आई-पैक छापा मामलाः भाजपा ने ईडी की याचिका पर न्यायालय की टिप्पणी को ममता पर ‘गंभीर आरोप’ बताया
धीरज पवनेश
- 15 Jan 2026, 08:02 PM
- Updated: 08:02 PM
नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कोलकाता स्थित आई-पैक परिसर में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी को कथित तौर पर बाधित करने के खिलाफ दाखिल याचिका पर उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर एक ‘‘गंभीर आरोप’’ करार दिया।
केंद्र में सत्तारूढ़ और पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने कोयला तस्करी और धनशोधन के आरोपियों को बचाने के लिए राज्य की मशीनरी का इस्तेमाल किया।
भाजपा ने कहा कि ममता बनर्जी आज जनता और कानून की अदालत दोनों में पूरी तरह से बेनकाब और पराजित हो चुकी हैं। पार्टी ने रेखांकित किया अब उनके मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का कोई आधार नहीं है।
भाजपा का यह बयान शीर्ष अदालत द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी में बाधा डालने के आरोप को ‘बेहद गंभीर’ बताये जाने के बाद आया। शीर्ष अदालत ने इस बात की सुनवाई करने पर सहमति जताई कि क्या किसी राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियां किसी गंभीर अपराध की केंद्रीय एजेंसी की जांच में हस्तक्षेप कर सकती हैं।
उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में ईडी के उन अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर रोक लगा दी है, जिन्होंने आठ जनवरी को इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) के कार्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापा मारा था। इसी के साथ राज्य पुलिस को छापे की सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल सरकार, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार और शीर्ष पुलिस अधिकारियों को ईडी की उन याचिकाओं पर नोटिस जारी किया, जिनमें आई-पैक परिसर में छापेमारी में कथित रूप से बाधा डालने के आरोप में उनके खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने का अनुरोध किया गया है।
भाजपा के पश्चिम बंगाल मामलों के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘‘यह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर एक गंभीर आरोप है।’’
उन्होंने कहा कि न्यायालय ने ‘कड़ी’ टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिका में राज्य एजेंसियों द्वारा ईडी की जांच में कथित हस्तक्षेप के गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं।
मालवीय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि न्यायालय ने चेतावनी दी है कि गंभीर आर्थिक अपराधों की जांच कर रही केंद्रीय एजेंसियों के काम में बाधा डालने से अराजकता फैल सकती है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने यहां स्थित पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों और ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर रोक को ममता बनर्जी के लिए ‘‘करारा तमाचा’’ करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के शासन में पश्चिम बंगाल में ‘‘जंगल राज’’ है।
भाटिया ने कहा, “माननीय उच्चतम न्यायालय को सलाम, जिसने एक बार फिर ममता बनर्जी जैसी अव्यवस्थित नेता को आईना दिखाया है और यह संदेश दिया कि भारत और पश्चिम बंगाल में केवल कानून का शासन ही कायम रहेगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘चुनाव नजदीक आ रहे हैं। जनता ऐसा सबक सिखाएगी कि ममता बनर्जी की भ्रष्ट राजनीति के साथ-साथ अराजकता भी पूरी तरह से नष्ट हो जाएगी।’’
भाजपा की एक अन्य राष्ट्रीय प्रवक्ता शाजिया इल्मी ने उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों को बनर्जी और उनकी सरकार के लिए ‘‘बड़ा झटका’’ करार दिया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की सुचिता की अवहेलना करने के उनके ‘‘निरंतर रवैये’’ को भी संज्ञान में लिया गया।
भाटिया के साथ संवाददाता सम्मेलन में मौजूद इल्मी ने कहा, ‘‘ममता बनर्जी आज जनता और कानून दोनों की अदालत में पूरी तरह से बेनकाब और पराजित हो चुकी हैं। अब उनके मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।’’
मालवीय ने कहा कि जब कोई मुख्यमंत्री कोयला तस्करी और धनशोधन के आरोपियों को बचाने और केंद्रीय एजेंसियों को डराने-धमकाने के लिए राज्य मशीनरी का इस्तेमाल करता है, तो उच्चतम न्यायालय का हस्तक्षेप ‘‘अपरिहार्य’’ हो जाता है।
उन्होंने कहा कि आई-पैक परिसर में ईडी की छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी का आचरण सुशासन नहीं बल्कि भ्रष्टाचार को संरक्षण देने के लिए सत्ता का दुरुपयोग था।
भाटिया ने आरोप लगाया कि ईडी की छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी आई-पैक के परिसर में जबरन दाखिल हो गईं, जांच अधिकारियों को धमकाया और कथित कोयला तस्करी से जुड़े धनशोधन मामले के सबूत चुरा लिए।
उन्होंने कहा, ‘‘इनकी गुंडागर्दी देखिए। कलकत्ता उच्च न्यायालय में इस मामले से संबंधित एक याचिका की सुनवाई से पहले, तृणमूल कांग्रेस के आईटी प्रकोष्ठ ने अपने गुंडों को व्हाट्सऐप संदेश भेजकर अदालत कक्ष के अंदर बुलाया।’’
ईडी की ओर से न्यायालय में दायर याचिका आठ जनवरी की घटनाओं के बाद आई है। कथित कोयला तस्करी से जुड़े धनशोधन के मामले में राजनीतिक परामर्श कंपनी आई-पैक के कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित कार्यालय और इसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर जांच एजेंसी की छापेमारी के दौरान ईडी अधिकारियों को बाधाओं का सामना करना पड़ा था।
जांच एजेंसी ने दावा किया है कि ममता बनर्जी परिसर में दाखिल हो गईं और जांच से संबंधित ‘महत्वपूर्ण’ सबूत अपने साथ ले गईं।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय एजेंसी पर अपने न्यायाधिकार से परे जाकर कार्य करने का आरोप लगाया है। उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने ईडी की जांच में बाधा डालने के आरोप का खंडन किया है। राज्य पुलिस ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
भाषा धीरज