मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति की मेजबानी की, 200 अरब अमेरिकी डॉलर के व्यापार लक्ष्य पर चर्चा
सुरभि नेत्रपाल
- 19 Jan 2026, 11:40 PM
- Updated: 11:40 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने सोमवार को एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी की योजना पेश की और एलएनजी समझौते पर हस्ताक्षर किए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान ने 2032 तक वार्षिक व्यापार के लिए 200 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य निर्धारित करते हुए संबंधों को मजबूत करने के लिए व्यापक एजेंडा प्रस्तुत किया।
मोदी ने दिल्ली हवाई अड्डे पर अल नाह्यान का गले मिलकर स्वागत किया और फिर वे एक ही वाहन में प्रधानमंत्री आवास तक साथ गए, जहां उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर और प्रतिनिधिमंडल स्तर के प्रारूपों में बातचीत की।
दोनों पक्षों द्वारा हस्ताक्षर किए गए पांच दस्तावेजों में सबसे अहम दस्तावेज रणनीतिक रक्षा साझेदारी स्थापित करने का आशय पत्र रहा। यह कदम पाकिस्तान और सऊदी अरब द्वारा अपने दशकों पुराने रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के चार महीने बाद उठाया गया।
रक्षा साझेदारी के तहत भारत और यूएई रक्षा औद्योगिक सहयोग और उन्नत प्रौद्योगिकियों, साइबरस्पेस प्रशिक्षण, विशेष अभियानों, अपनी सेनाओं की अंतरसंचालनीयता और आतंकवाद रोधी गतिविधियों में सहयोग पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
इस दौरान एक और समझौते पर हस्ताक्षर किए गए जिसके तहत हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) 2028 से शुरू होने वाले 10 वर्षों में अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी गैस से 0.5 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी (तरल प्राकृतिक गैस) खरीदेगी।
कतर के बाद संयुक्त अरब अमीरात भारत को एलएनजी की आपूर्ति करने वाला दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है।
दोनों पक्षों ने उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाने का भी फैसला किया, जिसमें बड़े परमाणु रिएक्टर और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर का विकास तथा उन्नत रिएक्टर प्रणालियों, परमाणु ऊर्जा संयंत्र संचालन और रखरखाव एवं परमाणु सुरक्षा में सहयोग शामिल है।
यूएई के नेता की लगभग साढ़े तीन घंटे की यात्रा समाप्त होने के बाद प्रेस वार्ता में विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा, ‘‘यह एक संक्षिप्त, लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण यात्रा रही।’’
मिसरी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को सहयोग के प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में पहचाना गया और यूएई के साथ साझेदारी में भारत में एक ‘सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर’ स्थापित करने के लिए सहयोग करने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने कहा कि खाड़ी देश भारत में डेटा सेंटर की क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश पर भी विचार करेगा।
विदेश सचिव ने कहा कि दोनों पक्षों ने 2032 तक वार्षिक व्यापार के लिए 200 अरब अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। वर्ष 2023-24 में दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 84 अरब अमेरिकी डॉलर का था।
व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए मोदी और अल नाह्यान ने अपनी-अपनी टीम को राष्ट्रीय भुगतान मंचों को आपस में जोड़ने की दिशा में काम करने का निर्देश दिया ताकि कुशल, तेज और लागत प्रभावी सीमा पार भुगतान सक्षम हो सकें।
संयुक्त बयान के अनुसार, उन्होंने मध्य पूर्व, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरेशिया क्षेत्र में लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए ‘भारत मार्ट’, ‘वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर’ और ‘भारत-अफ्रीका सेतु’ जैसी प्रमुख पहलों के शीघ्र कार्यान्वयन का भी आह्वान किया।
दोनों पक्षों ने रक्षा संबंधों को व्यापक रूप से विस्तारित करने का भी संकल्प जताया।
मिसरी ने कहा, ‘‘भारत और यूएई के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए एक ढांचागत समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए दोनों पक्षों के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।’’
संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति गहरे सम्मान और रणनीतिक स्वायत्तता के महत्व पर जोर दिया।
इसमें कहा गया कि मोदी और अल नाह्यान ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी के मुख्य स्तंभ के रूप में स्थिर और मजबूत द्विपक्षीय रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग की आवश्यकता को स्वीकार किया।
विदेश सचिव ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में संयुक्त कार्य के लिए एक और आशय पत्र पर भी हस्ताक्षर किए गए।
उन्होंने बताया कि गुजरात के धोलेरा में एक ‘विशेष निवेश क्षेत्र’ के विकास में संयुक्त अरब अमीरात की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए एक अलग दस्तावेज पर भी हस्ताक्षर किए गए।
मोदी और अल नाह्यान के बीच हुई चर्चा में कई नए और उभरते क्षेत्रों में सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें भारत में ‘शांति’ अधिनियम पारित होने के मद्देनजर असैन्य परमाणु सहयोग के नए अवसर भी शामिल हैं।
मिसरी ने बताया कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता खाद्य क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देगा और भारत से संयुक्त अरब अमीरात को खाद्य उत्पादों तथा अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करेगा।
विदेश सचिव ने कहा कि इससे भारत के किसानों को लाभ होगा।
दोनों नेताओं ने अपनी अपनी टीम को पारस्परिक रूप से मान्यता प्राप्त संप्रभुता समझौतों के तहत संयुक्त अरब अमीरात और भारत के बीच ‘डिजिटल दूतावास’ स्थापित करने की संभावना तलाशने का निर्देश दिया। मिसरी ने कहा कि यह अपेक्षाकृत एक नयी अवधारणा है।
उन्होंने कहा कि वार्ता के दौरान दोनों नेताओं के बीच यमन, गाजा और ईरान की स्थिति पर चर्चा हुई। हालांकि, मिसरी ने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया।
मिसरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और अल नाह्यान ने सीमा पार आतंकवाद की स्पष्ट रूप से निंदा की और कहा कि आतंकवाद के सभी कृत्यों के समर्थकों और वित्तपोषकों को न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए।
यूएई के राष्ट्रपति ने इस वर्ष ‘ब्रिक्स’ समूह की भारत की अध्यक्षता की सफलता के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया।
‘ब्रिक्स’ दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और हाल में विस्तारित सदस्य जैसे ईरान, मिस्र, यूएई, इथियोपिया, इंडोनेशिया) का एक समूह है।
इससे पूर्व मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘अपने भाई, यूएई के राष्ट्रपति महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान का स्वागत करने हवाई अड्डे पर गया। उनकी यात्रा इस बात को दर्शाती है कि वह भारत-यूएई के बीच मजबूत मित्रता को कितनी अहमियत देते हैं। दोनों के बीच चर्चाओं को लेकर उत्सुक हूं।’’
यूएई के राष्ट्रपति को हवाई अड्डे पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विदाई दी।
भाषा सुरभि