एसआईआर के दौरान एआई-आधारित डिजिटलीकरण की त्रुटियों से हो रही व्यापक कठिनाई : ममता बनर्जी
आशीष नेत्रपाल
- 12 Jan 2026, 05:51 PM
- Updated: 05:51 PM
(फाइल फोटो के साथ)
कोलकाता, 12 जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को फिर से पत्र लिखकर दावा किया कि 2002 की मतदाता सूचियों में एआई-आधारित डिजिटलीकरण त्रुटियों के कारण एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं को व्यापक कठिनाई हो रही है।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की शुरुआत के बाद से मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लिखे अपने पांचवें पत्र में, बनर्जी ने कहा कि एआई उपकरणों का इस्तेमाल करके 2002 की मतदाता सूची के डिजिटलीकरण के दौरान मतदाताओं के विवरण में गंभीर त्रुटियां हुईं। उन्होंने कहा कि इसके कारण डेटा में बड़े पैमाने पर विसंगति देखने को मिली और कई पात्र मतदाताओं को गलत तरीके से ‘‘तार्किक विसंगतियों’’ वाला बताकर चिह्नित कर दिया गया।
निर्वाचन आयोग पर पिछले दो दशकों से अपनाई जा रही अपनी ही वैधानिक प्रक्रियाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि “अर्ध-न्यायिक सुनवाइयों” के बाद पहले किए गए संशोधनों के बावजूद मतदाताओं को अपनी पहचान दोबारा साबित करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया, “पिछले दो दशकों से अधिक समय से जारी अपने ही दृष्टिकोण और व्यवस्थाओं से पल्ला झाड़ने वाला ऐसा रवैया मनमाना, अतार्किक और भारत के संविधान की भावना एवं प्रावधानों के प्रतिकूल है।”
बनर्जी ने इस पूरी प्रक्रिया को विसंगतियों से भरा बताते हुए यह भी आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान जमा किए गए दस्तावेज़ों की कोई उचित पावती नहीं दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि एसआईआर की सुनवाई प्रक्रिया “काफी हद तक यांत्रिक हो गई है, जो पूरी तरह तकनीकी आंकड़ों से संचालित है” और इसमें “विवेक, संवेदनशीलता तथा मानवीय दृष्टिकोण का पूरी तरह अभाव” है। बनर्जी ने कहा कि इससे “हमारे लोकतंत्र और संवैधानिक ढांचे की बुनियाद” कमजोर होती है।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा अव्यवस्थित तरीके से एसआईआर प्रक्रिया को लागू किए जाने की वजह से डर, काम के अत्यधिक दबाव के कारण 77 मौत हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्महत्या के प्रयास के चार मामले आए और 17 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
बनर्जी ने नोबेल पुरस्कार से सम्मानित प्रोफेसर अमर्त्य सेन, कवि जॉय गोस्वामी, अभिनेता और सांसद दीपक अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी और भारत सेवाश्रम संघ के महाराज समेत प्रख्यात नागरिकों को परेशान किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें “इस अनियोजित, संवेदनाशून्य और अमानवीय प्रक्रिया” का सामना करना पड़ा।
उन्होंने सवाल किया, “क्या यह निर्वाचन आयोग की ओर से घोर दुस्साहस नहीं है?”
मुख्यमंत्री ने कहा, “शादी के बाद अपने ससुराल पहुंची और उपनाम बदल चुकी महिला मतदाताओं से पूछताछ की जा रही है और उन्हें अपनी पहचान साबित करने को सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है।”
उन्होंने कहा, ‘‘यह न केवल सामाजिक संवेदनशीलता के घोर अभाव को दर्शाता है, बल्कि महिलाओं और पात्र मतदाताओं का घोर अपमान भी है। क्या एक संवैधानिक प्राधिकार मतदाताओं के आधे हिस्से के साथ ऐसा ही व्यवहार करता है?"
बनर्जी ने निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि वह नागरिकों और सरकारी तंत्र की परेशानी और पीड़ा को समाप्त करने तथा लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए इन मुद्दों का तुरंत समाधान करे।
भाषा आशीष