अविश्वसनीय, बुरी मिसाल कायम करेगा: वेनेजुएला पर अमेरिकी हमलों को लेकर रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ
पारुल सुरेश
- 03 Jan 2026, 11:33 PM
- Updated: 11:33 PM
नयी दिल्ली, तीन जनवरी (भाषा) रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों ने शनिवार को वेनेजुएला पर बड़े पैमाने पर अमेरिकी हमलों और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़े जाने के घटनाक्रम को “अविश्वसनीय” करार दिया और कहा कि इससे एक “बुरी मिसाल” कायम होगी, क्योंकि अन्य शक्तियां अमेरिकी कदम का हवाला देते हुए भविष्य में इसी तरह की कार्रवाई करने की कोशिश कर सकती हैं।
विशेषज्ञों ने इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की ओर से उठाया गया “बेहद खतरनाक” और “आक्रामक कदम” भी बताया।
ट्रंप ने शनिवार तड़के सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर जारी एक पोस्ट में कहा, “अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ बड़े पैमाने पर हमले किए हैं और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़कर देश से बाहर ले जाया गया है।”
पूर्व राजनयिक और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ राजीव डोगरा ने ‘पीटीआई वीडियो’ के साथ बातचीत में कहा, “सच कहूं तो यह अविश्वसनीय है। मेरा मतलब है कि यह अभी तक हजम नहीं हो पाया है, क्योंकि एक तरह से हाल के समय में यह अभूतपूर्व है।”
उन्होंने कहा कि ऐसा पिछली शताब्दियों में हुआ होगा, जब कोई “देशों पर आक्रमण करता था”, उनके नेताओं को पकड़ लेता था या उनकी हत्या कर देता था, लेकिन हाल के समय में “हमने किसी भी देश के बारे में यह नहीं सुना है कि वह कानून, परंपरा या तर्क की इतनी कम परवाह करता है”।
डोगरा ने आरोप लगाया, “ट्रंप ने इस तरह के कृत्यों में लिप्त होकर सभी परंपराओं को तोड़ दिया है, संप्रभुता की पवित्र सीमाओं को लांघ दिया है।”
उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के लोग राष्ट्रपति मादुरो को पसंद करते हैं या नहीं, यह “एक अलग बात” है, जिसका फैसला “वेनेजुएला के लोगों को ही करना चाहिए”, लेकिन ट्रंप का अपने बलों को मादुरो को पकड़कर वेनेजुएला से बाहर ले जाने का आदेश देना बिल्कुल भी तर्कसंगत नहीं है।
वेनेजुएला में भारत के पूर्व राजदूत दीपक भोजवानी ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति मादुरो “अमेरिकी प्रशासन के निशाने पर रहे हैं” और अमेरिका को उन्हें “अपदस्थ करने” में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
भोजवानी ने कहा कि ऐसा इसलिए है, क्योंकि मादुरो देश की सेना को नियंत्रित करते थे और उन्होंने “एक तरह से तानाशाही हुकूमत कायम कर रखी थी।” उन्होंने कहा कि मादुरो के खिलाफ “बहुत ही विश्वसनीय आरोप हैं कि उन्होंने लोकतांत्रिक प्रथाओं का पालन नहीं किया।”
भोजवानी ने ट्रंप प्रशासन की ओर से मादुरो पर लगाए गए “नार्को-आतंकवाद” के आरोपों का भी जिक्र किया।
डोगरा ने अमेरिकी कार्रवाई के बारे में बात करते हुए कहा, “मुझे नहीं लगता कि इस हमले को अमेरिकी सीनेट या अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की मंजूरी हासिल हुई होगी और न ही इसे अमेरिकी कानून के तहत वैध ठहराया जा सकता है। यह कार्रवाई एक बहुत ही गलत मिसाल कायम करेगी, क्योंकि इसी तरह की अशांत प्रवृत्ति वाले कुछ अन्य देश भी इसका अनुसरण कर सकते हैं।”
डोगरा ने कहा कि कोई भी देश या ताकत कल आसानी से कह सकती है कि अगर अमेरिका वेनेजुएला में ऐसा कर सकता है, तो वह किसी अन्य देश या किसी अन्य स्थान पर ऐसा क्यों नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा, “इसलिए ट्रंप ने एक गलत मिसाल कायम की है।”
डोगरा ने कहा कि वह इस बात से दुखी हैं कि ऐसी घटना ऐसे युग और समय में घटी है, जब दुनिया अधिक आर्थिक और तकनीकी प्रगति की ओर अग्रसर है।
उन्होंने कहा, “लेकिन पिछले साल जनवरी में दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद से ट्रंप ने दुनिया को उलट-पुलटकर रख दिया है।”
रणनीतिक मामलों के एक अन्य विशेषज्ञ ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) राहुल के भोंसले ने देहरादून में ‘पीटीआई वीडियो’ से बातचीत में कहा, “ट्रंप प्रशासन ने एक बहुत ही खतरनाक और आक्रामक कदम उठाया है। हमें देखना होगा कि इसका क्या परिणाम होता है।”
भोंसले ने कहा, “अमेरिकी प्रशासन और मादुरो प्रशासन के बीच तनाव काफी समय से पनप रहा था। यह (पूर्व राष्ट्रपति) बाइडन के शासनकाल में भी मौजूद था, लेकिन ट्रंप प्रशासन खास तौर पर आक्रामक रहा है।”
उन्होंने कहा कि यह ट्रंप प्रशासन का एक “बेहद खतरनाक” कदम है और मादुरो सरकार एक ऐसी सरकार नहीं है, जो अमेरिका की सक्रिय सैन्य विरोधी है।
भोंसले ने कहा कि इस कार्रवाई के लिए मूल रूप से “नशीले पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद से जुड़ी चुनौतियां” जिम्मेदार हैं, जिनके बारे में अमेरिका का कहना है कि मादुरो सरकार इनमें लिप्त है।
उन्होंने आगाह किया, “लेकिन ऐसे शासन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करना बेहद खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है। कल कई अन्य शक्तियां भी इसका हवाला देकर इसी तरह की कार्रवाई करने की कोशिश कर सकती हैं।”
भाषा पारुल