दिल्ली : अदालत के कर्मचारी ने 'काम के दबाव' के चलले इमारत से कूदकर आत्महत्या की
रवि कांत रवि कांत अविनाश
- 09 Jan 2026, 11:28 PM
- Updated: 11:28 PM
नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) दिल्ली में साकेत अदालत परिसर के अंदर शुक्रवार सुबह एक दिव्यांग कर्मचारी ने कथित तौर पर एक इमारत से कूदकर त्महत्या कर ली। पुलिस ने यह जानकारी दी।
साकेत अदालत में लगभग तीन महीने तक अहलमद (प्रशासनिक क्लर्क) के रूप में काम करने वाले 43 वर्षीय हरीश सिंह महार ने अपने ‘‘सुसाइड नोट’’ में आत्महत्या करने का कारण बताया है।
अदालत के अधिवक्ताओं और कर्मचारियों ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि मृतक ने अपने ‘‘सुसाइड नोट’’ में ‘‘काम के अत्यधिक दबाव और ओवरटाइम काम करने’’ को कारण बताया।
महार ने लिखा कि 60 प्रतिशत दिव्यांग होने के कारण यह नौकरी उनके लिए बहुत कठिन थी।
पुलिस ने बताया कि अदालत के एक कर्मचारी के इमारत से कूदने की घटना के संबंध में सुबह 10:24 बजे पीसीआर कॉल प्राप्त हुई।
फरीदाबाद निवासी महार ने अपने ‘‘सुसाइड नोट’’ में कहा,‘‘आज मैं कार्यालय के काम के दबाव के कारण आत्महत्या कर रहा हूं। मैं अपनी मर्ज़ी से आत्महत्या कर रहा हूं। इसके लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। जब से मैं अहलमद बना हूं, मेरे मन में आत्महत्या के विचार आ रहे हैं।’’
महार ने कहा, ‘‘मुझे विश्वास था कि मैं इन चुनौतियों पर काबू पा लूंगा, लेकिन मैं असफल रहा। मैं 60 प्रतिशत दिव्यांग हूं, और यह काम मेरे लिए बहुत कठिन है, और मैं दबाव के आगे हार मान गया। ’’
साकेत अदालत एसोसिएशन के सचिव अनिल बसोया ने कहा, ‘‘वह शारीरिक रूप से दिव्यांग थे और शुक्रवार को उन्होंने आत्महत्या कर ली, उन्होंने एक सुसाइड नोट छोड़ा जिसमें उन्होंने यह कदम उठाने का कारण काम के दबाव को बताया था।’’
इस घटना के विरोध में अदालत के कर्मचारियों ने एक मार्च निकाला।
शाम करीब पांच बजे अदालत के 100 से अधिक कर्मचारियों ने दिल्ली उच्च न्यायालय की ओर विरोध मार्च शुरू किया।
इसी बीच, दिल्ली के जिला एवं सत्र न्यायालय कर्मचारी कल्याण संघ ने अपने सदस्यों को एक पत्र जारी कर कहा कि साकेत न्यायालय परिसर में उनके एक प्रिय सहकर्मी द्वारा आत्महत्या किए जाने के बाद अदालत परिसर में एक 'शांतिपूर्ण धरना' आयोजित किया गया।
पत्र में लिखा है कि 10 जनवरी को सभी जिलों में होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में उसके सदस्य अनुपस्थित रहेंगे।
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