मेरे पति को हिरासत में लेने वाले अधिकारियों ने अप्रासंगिक सामग्री पर भरोसा जताया: वांगचुक की पत्नी
पारुल संतोष
- 12 Jan 2026, 09:25 PM
- Updated: 09:25 PM
नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे आंगमो ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि उनके पति को हिरासत में लेने वाले अधिकारियों ने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया और अप्रासंगिक सामग्री पर भरोसा जताया।
गीतांजलि ने शीर्ष अदालत को बताया कि वांगचुक को वे चार वीडियो नहीं उपलब्ध कराए गए हैं, जिनके आधार पर अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में लिया था। उन्होंने इसे प्रभावी प्रतिनिधित्व के वांगचुक के अधिकार का उल्लंघन बताया।
गीतांजलि की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ से कहा कि वीडियो उपलब्ध न कराया जाना, सलाहकार बोर्ड के साथ-साथ सरकार के समक्ष प्रभावी प्रतिनिधित्व करने के वांगचुक के अधिकार का उल्लंघन है।
सिब्बल ने दलील दी कि जिलाधिकारी ने वांगचुक की हिरासत की सिफारिश करते समय विवेक का इस्तेमाल नहीं किया और लद्दाख के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) की ओर से की गई सिफारिशों को “हूबहू आगे बढ़ा दिया।”
उन्होंने कहा, “हिरासत के लिए बताया गया आधार सिफारिश की नकल भर है। जिन तथ्यों पर भरोसा जताया गया, उनका हिरासत आदेश से सीधा संबंध होना चाहिए। हिरासत के लिए अप्रासंगिक चीजों को आधार बनाया गया।”
मामले की सुनवाई 13 जनवरी को जारी रहेगी।
इससे पहले, गीतांजलि ने शीर्ष अदालत में दलील दी कि लेह में उनके पति की ओर से दिए गए भाषण का मकसद हिंसा को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि उसे शांत करना था। उन्होंने कहा कि वांगचुक को अपराधी के रूप में चित्रित करने के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।
गीतांजलि ने न्यायालय को बताया कि वांगचुक को उनकी हिरासत के “संपूर्ण आधार” के बारे में जानकारी नहीं उपलब्ध कराई गई और उन्हें इस कार्रवाई के खिलाफ संबंधित प्राधिकरण के समक्ष अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं प्रदान किया गया।
वांगचुक को लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और इस केंद्र-शासित प्रदेश को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद, 26 सितंबर 2025 को कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया था। इन प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हो गई थी और 90 अन्य घायल हुए थे।
सरकार ने वांगचुक पर हिंसा को भड़काने का आरोप लगाया है।
लेह के जिलाधिकारी ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया था कि वांगचुक राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और आवश्यक सेवाओं के रखरखाव के लिए हानिकारक गतिविधियों में शामिल थे, जिसके कारण उन्हें एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था।
शीर्ष अदालत में दायर हलफनामे में जिलाधिकारी ने इन आरोपों से इनकार किया था कि वांगचुक को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था या हिरासत में उनके साथ अनुचित व्यवहार किया जा रहा था। उन्होंने कहा था कि वांगचुक को उन्हें हिरासत में लिए जाने के कारणों से अवगत करा दिया गया है।
गीतांजलि ने अपनी याचिका में कहा है कि पिछले साल 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के लिए वांगचुक के कृत्यों या बयानों को किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।
उन्होंने दावा किया है कि वांगचुक ने खुद अपने सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से हिंसा की निंदा की थी और कहा था कि इससे लद्दाख की “तपस्या” और पांच वर्षों से जारी शांतिपूर्ण साधना विफल हो जाएगी।
भाषा पारुल