अदालत ने मंदिर परिसर में व्यक्ति की हत्या के मामले में पुजारी और उसकी पत्नी को दोषी ठहराया
नेत्रपाल दिलीप
- 02 Jan 2026, 03:26 PM
- Updated: 03:26 PM
नयी दिल्ली, दो जनवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने 2017 में पूर्वी दिल्ली के कैलाश नगर स्थित एक मंदिर परिसर में एक व्यक्ति की हत्या करने और उसके शव को जलाकर सबूत मिटाने के प्रयास के मामले में पुजारी और उसकी पत्नी को दोषी ठहराया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुराग ठाकुर ने पुजारी लखन दुबे और उसकी पत्नी कमलेश को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 201 (सबूतों को नष्ट करना) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत दंडनीय अपराधों का दोषी पाया।
अदालत ने गौर किया कि चंदर शेखर का शव 27 सितंबर, 2017 को मंदिर के उस कमरे में मिला था, जहां पुजारी के रूप में काम करने वाले दुबे की विशेष पहुंच थी, और उसके पास कमरे की ओर जाने वाली सीढ़ियों की चाबी भी थी।
छब्बीस दिसंबर के अपने फैसले में अदालत ने कहा, ‘‘सिद्ध परिस्थितियाँ निर्णायक प्रकृति की हैं और वे आरोपी दुबे तथा कमलेश के अपराध को छोड़कर हरसंभव परिकल्पना को खारिज करती हैं। इस मामले में साक्ष्यों की श्रृंखला इतनी पूर्ण है कि आरोपियों के निर्दोष होने का निष्कर्ष निकालने का कोई उचित आधार नहीं बचता।’’
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पुजारी की पत्नी और मारे गए शेखर के बीच संबंध थे। हालांकि, यह संबंध आपसी सहमति से शुरू हुआ था, लेकिन कमलेश ने बाद में अपने पति को बताया कि शेखर ने उसके बच्चों को जान से मारने की धमकी दी थी, जिसके चलते उसे यह संबंध जारी रखने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इसके बाद कमलेश और दुबे ने शेखर को मारने की योजना बनाई।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 25 सितंबर, 2017 को कमलेश ने शेखर को इस बहाने दिल्ली बुलाया कि उसका पति घर से बाहर गया हुआ है। इसके बाद उसने शेखर के खाने में नींद की गोलियां मिला दीं और जब वह बेहोश हो गया, तो कमलेश तथा दुबे ने रस्सी से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी।
अदालत ने उल्लेख किया कि बाद में शव की पहचान छिपाने के लिए मिट्टी का तेल और कपूर डालकर उसे आग लगा दी गई।
चिकित्सा साक्ष्यों से हत्या किए जाने की पुष्टि हुई।
फॉरेंसिक जांच में शव के पास मिट्टी के तेल के अवशेष और नींद की दवा की मौजूदगी की बात कही, जिससे अभियोजन पक्ष के बयान की पुष्टि हुई।
अदालत ने सभी परिस्थितियों और साक्ष्यों के मद्देनजर दोनों आरोपियों को हत्या करने और सबूत मिटाने के प्रयास का दोषी ठहराया।
मामले में सात जनवरी को अदालत सजा की अवधि पर दलीलें सुनेगी।
भाषा नेत्रपाल