कर्नाटक के राज्यपाल ने विधानमंडल के संयुक्त सत्र को संबोधित करने से इनकार किया
संतोष
- 21 Jan 2026, 08:53 PM
- Updated: 08:53 PM
(फाइल फोटो के साथ)
बेंगलुरु, 21 जनवरी (भाषा) कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 22 जनवरी को राज्य विधानमंडल के संयुक्त सत्र को संबोधित करने से इनकार कर दिया है। आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
राज्यपाल के फैसले के बाद सरकार ने उनसे मुलाकात करने का निर्णय लिया।
राज्यपाल के इनकार के कारण अभी स्पष्ट नहीं हैं। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल के अभिभाषण में केंद्र सरकार के संदर्भ के कारण गहलोत ने अभिभाषण से इनकार किया है। इससे एक दिन पहले कर्नाटक की ही तरह गैर भाजपा शासित केरल और तमिलनाडु के राज्यपालों के विधानसभा में दिए गए अभिभाषणों को लेकर विवाद खड़ा हो गया था।
राज्य के विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री एच. के. पाटिल के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस संबंध में राज्यपाल से मुलाकात करने के लिए लोक भवन जाएगा।
विधि मंत्री के कार्यालय ने एक बयान में कहा, "राज्यपाल के कल संयुक्त सत्र को संबोधित करने से इनकार के बाद एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल राजभवन जाएगा।"
पिछले दो दिन में यह तीसरी बार है जब किसी राज्य के राज्यपाल ने अभिभाषण देने से इनकार कर दिया है।
इसी तरह, तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि मंगलवार को वर्ष के पहले सत्र के पहले दिन यह कहते हुए विधानसभा में अपना पारंपरिक अभिभाषण दिए बिना ही सदन से बाहर चले गए थे कि अभिभाषण के पाठ में "गलतियां" थीं।
इसी प्रकार, केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने अपने भाषण के कुछ हिस्सों को "छोड़" दिया था, जबकि लोक भवन का दावा है कि राज्यपाल के सुझावों को अभिभाषण के मूल मसौदे से हटा दिया गया था।
कर्नाटक विधानसभा का संयुक्त सत्र 22 जनवरी को शुरू होगा। केंद्र द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को "रद्द" करने समेत कई मुद्दों पर सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा-जद(एस) गठबंधन के बीच टकराव की संभावना के चलते सत्र के हंगामेदार रहने का अनुमान है।
बाईस से 31 जनवरी तक चलने वाले इस सत्र की शुरुआत बृहस्पतिवार को राज्यपाल गहलोत के परंपरागत अभिभाषण से होनी थी।
सत्तारूढ़ कांग्रेस केंद्र में भाजपा-नीत राजग सरकार के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित करने की योजना बना रही है, जिसमें मनरेगा को रद्द करने पर आपत्ति जताते हुए इसे बहाल करने की मांग की जाएगी। साथ ही नए विकसित भारत-रोजगार आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) अधिनियम को रद्द करने की भी मांग की जाएगी।
भाषा जोहेब संतोष
संतोष
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