मालवीय मामले में अदालत के आदेश के बाद उदयनिधि स्टालिन को उपमुख्यमंत्री पद से हटाया जाए: भाजपा
माधव
- 21 Jan 2026, 08:50 PM
- Updated: 08:50 PM
नयी दिल्ली, 21 जनवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन की 'सनातन धर्म' पर टिप्पणियों को ''तोड़-मरोड़कर पेश करने'' के आरोप में पार्टी नेता अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा रद्द किए जाने के बाद द्रमुक पर निशाना साधा और मांग की कि उदयनिधि को उनके पद से हटाया जाए तथा उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाए।
मद्रास उच्च न्यायालय ने उदयनिधि स्टालिन की 'सनातन धर्म' पर टिप्पणियों को ''तोड़-मरोड़कर पेश करने'' के आरोप में 2023 में तिरुचि सिटी पुलिस द्वारा मालवीय के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी रद्द करते हुए कहा कि उपमुख्यमंत्री की टिप्पणियां ''नफरती भाषण'' के दायरे में आती हैं।
न्यायमूर्ति एस. श्रीमती ने फैसले में कहा, ''यह न्यायालय अफसोस के साथ इस व्यापक स्थिति को दर्ज करता है कि नफरत फैलाने वाले भाषण देने की शुरुआत करने वाले व्यक्ति को बिना किसी सजा के छोड़ दिया जाता है, लेकिन नफरत फैलाने वाले भाषण पर प्रतिक्रिया देने वाले व्यक्ति को कानून का सामना करना पड़ता है।''
भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ के फैसले को तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की "संकीर्ण और हिंदू विरोधी सोच" पर "कड़ा तमाचा" करार दिया। उन्होंने कहा कि यह विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन की "हिंदू विरोधी विचारधारा" के लिए भी एक "झटका" है।
तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा के प्रभारी गोयल ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "उच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उदयनिधि स्टालिन के घृणास्पद भाषण पर सवाल उठाना या उसका जवाब देना अपराध नहीं है और प्राथमिकी कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग थी।"
उन्होंने कहा, "न्याय की जीत हुई है।"
भाजपा नेता ने कहा कि सत्य को कटघरे में नहीं खड़ा किया जा सकता, न ही द्रमुक की राजनीतिक प्रतिशोध किसी "सभ्यतागत विश्वास" को नष्ट कर सकती है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उच्च न्यायालय के इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ''सत्यमेव जयते।''
पूनावाला ने आरोप लगाया कि द्रमुक सरकार ने भाजपा के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग के प्रभारी मालवीय के खिलाफ सिर्फ इसलिए प्राथमिकी दर्ज कराई ताकि उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणियों के बाद 'एक्स' पर एक पोस्ट में सच बोलने पर उन्हें ''दबाया जा सके और दंडित'' किया जा सके।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा, ''उच्च न्यायालय की फटकार के बाद उदयनिधि स्टालिन के पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। उन्हें (उपमुख्यमंत्री पद से) तत्काल हटाया जाना चाहिए और उस भाषण को लेकर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए, जिसे देश की 80 प्रतिशत आबादी यानी हिंदू समुदाय के प्रति नफरती भाषण बताया गया है।''
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बेटे उदयनिधि ने यह कहकर राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था कि 'सनातन धर्म' समानता एवं सामाजिक न्याय के खिलाफ है और इसे समाप्त कर देना चाहिए।
उन्होंने 'सनातन धर्म' की तुलना कोरोना वायरस, मलेरिया और मच्छर एवं डेंगू वायरस से होने वाले बुखार से भी की थी तथा कहा था कि ऐसी चीजों का विरोध नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें नष्ट कर देना चाहिए।
मालवीय ने उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए द्रमुक नेता पर निशाना साधा था और उन पर 'सनातन धर्म' मानने वाले 80 प्रतिशत लोगों के नरसंहार का आह्वान करने का आरोप लगाया था।
इसके बाद तमिलनाडु पुलिस ने भाजपा नेता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।
भाषा आशीष माधव
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