तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष ने बीआरएस के दो विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं को खारिज किया
यासिर प्रशांत
- 16 Jan 2026, 12:17 AM
- Updated: 12:17 AM
हैदराबाद, 15 जनवरी (भाषा) तेलंगाना विधानसभा के अध्यक्ष गद्दाम प्रसाद कुमार ने बृहस्पतिवार को बीआरएस के 10 विधायकों में से दो के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं को खारिज कर दिया। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।
सूत्रों ने बताया कि इन विधायकों पर आरोप है कि वे सत्तारूढ़ कांग्रेस में शामिल हो गये थे।
अध्यक्ष ने दिसंबर में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के पांच विधायकों के खिलाफ दायर इसी तरह की याचिकाओं को खारिज कर दिया था।
कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मैंने बीआरएस द्वारा काले यादैया (चेवेल्ला क्षेत्र) और पोचारम श्रीनिवास रेड्डी (बांसवाड़ा) के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं को खारिज करने के आदेश जारी किए हैं।’’
अध्यक्ष ने इससे पहले उन 10 विधायकों को नोटिस जारी किया था, जिनके खिलाफ विपक्षी दल ने अयोग्यता याचिकाएं दायर की हैं।
यादैया और पोचारम श्रीनिवास रेड्डी के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं को हाल में खारिज किये जाने के बाद, कडियाम श्रीहरि, दानम नागेंद्र और डॉ. एम. संजय कुमार के खिलाफ ऐसी ही तीन और याचिकाएं अब अध्यक्ष के पास लंबित हैं।
इससे पहले अध्यक्ष ने पांच विधायकों तेलम वेंकट राव, बंदला कृष्ण मोहन रेड्डी, टी प्रकाश गौड़, गुडेम महिपाल रेड्डी और अरेकापुडी गांधी के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं को खारिज कर दिया था।
उच्चतम न्यायालय ने 17 नवंबर को तेलंगाना विधानसभा के अध्यक्ष को अवमानना का नोटिस जारी किया था, क्योंकि उन्होंने कांग्रेस में कथित तौर पर शामिल हुए बीआरएस विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करने संबंधी उच्चतम न्यायालय के निर्देश का पालन नहीं किया था।
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में विधानसभा अध्यक्ष के फैसले की कड़ी आलोचना की।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी बेशर्मी से दलबदल करने वाले विधायकों का समर्थन कर रहे हैं तथा इस प्रक्रिया में संविधान का मजाक उड़ा रहे हैं और हर कदम पर इसे कमजोर कर रहे हैं।
रामा राव ने कहा, ‘‘विधानसभा अध्यक्ष पर राजनीतिक दबाव डालकर कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर अपनी नैतिक गिरावट का प्रदर्शन किया है, जबकि काले यदैया और श्रीनिवास रेड्डी को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।’’
भाषा यासिर