सांसदों ने विरोध-प्रदर्शन में शामिल 12 लोको पायलट के तबादले वापस लिए जाने की मांग की
सिम्मी दिलीप
- 12 Jan 2026, 08:29 PM
- Updated: 08:29 PM
नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) कम से कम तीन सांसदों ने रेलवे प्रशासन से आग्रह किया है कि वह दक्षिण रेलवे जोन में उन 12 लोको पायलटों के कथित दंडात्मक तबादले वापस ले, जिन्हें जून 2024 में अपनी मांगों के समर्थन में उनकी यूनियन द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए स्थानांतरित किया गया है।
दक्षिणी रेलवे के पलक्कड़, सलेम और तिरुवनंतपुरम मंडल के कर्मचारियों ने काफी समय से लंबित अपनी मांगों के समर्थन में एक जून 2024 से 28 जून 2024 के बीच विरोध प्रदर्शन किया था और इस तरह से स्वयं साप्ताहिक अवकाश लिया था, जिससे ट्रेन परिचालन बाधित नहीं हुआ।
इन मंडलों ने विरोध कर रहे कर्मचारियों को कथित तौर पर दंडात्मक कदम उठाते हुए दूरस्थ डिपो में स्थानांतरित कर दिया था।
हालांकि, मध्यस्थता के बाद तिरुवनंतपुरम और सलेम मंडलों के सभी स्थानांतरित कर्मचारियों एवं पलक्कड मंडल के नौ कर्मचारियों का तबादला वापस ले लिया गया। वर्तमान में 12 लोको पायलट अब भी दूरस्थ डिपो में काम कर रहे हैं।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सांसद जॉन ब्रिटास ने दक्षिण रेलवे के महाप्रबंधक को संबोधित आठ जनवरी के एक पत्र में कहा, ‘‘मुझे पता चला है कि पलक्कड मंडल में वर्तमान में पर्याप्त रिक्तियां उपलब्ध हैं, जिससे उनकी वापसी समायोजित की जा सकती है।’’
ब्रिटास ने कहा कि रिक्तियां उपलब्ध होने के बावजूद उनकी वापसी संबंधी अनुरोधों पर लगातार कार्रवाई नहीं होने से कर्मचारियों में यह धारणा बनी है कि यह देरी संभवत: प्रतिशोध लेने के लिए की जा रही है और इसका संबंध एआईएलआरएसए (ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन) आंदोलन में उनकी भागीदारी से जुड़ा हो सकता है।
उन्होंने महाप्रबंधक से आग्रह किया कि वह पलक्कड मंडल को निर्देश दें कि वह उक्त 12 कर्मचारियों के मामलों की समीक्षा करे और उन्हें यथाशीघ्र उनके पूर्व स्टेशनों पर वापस भेजे।
पलक्कड़ से लोकसभा सदस्य वी के श्रीकंदन ने 23 दिसंबर 2025 को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से लोको पायलट यूनियन की विभिन्न मांगों पर गौर करने का अनुरोध किया। इनमें ‘‘सभी स्थानांतरित कर्मचारियों की बिना देरी वापसी’’ की मांग भी शामिल है।
इससे पहले, 16 दिसंबर 2025 को एक अन्य राज्यसभा सदस्य वी शिवदासन ने वैष्णव से इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था।
भाषा सिम्मी