भ्रष्टाचार की शिकायतों में पिछले दो वर्षों में लगातार वृद्धि हुई है: लोकपाल अध्यक्ष
सुभाष माधव
- 16 Jan 2026, 09:50 PM
- Updated: 09:50 PM
नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) लोकपाल अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर ने शुक्रवार को कहा कि पिछले दो वर्षों में भ्रष्टाचार रोधी संस्था को प्राप्त शिकायतों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, जो नागरिकों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।
भ्रष्टाचार रोधी संस्था के स्थापना दिवस को संबोधित करते हुए, इसके अध्यक्ष ने नागरिकों को याद दिलाया कि वे भ्रष्टाचार से लड़ने वाले जमीनी सिपाही हैं, और यदि वे चुप रहने का विकल्प चुनते हैं, तो वह चुप्पी भी भ्रष्टाचार का एक रूप है।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले दो वर्षों में लोकपाल में प्राप्त शिकायतों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2025-26 के लिए अनुमानित शिकायतों की संख्या वर्ष 2024-25 में दर्ज शिकायतों की तुलना में अत्यधिक वृद्धि दर्शाती है। शिकायतों में यह वृद्धि केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की बढ़ती भागीदारी का प्रतिबिंब है।’’
उन्होंने कहा कि इससे यह भी संकेत मिलता है कि नागरिक अपने अधिकारों और नैतिक कर्तव्यों के प्रति अधिक जागरूक हैं और लोकपाल से शिकायत निवारण के लिए संपर्क करने में अधिक आत्मविश्वास महसूस कर रहे हैं।
अध्यक्ष ने कहा, ‘‘न्यायाधीशों द्वारा आयोजित बैठकों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, जो मामलों को शीघ्रता से निस्तारित करने के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण को दर्शाती है।’’
उन्होंने कहा कि इससे लंबित मामलों की संख्या न्यूनतम हुई है, जिसके परिणामस्वरूप शिकायतों का समय पर और कुशलतापूर्वक निस्तारण हो रहा है।
खानविलकर ने कहा, ‘‘हम पारदर्शिता, निरंतरता और जवाबदेही की अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं। लेकिन हम न्यायपूर्ण होने के अपने कर्तव्य को भी समझते हैं। क्योंकि सच्चा न्याय प्रदर्शन नहीं, बल्कि धैर्य की मांग करता है। लोकपाल की स्वतंत्रता इस बात में नहीं है कि वह कितनी जोर से इसकी घोषणा करता है, बल्कि इस बात में है कि वह कितनी शांतिपूर्वक और साहसपूर्वक इसका प्रयोग करता है।’’
स्थापना दिवस समारोह का आयोजन यहां लोकपाल कार्यालय में किया गया।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘‘पिछले वर्ष, लोकपाल दिवस 2025 को पहली बार एक भव्य आयोजन के रूप में मनाया गया, जिसमें नयी दिल्ली के मानेकशॉ केंद्र में गणमान्य व्यक्तियों और हितधारकों ने भाग लिया।’’
बयान में कहा गया, ‘‘हालांकि, इस वर्ष, बजटीय नियंत्रण के कारण लोकपाल को खर्च में मितव्ययिता बरतनी पड़ रही है, इसलिए लोकपाल ने भारत के लोकपाल के इतिहास में इस महत्वपूर्ण मील के पत्थर को अपने परिसर में ही सादगीपूर्ण तरीके से मनाने का निर्णय लिया।’’
भाषा सुभाष