केरल: मादक पदार्थ मामले में सबूतों से छेड़छाड़ के दोषी पूर्व मंत्री एंटनी राजू को तीन साल की सजा
धीरज रंजन
- 03 Jan 2026, 07:50 PM
- Updated: 07:50 PM
तिरुवनंतपुरम, तीन जनवरी (भाषा) केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम की एक अदालत ने शनिवार को राज्य के पूर्व परिवहन मंत्री एंटनी राजू और एक अदालत के अधिकारी को 1990 के मादक पदार्थ जब्ती मामले में सबूतों से छेड़छाड़ करने का दोषी करार देते हुए कारावास की सजा सुनाई।
जनधिपत्य केरल कांग्रेस के मौजूदा विधायक और सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के सहयोगी राजू को नेदुमंगड न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट रूबी इस्माइल ने 1990 में तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक से जब्त किए गए 61.5 ग्राम हशीश से संबंधित सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप में दोषी करार दिया।
अदालत ने इसी मामले में तिरुवनंतपुरम की एक अदालत के पूर्व लिपिक के एस जोस को भी दोषी ठहराया।
अदालत ने दोनों को भारतीय दंड संहिता धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 201 (सबूतों को गायब करना), 193 (झूठे साक्ष्य देना), 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात), 465 (जाली दस्तावेज बनाना) और 34 (सामान्य इरादे को आगे बढ़ाने के लिए कई व्यक्तियों द्वारा किए गए कार्य) जैसी धाराओं के तहत दोषी पाया।
अदालत ने राजू को धारा 120बी के तहत छह महीने, धारा 201 के तहत तीन साल, धारा 193 के तहत तीन साल और धारा 465 के तहत दो साल कारावास की सजा सुनाई।
मजिस्ट्रेट अदालत ने अन्य सजाओं के अतिरिक्त, जोस को धारा 409 के तहत एक वर्ष कारावास की सजा सुनाई।
इससे पहले, अभियोजन पक्ष ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 325 के तहत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को सजा सुनाने की कार्यवाही स्थानांतरित करने का अनुरोध करते हुए दलील दी कि मजिस्ट्रेट के पास तीन साल से अधिक की सजा देने की सीमित शक्तियां हैं।
हालांकि, अदालत ने याचिका खारिज कर दी और सजा सुनाने की कार्यवाही पूरी की।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि राजू को हिरासत में नहीं लिया जाएगा क्योंकि उन्हें तीन साल से कम की सजा सुनाई गई है। उन्हें जमानत दी गई ताकि वह उच्च न्यायालय में अपील दायर कर सके।
मादक पदार्थ जब्ती मामले की शुरुआती जांच करने वाले अधिकारी जयमोहन ने फैसले का स्वागत किया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मेरे लिए सजा की मात्रा से ज्यादा दोष सिद्ध होना मायने रखता है। दोषियों को सजा मिल चुकी है।’’
सजा सुनाए जाने से पहले, राजू ने इस मामले को ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया और दोहराया कि वह निर्दोष हैं।
उन्होंने दलील दी कि 2002 में एके एंटनी नीत सरकार के दौरान की गई सतर्कता और पुलिस जांच में उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला था।
राजू घटना के समय कनिष्ठ वकील थे और आरोपी आंद्रे साल्वाटोर सेर्वेली की ओर से पेश हुए थे। हालांकि सत्र न्यायालय ने शुरू में सेर्वेली को दोषी ठहराया था और उसे 10 साल की कैद की सजा सुनाई थी, लेकिन केरल उच्च न्यायालय ने 1994 में उसे बरी कर दिया था।
बाद में सेर्वेली ऑस्ट्रेलिया लौट गया। इसके बाद, जांच अधिकारी जयमोहन ने राज्य पुलिस प्रमुख को सूचना दी कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई थी।
सबूतों से छेड़छाड़ के मामले में 2005 में प्राथमिकी दर्ज की गई और आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया। हालांकि, केरल उच्च न्यायालय ने 2023 में इस मामले को रद्द कर दिया था, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने 2024 में उच्च न्यायालय के आदेश को निरस्त कर दिया और निचली अदालत को एक वर्ष के भीतर कार्यवाही पूरी करने का आदेश दिया।
इसी बीच, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अदालत परिसर के पास प्रदर्शन किया और विधायक पद से राजू के इस्तीफे की मांग की।
भाषा धीरज