मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन से पहले शाह ने ‘आर्थिक अवरोध’ के आरोप खारिज किए
संतोष सिम्मी
- 11 Jan 2026, 10:57 PM
- Updated: 10:57 PM
(तस्वीरों के साथ)
तिरुवनंतपुरम, 11 जनवरी (भाषा) केरल में सोमवार को सियासी माहौल के तनावपूर्ण रहने के आसार हैं क्योंकि वामपंथी सरकार केंद्र सरकार के कथित ‘आर्थिक अवरोध‘ के खिलाफ प्रदर्शन शुरू करने की तैयारी कर रही है, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य को रिकॉर्ड वित्तीय सहायता दी है।
पालयम शहीद स्मारक पर अपने नेतृत्व में सत्याग्रह करने से पहले मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने रविवार को केंद्र सरकार पर केरल के विकास को ‘बाधित’ करने का आरोप लगाया लेकिन राजधानी में रविवार को मौजूद शाह ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि तथ्य इससे बिल्कुल अलग हैं।
मलयालम के प्रमुख दैनिक अखबार केरल कौमुदी द्वारा आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि केरल को केंद्रीय सहायता के बारे में सच्चाई जानने का अधिकार है।
उन्होंने पूर्व की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के शासनकाल में दी गई धनराशि की तुलना करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार कहीं अधिक उदार रही है।
शाह ने कहा, ‘‘ वर्ष 2004 से 2014 के बीच जब केंद्र में संप्रग सरकार थी, तो केरल को 72,000 करोड़ रुपये मिले। इसके विपरीत, राजग सरकार के तहत 2014 से 2024 के बीच राज्य को 3.23 लाख करोड़ रुपये दिए गए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह तब दिया गया जब यहां हमारी कोई सरकार नहीं है। इसके बावजूद, पिनराई विजयन अन्याय का दावा कर रहे हैं।”
कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन पर आरोप लगाते हुए शाह ने कहा, ‘‘केरल के साथ अन्याय संप्रग के शासनकाल में हुआ, जब केंद्र वामपंथियों के समर्थन से काम कर रहा था, न कि राजग सरकार के कार्यकाल में।’’
उन्होंने और आंकड़े देते हुए कहा कि केंद्र ने अवसंरचना विकास के लिए 22,000 करोड़ रुपये, सड़क परियोजनाओं के लिए 4,000 करोड़ रुपये, रेलवे के लिए 15,000 करोड़ रुपये और हवाई अड्डे के विकास के लिए 3,000 करोड़ रुपये दिए हैं।
शाह ने कहा कि एमएमआरयूटी योजना के तहत शहरी विकास के लिए 22,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं और कोच्चि और तिरुवनंतपुरम को स्मार्ट सिटी मिशन में शामिल किया गया है।
उन्होंने जन विकास कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा सीधे तौर पर 130 करोड़ रुपये खर्च करके 19 सामुदायिक अवसंरचना परियोजनाएं चलाई गईं।
शाह ने कहा, ‘‘यह एक झूठी कहानी गढ़ने की कोशिश है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केरल के साथ अन्याय कर रहे हैं।’’
इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री को सीधी चुनौती देते हुए कहा, ‘‘मैं विजयन को यह कहते हुए यहां से जाना चाहता हूं कि अगर इन आंकड़ों में कोई गलती है, तो कृपया मुझे कल सुधार दें। अन्यथा, यह स्वीकार करें कि केरल के साथ अन्याय हमारी तरफ से नहीं, बल्कि पूर्ववर्ती संप्रग सरकार की तरफ से हुआ है।’’
विजयन द्वारा लगाए गए आरोपों की आलोचना करते हुए शाह ने कहा, ‘‘आरोप लगाने के बाद आप भाग नहीं सकते। मैं आपके सवालों के ठोस जवाब लेकर आया हूं।’’
उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री जवाब देते हैं, तो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर जवाब देंगे।
शाह ने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि चंद्रशेखर को जवाब देने का मौका नहीं मिलेगा।’’ उन्होंने कहा कि विजयन उनके दावों का खंडन नहीं करेंगे।
फेसबुक पोस्ट में मुख्यमंत्री विजयन ने कहा, ‘‘केंद्र द्वारा विकास की इस गति को बाधित करके राज्य और राज्य सरकार, दोनों का ‘गला घोंटने’ के लिए लगाए गए वित्तीय अवरोध ने पहले ही व्यापक जन आक्रोश को जन्म दिया है।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि दबाव के बावजूद केरल हार मानने को तैयार नहीं है।
विजयन ने कहा, ‘‘इस गंभीर वित्तीय संकट के बावजूद, केरल दृढ़ता के साथ विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है।’’ विजयन ने केंद्र की कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।
उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा केरल को उसकी उपलब्धियों के बल पर आगे बढ़ने से रोकने के उद्देश्य से लगाया गया वित्तीय अवरोध राजनीतिक रूप से प्रेरित है और यह एलडीएफ सरकार द्वारा अर्जित जनसमर्थन को कमजोर करने के लिए किया गया है।
उन्होंने ‘‘वित्तीय भेदभाव के स्पष्ट उदाहरण’’ गिनाए। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘चालू वित्त वर्ष के अंतिम तीन महीनों के लिए स्वीकृत 12,000 करोड़ रुपये के ऋण में से 5,900 करोड़ रुपये एक ही झटके में काट दिए गए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बजट से बाहर के उधारों का हवाला देते हुए, केंद्र ने इस वर्ष ही राज्य के लिए अनुमन्य उधार सीमा में 17,000 करोड़ रुपये की कटौती की है।”
विजयन ने यह भी कहा कि केंद्र ने केरल को राष्ट्रीय राजमार्ग विकास के लिए भूमि अधिग्रहण पर पहले से खर्च किए गए 6,000 करोड़ रुपये की भरपाई के लिए ऋण लेने की अनुमति नहीं दी है।
भाषा संतोष