गुजरात: लोगों ने पतंगबाजी से ‘उत्तरायण’ का किया स्वागत
राखी धीरज
- 14 Jan 2026, 03:50 PM
- Updated: 03:50 PM
(तस्वीरों के साथ)
अहमदाबाद, 14 जनवरी (भाषा) अहमदाबाद के आसमान में बुधवार सुबह हजारों रंग-बिरंगी पतंगे नजर आईं। ‘उत्तरायण’ के जश्न में लोग पतंगबाजी के लिए अपने-अपने छतों पर उमड़ पड़े और “काई पो छे” की गूंज से शहर जीवंत हो उठा।
छतों में बज रही बॉलीवुड गीतों की धुन और ‘चिक्की’ की खुशबू ने उत्सव के माहौल को और जीवंत बना दिया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस अवसर पर अपने परिवार और यहां नारनपुरा इलाके के लोगों के साथ पतंगबाजी का आनंद उठाया।
गुजरात में मकर संक्रांति को ‘उत्तरायण’ कहा जाता है। इस अवसर पर केवल आसमान ही नहीं बल्कि गलियां और मोहल्ले भी उत्साह के रंग में रंग गए।
प्रतिद्वंद्वी की पतंग काटने पर लगने वाला “काई पो छे” और डोर लपेटने का इशारा “लपेट” हर ओर सुनाई देता रहा।
शहर की सड़कों पर यातायात अपेक्षाकृत कम रहा क्योंकि अधिकतर लोग छतों पर ही जमे रहे और पतंगबाजी का आनंद उठाया।
महिलाओं ने छतों पर चटाइयां बिछाकर पारंपरिक उत्तरायण व्यंजन परोसे, जिनमें गन्ना, चिक्की, फाफड़ा, भजिया और इस पर्व से जुड़ी खास सब्जी ‘उंधियू’ के साथ पूरी शामिल रही।
मणिनगर निवासी 60 वर्षीय संजय दहनुकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि उत्तरायण उनका पसंदीदा त्योहार है क्योंकि यह पूरे परिवार को एक साथ लाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं दो दिनों के लिए अपना कारोबार बंद रखता हूं ताकि पूरी तरह पतंगबाजी का आनंद ले सकूं। पहले जब हम पुराने शहर में रहते थे तो खरीदारी के लिए बाहर निकलते थे। अब शहर के बाहरी इलाके में रहते हैं लेकिन उत्तरायण का जोश आज भी वैसा ही है।”
पूर्वी अहमदाबाद के 29 वर्षीय विरल ने भी इसी तरह की भावनाएं व्यक्त कीं।
उन्होंने कहा, “पूर्वी अहमदाबाद का उत्तरायण कभी अपना आकर्षण नहीं खोएगा। यह दिन मुझे बचपन की याद दिलाता है, जब हम सूर्योदय से सूर्यास्त तक छतों पर डटे रहते थे।”
विरल ने बताया कि बड़ी कंपनियों में काम करने वाले उनके कई दोस्तों ने छुट्टी ले ली है लेकिन उन्होंने अहमदाबाद में रहकर उत्तरायण मनाना ही बेहतर समझा।
हर साल उत्तरायण से पहले यहां अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का आयोजन किया जाता है।
यह पर्व सूर्य के उत्तरायण होने और गर्मी के आगमन का संकेत देता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी सोमवार को इस अवसर पर पतंगबाजी का आनंद लिया था।
भाषा राखी