जम्मू-कश्मीर : सीजन की पहली बर्फबारी के बाद खिली धूप, गुलदंडा में उमड़ी पर्यटकों की भीड़
जोहेब रंजन
- 03 Jan 2026, 07:18 PM
- Updated: 07:18 PM
भद्रवाह/जम्मू, तीन जनवरी (भाषा) मौसम की पहली बर्फबारी और उसके बाद खिलती धूप ने जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के गुलदंडा को एक मनमोहक शीतकालीन पर्यटन स्थल में बदल दिया है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता से बड़ी संख्या में पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को आकर्षित कर रहा है।
नववर्ष के दिन हुई बर्फबारी ने पिछले साल अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकी हमले से बुरी तरह प्रभावित पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों को काफी राहत दी है। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे।
स्थानीय निवासियों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि ढाई महीने के बाद मौसम की पहली बर्फबारी होने पर गुलदंडा में 200 से अधिक पर्यटक वाहन पहुंचे। गुलदंडा जम्मू प्रांत में भद्रवाह-पठानकोट राजमार्ग पर समुद्र तल से 9,555 फुट की ऊंचाई पर स्थित है।
पर्यटकों की अचानक आई भीड़ से पर्यटन कारोबारियों और होटल मालिकों के चेहरों पर खुशी देखी जा सकती है। सभी होटल और होमस्टे पूरी तरह से भरे हुए हैं, जो शीतकालीन पर्यटन के लिए अच्छा संकेत माना जा रहा है।
नल्थी-भद्रवाह के होटल मालिक मनीष कोटवाल ने कहा, "पहलगाम हमले और भारत-पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर के बाद के युद्ध जैसी स्थिति में पर्यटन उद्योग सचमुच नुकसान का सामना कर रहा था, लेकिन 2026 के पहले दिन हुई बर्फबारी ने उद्योग को एक नयी उम्मीद दी है। पिछले दो दिन से होटल और गेस्टहाउस पूरे देश से आए पर्यटकों से भरे हुए हैं।"
उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सकारात्मक रुझान आने वाले महीनों में भी जारी रहेगा।
केवल होटल मालिक ही नहीं, बल्कि गुलदंडा में अस्थायी दुकानें लगाने वाले छोटे विक्रेता भी पर्यटकों की बढ़ी हुई संख्या से खुश हैं।
स्थानीय विक्रेता यासिर वानी ने कहा, "पर्यटक बहुत खुश हैं, और हम भी। पर्यटकों के आने से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलता है। हमें उम्मीद है कि यह दौर लंबे समय तक जारी रहेगा।”
उत्तर प्रदेश और राजस्थान से आए पर्यटक गुलदंडा और छत्तरगल्ला की बर्फ से ढकी ढलानों का आनंद ले रहे हैं।
कानपुर के 21 वर्षीय आदित्य वाजपेयी ने कहा, "हम नियमित रूप से वैष्णो देवी मंदिर जाते हैं, लेकिन भद्रवाह की पहली यात्रा है। यह अनुभव अविश्वसनीय है। इस घाटी की सुंदरता शब्दों से परे है, और यहां का माहौल इतना अद्भुत है कि हमें लगता है कि हम यहां हमेशा के लिए रुक सकते हैं।"
उन्होंने बताया कि वे नव वर्ष की पूर्व संध्या को यहां पहुंचे थे और उन्हें बर्फबारी देखने का सौभाग्य मिला।
राजस्थान के चुरू से आईं मोनिका ने कहा, "हमें पहली बार बर्फबारी देखकर बहुत खुशी हुई। यह सचमुत एक सपने जैसा महसूस हुआ।”
भाषा जोहेब