हमें अपने इतिहास का प्रतिशोध लेना है और हर क्षेत्र में भारत को मजबूत बनाना है : डोभाल
दिलीप
- 10 Jan 2026, 05:07 PM
- Updated: 05:07 PM
(डेटलाइन में सुधार के साथ)
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 10 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने शनिवार को कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा सिर्फ सीमाओं पर मजबूत नहीं करनी है, बल्कि आर्थिक और तकनीकी तौर पर भी देश को इतना मजबूत बनाना है कि हमलों और पराधीनता के अपने इतिहास का प्रतिशोध ले सकें ।
‘विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद’ के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर अपने संबोधन में डोभाल ने स्वतंत्रता के लिये किये गए संघर्षों, भारत की सभ्यता पर हुए हमलों और मजबूत नेतृत्व के महत्व का जिक्र किया ।
उन्होंने तीन दिवसीय इस आयोजन में भाग ले रहे देश भर के तीन हजार युवाओं से कहा, ‘‘ मैं गुलाम भारत में पैदा हुआ था। आप भाग्यशाली हैं कि स्वतंत्र भारत में पैदा हुए। सदियों तक हमारे पूर्वजों ने इसके लिये बहुत कुर्बानियां और अपमान सहे हैं। भगत सिंह को फांसी हुई, सुभाष चंद्र बोस को जीवन भर संघर्ष करना पड़ा, महात्मा गांधी को सत्याग्रह करना पड़ा और अनगिनत लोगों को जानें देनी पड़ीं।’’
भारत के खुफिया ब्यूरो के पूर्व प्रमुख 81 वर्षीय डोभाल ने कहा, ‘‘हमारे गांव जले, हमारी सभ्यता को समाप्त किया गया, हमारे मंदिरों को लूटा गया और हम एक मूक दर्शक की तरह असहाय होकर देखते रहे। यह इतिहास हमें एक चुनौती देता है कि भारत के हर युवक के अंदर आग होनी चाहिये।’’
उन्होंने कहा ,‘‘ प्रतिशोध शब्द अच्छा तो नहीं है, लेकिन यह अपने आप में बड़ी शक्ति होती है। हमें अपने इतिहास का प्रतिशोध लेना है और हमें इस देश को फिर वहां पहुंचाना है, जहां हम अपने हक, अपने विचार और अपनी आस्थाओं के आधार पर एक महान भारत का निर्माण कर सकें। हमें अपने आपको हर रूप में आर्थिक, रक्षात्मक, तकनीकी तौर मजबूत बनाना है ।’’
डोभाल ने कहा, ‘‘हमारी एक बड़ी विकसित सभ्यता थी। हमने किसी के मंदिर नहीं तोड़े और कहीं जाकर लूटा नहीं। हमने दूसरे देशों पर आक्रमण नहीं किया, परंतु हम अपनी सुरक्षा और उस पर खतरों के प्रति उदासीन रहे, तो हमें इतिहास ने एक सबक सिखाया। क्या हमने वह सबक सीखा और क्या उसे याद रखेंगे। अगर आने वाली पीढियां उस सबक को भूल जायेंगी, तो यह इस देश की सबसे बड़ी त्रासदी होगी।’’
कार्यक्रम में भाग ले रहे युवाओं को ‘भविष्य का नेता’ बताते हुए उनसे इच्छाशक्ति और सही निर्णय लेने की क्षमता के विकास का आह्वान करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उदाहरण दिया ।
उन्होंने कहा,‘‘ आज हम बहुत भाग्यशाली हैं कि देश में एक ऐसा नेतृत्व है, जिसने दस साल में देश को कहां से कहां पहुंचा दिया है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता, मेहनत, अनुशासन और समर्पण सभी के लिये आदर्श है। मोदीजी के पास इतने नये विचार रहते हैं, जो इच्छाशक्ति और समर्पण से आता है। आप भाग्यवान हैं कि उस भारत को देखेंगे, जिसकी हम कल्पना कर सकते हैं।’’
डोभाल ने कहा ,‘‘ नेपोलियन बोनापार्ट बहुत बड़ा योद्धा था, जो कहता था कि मुझे हजार शेरों की फौज से डर नहीं लगता, अगर उसका नेतृत्व एक भेड़ का बच्चा कर रहा है, लेकिन अगर भेड़ों की फौज का नेतृत्व करने वाला एक शेर होगा, तो मुझे उससे बहुत डर लगता है । नेतृत्व क्षमता इतनी महत्वपूर्ण है।’’
उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लड़ाइयां सुरक्षा चिंताओं के कारण ही लड़ी जाती है ।
उन्होंने कहा, ‘‘ लड़ाइयां क्यों होती हैं। लोग मनोरोगी तो नहीं हैं कि लाशें देखने में मजा आता है। लड़ाइयां इसलिये लड़ी जाती हैं, ताकि दुश्मन के मनोबल को कमजोर किया जा सके और उसे अपनी शर्तों पर संधि के लिये मजबूर किया जा सके । दुनिया में इस समय कोई भी लड़ाई इसलिये हो रही है, ताकि सुरक्षा के लिये दूसरे देश को अपनी शर्तें मानने पर मजबूर किया जा सके।’’
डोभाल ने कहा, ‘‘ हमें भी अपनी रक्षा करनी है। यह काफी शक्तिशाली भाव है और इससे प्रेरणा लेनी चाहिये।’’
उन्होंने इच्छाशक्ति के लिये माउंट एवरेस्ट पर चढने वाली दिव्यांग पर्वतारोही अरूणिमा सिन्हा का उदाहरण किया ।
उन्होंने अपने 81 साल के अनुभव के आधार पर युवाओं को सही निर्णय लेने और एक बार निर्णय लेने के बाद उस पर अडिग रहने के लिये इच्छाशक्ति पैदा करने की सलाह दी ।
डोभाल ने कहा,‘‘ कई बार सही निर्णय लेने के बाद भी आदमी उस पर चल नहीं पाता । युवाओं को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में छोटे बड़े निर्णय लेने होते हैं। आप जब निर्णय लें, तो आज के लिये नहीं, बल्कि भविष्य के लिये दूरदर्शी भाव से निर्णय लें और निर्णय लें तो उस पर अडिग रहें।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह याद रखिये कि सपने जीवन नहीं बनाते हैं, बल्कि उसे दिशा देते हैं और सपने एक दिन में पूरे नहीं होते ।’’
भाषा
मोना