वांगचुक एकांत कोठरी में कंबल पर सोते हैं, किताबें ही अब उनके साथी : गीतांजलि अंगमो

वांगचुक एकांत कोठरी में कंबल पर सोते हैं, किताबें ही अब उनके साथी : गीतांजलि अंगमो