PM
उडुपी (कर्नाटक), 21 जनवरी (भाषा) कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने यहां धार्मिक कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त टी के स्वरूपा द्वारा भगवा झंडा उठाए जाने पर आपत्ति जताते हुए उन पर कार्रवाई की मांग की जबकि अधिकारी ने कहा कि वह आधिकारिक तौर पर कार्यक्रम में शामिल हुई थीं और उनकी भागीदारी किसी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं थी।
जिला कांग्रेस कमेटी के कानूनी और मानवाधिकार प्रकोष्ठ ने 18 जनवरी को पर्याय यात्रा की शुरुआत के दौरान भगवा झंडा उठाने के लिए मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को पत्र लिखकर स्वरूपा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
सोमवार को मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में, उड्डुपी जिला कांग्रेस कमेटी के कानूनी और मानवाधिकार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हरीश शेट्टी ने कहा था कि 18 जनवरी की सुबह, जोदु कट्टे से कृष्णा मठ तक यात्रा की शुरुआत से पहले, उड्डुपी भाजपा विधायक यशपाल सुवर्णा ने "आरएसएस का झंडा डीसी को दिया, जिसे उन्होंने सार्वजनिक रूप से उठाया और लहराया"।
उन्होंने कहा कि उपायुक्त (डीसी) का यह व्यवहार अस्वीकार्य है, क्योंकि यह अधिकारी के सेवा नियमों के खिलाफ है और संविधान में धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के भी विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्वरूपा ने जवाब देते हुए एक बयान में कहा, ''रविवार, 18 जनवरी को तड़के तीन बजे, उड्डुपी श्री कृष्ण मठ के द्विवार्षिक पर्यायोत्सव कार्यक्रम के तहत, मैंने उड्डुपी नगर परिषद के प्रशासक के रूप में अपनी जिम्मेदारियों के तहत स्वामीजी के ''पुराप्रवेश'' कार्यक्रम को हरी झंडी दिखाई। इसी तरह, मैंने नए पर्याय स्वामीजी के लिए नागरिक अभिनंदन कार्यक्रम और स्वामीजी के सर्वज्ञ पीठ पर आसीन होने के बाद आयोजित दरबार कार्यक्रम में भी भाग लिया। मैं सार्वजनिक रूप से यह बताना चाहती हूं कि मेरी भागीदारी किसी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं थी।"
अठारह जनवरी को हुए पर्याय या पर्यायोत्सव में, उड्डुपी श्रीकृष्ण मंदिर के पूजा-प्रबंधन और प्रशासनिक नियंत्रण का औपचारिक हस्तांतरण शिरूर मठ को किया गया, जिसमें श्री वेदवर्धन तीर्थ स्वामीजी ने 2026-28 की अवधि के लिए मंदिर के पीठाधीश्वर-प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
उडुपी में 'पर्याय' व्यवस्था एक परिवर्ती व्यवस्था है, जिसके तहत मंदिर का प्रबंधन आठ मठों—पेजावारा, पुट्टिगे, आदमारु, कृष्णपुर, शिरूर, सोढे, कणीयूर और पालीमारु—द्वारा किया जाता है, और प्रत्येक मठ दो साल के लिए जिम्मेदारी संभालता है।
यह व्यवस्था 13वीं सदी के दार्शनिक-संत श्री मध्वाचार्य ने स्थापित की थी, जिन्हें भारतीय दर्शन में द्वैत धारा के मत का संस्थापक माना जाता है।
भाषा जोहेब माधव
माधव
2101 1847 उडुपी