आरएसएस अर्धसैनिक संगठन नहीं: भागवत
सं दिमो धीरज
- 02 Jan 2026, 11:32 PM
- Updated: 11:32 PM
(तस्वीर के साथ)
भोपाल, दो जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि वर्दी और शारीरिक अभ्यास के बावजूद संघ कोई ‘अर्धसैनिक’ संगठन नहीं है।
भागवत ने यहां प्रबुद्धजनों की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज को एकजुट करने और उसमें आवश्यक गुण व सद्गुण विकसित करने का कार्य करता है, ताकि भारत दोबारा किसी विदेशी शक्ति के अधीन न जाए।
संघ प्रमुख ने कहा, ‘‘हम वर्दी पहनते हैं, पथ संचलन करते हैं और दंड अभ्यास करते हैं। लेकिन अगर कोई इसे अर्धसैनिक संगठन समझता है तो यह भूल होगी।’’ उन्होंने कहा कि आरएसएस संघ एक अनूठा संगठन है, जिसे समझना आसान नहीं है।
भागवत ने कहा कि संघ के खिलाफ एक झूठा विमर्श गढ़ा जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘आजकल लोग सही जानकारी के लिए गहराई में नहीं जाते। वे स्रोत तक नहीं पहुंचते, बल्कि विकिपीडिया देख लेते हैं। वहां सब कुछ सही नहीं होता। जो भरोसेमंद स्रोतों तक जाएंगे, उन्हें संघ के बारे में सही जानकारी मिलेगी।’’
भागवत ने कहा कि इन्हीं भ्रांतियों के कारण संघ की भूमिका और उद्देश्य को स्पष्ट करना आवश्यक हो गया है। संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर का दौरा करने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आम धारणा है कि संघ का जन्म किसी प्रतिक्रिया या विरोध के रूप में हुआ, जबकि ऐसा नहीं है।
भागवत ने कहा, ‘‘संघ किसी प्रतिक्रिया या विरोध में नहीं बना है। संघ किसी से प्रतिस्पर्धा भी नहीं करता।’’
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि अंग्रेज भारत पर आक्रमण करने वाले पहले लोग नहीं थे। उन्होंने कहा कि बार-बार दूर-दराज से आए कुछ गिने-चुने लोग, जो भारतीयों से हर दृष्टि से कमजोर थे, उन्होंने हमें पराजित किया।
भागवत ने कहा, ‘‘वे न तो हम जैसे समृद्ध थे, न ही हम जैसे सदाचारी। देश की बारीकियों को जाने बिना भी वे हमारे घर में हमें हराते रहे। ऐसा सात बार हुआ और अंग्रेज आठवें आक्रांता थे। तब सवाल उठता है कि आजादी की गारंटी क्या है? हमें यह सोचने की जरूरत है कि ऐसा बार-बार क्यों हुआ।’’
उन्होंने कहा कि समाज को स्वयं को समझते हुए स्वार्थ से ऊपर उठना होगा। भागवत के अनुसार, यदि समाज गुणों और मूल्यों के साथ एकजुट होकर खड़ा होता है तो देश का भविष्य निश्चित रूप से बेहतर होगा।
भाषा सं दिमो