राजनीतिक दल धन, बल और भय का इस्तेमाल कर नेताओं की खरीद-फरोख्त कर रहे : अजित पवार
गोला मनीषा
- 09 Jan 2026, 01:26 PM
- Updated: 01:26 PM
(संदीप कोल्हटकर और प्रमोद शर्मा)
पुणे, नौ जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने शुक्रवार को राजनीति में वैचारिक प्रतिबद्धता में लगातार गिरावट पर चिंता व्यक्त की और आरोप लगाया कि अधिकतर राजनीतिक दलों ने अपने मूल सिद्धांतों को त्याग दिया है और वे अपने समर्थकों की संख्या बढ़ाने के लिए विभिन्न हथकंडे अपना रहे हैं।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख पवार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि दल बदलना बहुत आम हो गया है, जिसमें नेताओं को प्रलोभन देकर या दबाव डालकर पार्टी बदलने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
साथ ही उन्होंने पुणे और पिंपरी-चिंचवड में स्थानीय भाजपा नेतृत्व पर अपने जुबानी हमले जारी रखे।
पवार ने कहा, ‘‘हाल ही में राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी विचारधाराओं को लगभग त्याग दिया है। नेता जहां चाहें वहां जा रहे हैं और जो चाहें कर रहे हैं।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं को प्रलोभन देकर अपने पाले में लाया जा रहा है, जबकि अन्य पर उनके खिलाफ लंबित जांचों का डर दिखाकर और यह आश्वासन देकर दबाव डाला जा रहा है कि उनके दल बदलने के बाद जांच एजेंसियों से निपट लिया जाएगा।
उन्होंने दावा किया कि राजनीति में खुलेआम धन और बाहुबल का इस्तेमाल किया जा रहा है।
पवार ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बार-बार दल-बदलने के मुद्दे पर पूछे गए एक सवाल पर कहा, ‘‘जिनके पास पैसा और बाहुबल है, वे इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। जो लोग जातिगत मुद्दों को उठाकर वोट हासिल करने की सोच रहे हैं, वे यही रणनीति अपना रहे हैं।’’
उन्होंने यह भी कहा कि किसी उम्मीदवार का मूल्यांकन उसकी चुनावी योग्यता के आधार पर किया जा रहा है, न कि एक नेता के रूप में उसके कार्यों के आधार पर। उन्होंने कहा कि एक नया चलन सामने आया है जहां उम्मीदवारों की लोकप्रियता का आकलन करने के लिए सर्वेक्षणों का उपयोग किया जा रहा है।
राज्य में आगामी निकाय चुनावों के मद्देनजर उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘सर्वेक्षणों का उपयोग यह पता लगाने के लिए किया जा रहा है कि किसी विशेष क्षेत्र में सबसे लोकप्रिय उम्मीदवार कौन है। यदि वह व्यक्ति विपक्षी पार्टी से संबंधित है, तो उसे अपने पाले में लाने के प्रयास किए जाते हैं।’’
महाराष्ट्र के पहले मुख्यमंत्री यशवंतराव चव्हाण की राजनीति की सराहना करते हुए पवार ने कहा, ‘‘वह विपक्षी दलों के नेताओं को भी समान सम्मान देते थे। वह बिना यह सोचे-समझे कि संबंधित व्यक्ति विपक्ष से है या नहीं, धन वितरित किया करते थे। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में इसमें किसी न किसी तरह की बदले की राजनीति घर कर गई है। ऐसा नहीं होना चाहिए।’’
पुणे और पिंपरी-चिंचवड में भाजपा के स्थानीय नेतृत्व की आलोचना करते हुए पवार ने आरोप लगाया कि पिछले आठ से नौ वर्षों में भारी खर्च के बावजूद उनकी ‘‘दूरदर्शिता की कमी’’ ने दोनों नगर निकायों को ‘‘संकट’’ में धकेल दिया है।
राज्य में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में साझेदार होने के बावजूद भाजपा और राकांपा दोनों शहरों में महानगरपालिका के चुनाव अलग-अलग लड़ रही हैं। भाजपा पवार से चुनाव प्रचार के दौरान सहयोगियों को निशाना बनाने से बचने का आग्रह कर रही है।
पवार ने दावा किया कि राकांपा के सत्ता में रहने के दौरान 1992 से 2017 के बीच पिंपरी चिंचवड महानगरपालिका (पीसीएमसी) में योजनाबद्ध विकास हुआ, लेकिन 2017 से 2022 तक भाजपा के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और वित्तीय कुप्रबंधन की समस्या बनी रही।
उन्होंने दावा किया, ‘‘1992 से 2017 तक पिंपरी-चिंचवड का विकास सूक्ष्म योजना के साथ किया गया। सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन और सक्षम नेतृत्व के कारण यह निगम एशिया का सबसे समृद्ध नगर निकाय बन गया। हमारे कार्यकाल में ऋण लेने या बॉण्ड जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ी।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के दौरान बॉण्ड जारी किए गए थे और उन्होंने स्मार्ट सिटी परियोजना तथा स्वच्छता अभियान और अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित कार्यों में अनियमितताओं का दावा किया।
राकांपा प्रमुख ने कहा, ‘‘पिछले आठ-नौ वर्षों में लगभग 60,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए। प्रशासनिक खर्च, जो लगभग 30-35 प्रतिशत है, लगभग 20,000 करोड़ रुपये बनता है। 40,000 करोड़ रुपये के विकास कार्य होने थे, लेकिन वे कार्य जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देते।’’
पवार ने पुणे महानगरपालिका (पीएमसी) में भाजपा के पूर्व कार्यकाल को निशाना बनाते हुए सीसीटीवी कैमरे लगाने जैसी परियोजनाओं में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘लगभग 70 प्रतिशत सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे हैं। जो काम होना चाहिए था, वह नहीं हुआ है।’’
केंद्र और महाराष्ट्र में भाजपा के साथ सत्ता साझा करने के बावजूद उन पर हमला करने को लेकर हुई आलोचना का जवाब देते हुए पवार ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव नागरिक मुद्दों पर लड़े जाते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय और राज्य चुनाव अलग-अलग होते हैं। मतदाता जानते हैं कि देश और राज्य की बागडोर किसे सौंपनी है। नगर निगम चुनाव स्थानीय समस्याओं से संबंधित होते हैं, और हम पुणे और पीसीएमसी में नागरिकों के सामने आ रहे मुद्दों को उठा रहे हैं।’’
पुणे और पिंपरी-चिंचवड में राकांपा-राकांपा (शरदचंद्र पवार) गठबंधन पर अजित पवार ने कहा कि यह पूर्व नियोजित नहीं था। उन्होंने कहा, ‘‘स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं को लगा कि साथ मिलकर चुनाव लड़ना फायदेमंद होगा। इस तरह गठबंधन बना।’’
राकांपा के दोनों गुटों के विलय की अटकलों को खारिज करते हुए पवार ने कहा कि ऐसी चर्चाएं केवल मीडिया में ही हो रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अभी हमारा पूरा ध्यान अधिकतम सीटें जीतने पर है।’’
पुणे और पिंपरी-चिंचवड समेत राज्य भर की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव 15 जनवरी को होने हैं। मतों की गिनती अगले दिन होगी।
भाषा
गोला