असम: विपक्षी दलों का दावा, भाजपा ने मतदाता सूची से नाम हटाने की ‘साजिश’ रची
शुभम सुभाष
- 09 Jan 2026, 09:35 PM
- Updated: 09:35 PM
गुवाहाटी, नौ जनवरी (भाषा) असम में विपक्षी दलों ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ पुलिस और मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) से संपर्क किया और आरोप लगाया कि पार्टी ने विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची से नाम हटाने की साजिश रची थी। हालांकि, मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।
शर्मा ने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक नियमित प्रक्रिया है ताकि अपात्र नामों को सूची से हटा दिया जाए और पात्र मतदाताओं को उचित प्रक्रिया के माध्यम से शामिल किया जाए।
उन्होंने कांग्रेस के 'वोट चोरी' के आरोप पर कहा कि चुनाव होने अभी बाकी हैं।
विधानसभा चुनावों से पहले किए गए मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआर) के बाद 30 दिसंबर को प्रकाशित मतदाता सूची के मसौदे के अनुसार, असम में मतदाताओं की संख्या में 1.35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कुल मिलाकर 7,86,841 नाम जोड़े गए हैं और 4,47,196 नाम हटाए गए हैं।
कांग्रेस, माकपा, रायजोर दल, असम जातीय परिषद और भाकपा (माले) लिबरेशन ने यहां दिसपुर थाने में दर्ज कराई गई एक संयुक्त शिकायत में दावा किया कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने मंत्री अशोक सिंघल को 60 विधानसभा क्षेत्रों (एलएसी) में नाम हटाने की प्रक्रिया को अंजाम देने का विशेष जिम्मा सौंपा है।
उन्होंने सीईओ को एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें मतदाता सूची के जारी पुनरीक्षण में अनियमितताओं और विसंगतियों का दावा किया गया है।
असम में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण हो रहा है। राज्य में अंतिम मतदाता सूची 10 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। राज्य में विधानसभा चुनाव इस साल मार्च-अप्रैल में होने की संभावना है।
शर्मा ने कहा, "निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची का पुनरीक्षण किए जाने पर सभी राजनीतिक दलों को बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) नियुक्त करने का अधिकार है। भाजपा ने अपने बीएलए नियुक्त कर दिए हैं और हमने उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि अपात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए जाएं, पात्र मतदाताओं के नाम शामिल किए जाएं और यदि किसी सुधार की आवश्यकता हो तो वह किया जाए।"
मुख्यमंत्री से यहां एक कार्यक्रम के दौरान जब पत्रकारों ने विपक्ष द्वारा सत्तारूढ़ पार्टी के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, "यह एक प्रक्रिया है... भले ही किसी का नाम हटाना हो उस व्यक्ति को उचित सूचना दी जाती है और उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है।"
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण उसे शुद्ध करने के उद्देश्य से किया जा रहा है और यदि कोई नाम हटाया या जोड़ा नहीं जा सकता था तो इस प्रक्रिया की कोई आवश्यकता नहीं होती।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी राजनीतिक दल अपने बीएलए नियुक्त कर सकते हैं और निर्वाचन आयोग के समक्ष मतदाता सूची के संबंध में शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।
कांग्रेस के 'वोट चोरी' के आरोप पर शर्मा ने कहा, "जब चुनाव हुए ही नहीं हैं तो वोट चोरी कैसे हो सकती है? जब निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया चल रही है और कोई (अंतिम) सूची प्रकाशित नहीं हुई है, तो वोट चोरी का सवाल ही कहां उठता है?"
विपक्षी दलों द्वारा पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "बहुत अच्छा। उन्हें मामला दर्ज कराना चाहिए।"
विपक्षी दलों ने शिकायत में कहा कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने भाजपा विधायकों को 60 विधानसभा क्षेत्रों से नाम हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया और चार जनवरी को आयोजित एक 'जूम' बैठक में मंत्री अशोक सिंघल को भी यह जिम्मेदारी सौंपी।
इसमें कहा गया है, "यह विपक्षी दलों के समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाने की एक नापाक साजिश है" और पुलिस से सैकिया से जुड़े वीडियो कॉन्फ्रेंस के फुटेज को सुरक्षित करने का आग्रह किया गया है, क्योंकि इसमें "महत्वपूर्ण सबूत" मौजूद हैं।
विपक्षी दलों ने दावा किया कि यह "मतदाता सूची से बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने की एक बड़ी साजिश" थी।
शिकायत में कहा गया, "इसलिए, आपसे अनुरोध है कि मामला दर्ज करें और लोकतंत्र को बचाने के वास्ते षड्यंत्रकारियों को पकड़ने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।"
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपे गए एक अलग ज्ञापन में विपक्षी दलों ने इसी तरह के आरोप लगाए और उनसे आग्रह किया कि वह मुख्यमंत्री, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और अन्य अनधिकृत व्यक्तियों को मतदाता सूची के संशोधन में हस्तक्षेप करने से रोकें।
भाषा
शुभम