झारखंड: पुलिस ने 'हमले' की शिकायत पर ईडी कार्यालय की सीसीटीवी फुटेज जब्त की
राखी पवनेश
- 15 Jan 2026, 10:41 PM
- Updated: 10:41 PM
रांची, 15 जनवरी (भाषा) रांची पुलिस की एक टीम ने बृहस्पतिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जोनल कार्यालय से सीसीटीवी फुटेज अपने कब्जे में लिया। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई झारखंड के एक पूर्व सरकारी कर्मचारी द्वारा पूछताछ के दौरान ईडी अधिकारियों पर मारपीट का आरोप लगाए जाने के बाद की गई।
इस घटनाक्रम ने विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के बीच पुलिस बल के अधिकारों को लेकर वाकयुद्ध छिड़ गया।
सूत्रों के अनुसार, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के पूर्व कर्मचारी ने 12 जनवरी को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कथित जलापूर्ति घोटाले की जांच के दौरान ईडी अधिकारियों ने उसके साथ मारपीट की।
सूत्रों ने कहा कि पुलिसकर्मी बृहस्पतिवार सुबह ईडी कार्यालय पहुंचे। हालांकि, रांची पुलिस ने इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल पुलिस और ईडी अधिकारियों के बीच हुए टकराव के बाद सामने आया है, जब जांच एजेंसी ने जबरन प्रवेश और दस्तावेजों की चोरी के आरोपों के बीच राजनीतिक परामर्श फर्म 'आई-पैक' के कार्यालय और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर तलाशी ली थी।
नाम नहीं छापने की शर्त पर रांची पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि मारपीट के आरोपों के मद्देनजर ईडी कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है।
सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा बढ़ाने के लिए ईडी कार्यालय के पास सीआईएसएफ के जवानों को तैनात किया गया है।
इस बीच, झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि ईडी कार्यालय पर पुलिस कार्रवाई की आड़ में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े मामलों से संबंधित महत्वपूर्ण सबूतों के साथ छेड़छाड़ और उन्हें नष्ट करने का प्रयास किया जा सकता है।
मरांडी ने आरोप लगाया, "सूचना मिली है कि रांची के हवाई अड्डा रोड स्थित ईडी क्षेत्रीय कार्यालय को रांची पुलिस ने घेर लिया है। ईडी कार्यालय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामलों से संबंधित महत्वपूर्ण सबूत मौजूद हैं।"
मरांडी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा, "यह आशंका है कि पुलिस कार्रवाई की आड़ में इन महत्वपूर्ण सबूतों के साथ छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट करने का प्रयास किया जा सकता है।"
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी आशंका जताई कि राज्य पुलिस की कार्रवाई के कारण ईमानदार अधिकारियों की गिरफ्तारी हो सकती है।
दुबे ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि झारखंड सरकार और उसके मुख्यमंत्री हेमंत सोरन ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उदाहरण का अनुसरण किया है, सूचना के अनुसार रांची में पुलिस ने ईडी कार्यालय को घेर लिया है।
दुबे ने आरोप लगाया कि झारखंड में ईडी के खिलाफ पहले भी झूठे मामले दर्ज किए गए हैं और झामुमो-कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा एजेंसी पर हमले के प्रयास भी हुए हैं।
उन्होंने कहा, “ये घटनाएं जांच एजेंसियों के स्वतंत्र और निष्पक्ष कामकाज में बाधा डालने के प्रयास हैं। हेमंत जी, ध्यान से सुनिए... हम झारखंड को बंगाल नहीं बनने देंगे। भ्रष्टाचार के लिए निश्चित रूप से आपको सजा मिलेगी। झारखंड में मौजूद अवैध प्रशासन को पूरी तरह से खत्म करने का समय आ गया है।”
विपक्ष के नेता के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए, झामुमो के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि पुलिस अपना काम कर रही है और मरांडी के खिलाफ "केंद्रीय और राज्य बलों को झड़प के लिए उकसाने" का मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
उन्होंने संवाददाओं से कहा, "अगर किसी ने पुलिस में मारपीट की शिकायत दर्ज कराई है, तो जांच करना पुलिस का कर्तव्य है। पुलिस ने इस मामले के संबंध में ईडी के संबंधित अधिकारियों को थाने बुलाया था लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। जांच के नियमों के अनुसार, रांची पुलिस प्राथमिकी में दर्ज सबूतों का मिलान करने के लिए ईडी कार्यालय पहुंची। पुलिस जांच के तहत परिस्थितिजन्य मूल्यांकन कर रही है।"
सत्ताधारी गठबंधन की सदस्य कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा इस मामले को बेवजह बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है क्योंकि पुलिस को घटनास्थल पर जाकर जांच करनी होगी।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने कहा, "लोगों को यह विश्वास हो गया है कि भाजपा और ईडी का दफ्तर एक ही है।"
जनवरी 2024 में सोरेन ने कथित भूमि घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में दिल्ली स्थित उनके आवास पर ईडी द्वारा की गई तलाशी को लेकर यहां अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति थाने में ईडी के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
प्राथमिकी के अनुसार, सोरेन ने आरोप लगाया था कि ईडी ने उन्हें और उनके पूरे समुदाय को “परेशान करने और बदनाम करने” के लिए तलाशी ली।
बाद में ईडी अधिकारियों द्वारा एससी/एसटी अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन के आरोपों की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर सोरेन ने झारखंड उच्च न्यायालय का रुख किया था।
मामला फिलहाल अदालत में लंबित है।
भाषा
राखी