द्रमुक ने शासन और कल्याणकारी योजनाओं के लिए मजबूत साख बनाई : स्टालिन
अमित रंजन
- 27 Dec 2025, 08:54 PM
- Updated: 08:54 PM
तिरुवन्नामलाई, 27 दिसंबर (भाषा) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने शनिवार को कहा कि राज्य में उनके नेतृत्व वाली द्रविड़ मॉडल सरकार ने उन लोगों से भी प्रशंसा मिली है, जिन्होंने द्रमुक को वोट नहीं दिया है।
स्टालिन ने आरोप लगाया कि हालांकि, केंद्र में शासन करने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ ऐसा नहीं है, क्योंकि उसके समर्थक भी केंद्र सरकार की तीखी आलोचना कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री स्टालिन ने यहां पास में मलप्पमबाड़ी में एक सरकारी समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि द्रमुक शासन तमिलनाडु के समग्र विकास के लिए काम कर रहा है, जिसमें प्रत्येक जिला और प्रत्येक परिवार शामिल है। स्टालिन ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में शासन और विकास का द्रविड़ मॉडल इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि राज्य ने एक के बाद एक कई चुनौतियों पर सफलतापूर्वक काबू पाया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी लागू किए जाने के कारण राज्य को ‘कर पर अधिकार’ नहीं रह गया है और केंद्र ने राज्य के देय धनराशि भी जारी नहीं की है।
उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसा राज्यपाल नियुक्त किया गया है, जिसे केंद्र ने केवल निर्वाचित सरकार के कामकाज में बाधा डालने के लिए नियुक्त किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी समस्याओं के अलावा ‘‘धोखेबाज’’ और ‘‘गुलाम मानसिकता वाले लोग’’ भी हैं और ऐसी तमाम चुनौतियों पर काबू पाकर ही राज्य ने प्रभावशाली विकास दर्ज किया है-यही द्रविड़ मॉडल है।
‘‘धोखेबाज़ और गुलाम’’ शब्दों का इशारा परोक्ष तौर पर विपक्षी दलों-मुख्य विपक्षी दल आल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमु क), उसके प्रमुख सहयोगी भाजपा और हाल के दिनों में उभरी टीवीके-की ओर था।
स्टालिन ने कहा कि राज्य की विकास दर कई लोगों को ‘पेट में मरोड़’ देती है और यहां तक कि केंद्र में मंत्री जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी नफरत फैला रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने दावा किया, ‘‘उन्हें लगता है कि तमिलनाडु के खिलाफ नफरत फैलाकर वे उत्तरी राज्यों में वोट हासिल कर सकते हैं,’’ लेकिन उन्होंने जो सोचा था, वैसा नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि इसके बजाय, उत्तरी राज्यों के यूट्यूबर ने तमिलनाडु की विशिष्टताओं, उसकी प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं और आर्थिक विकास के बारे में जानने के बाद राज्य के समर्थन में वीडियो पोस्ट करने शुरू कर दिए हैं।
उन्होंने कहा कि द्रमुक को वोट नहीं देने वाले लोगों ने भी सोशल मीडिया पर यह स्वीकार किया है कि राज्य की प्रमुख योजनाएं परिवर्तनकारी साबित हुई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता द्वारा सराही जा रही योजनाओं में ‘नान मुदलवन’ (रोजगार क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य वाली कौशल विकास पहल) और मुख्यमंत्री नाश्ता योजना (स्कूली बच्चों के लिए) शामिल हैं। उन्होंने कहा कि लोगों का यह भी कहना है कि ऐसी योजनाएं भाजपा-शासित राज्यों में भी लागू नहीं की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने 26 दिसंबर को केंद्र सरकार के आंकड़े का हवाला देते हुए कहा था कि 2024-25 में तमिलनाडु ने 11.9 प्रतिशत की वृद्धि की है और ऑटोमोबाइल विनिर्माण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात सहित विभिन्न क्षेत्रों में राज्य अग्रणी रहा।
मुख्यमंत्री ने दावा किया, ‘‘इस तरह द्रविड़ मॉडल सरकार ने द्रमुक को वोट नहीं देने वाले लोगों से भी प्रशंसा हासिल की है। लेकिन अगर केंद्र में भाजपा शासन की बात करें, तो भाजपा के समर्थक भी केंद्र सरकार की तीखी आलोचना कर रहे हैं।’’
अपनी दलील के समर्थन में मुख्यमंत्री ने जिन मुद्दों का उल्लेख किया, उनमें दिल्ली में वायु प्रदूषण, भारतीय रुपये का लगातार गिरना और उद्घाटन के तुरंत बाद ढहने वाली इमारतें, प्रतिमाएं और ओवरब्रिज शामिल हैं।
स्टालिन ने कहा कि द्रविड़ मॉडल शासन के खिलाफ यदि निष्पक्ष आलोचना होती है, तो वह समस्याओं के समाधान के लिए उचित सुधार करते हैं। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार ना तो किसी मांग पर ध्यान देती है और ना ही आलोचनाओं का निष्पक्ष मूल्यांकन करती है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी कम करने और लोगों के बीच नकदी प्रवाह बढ़ाने में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने हालांकि, अब इस योजना से गांधी का नाम हटा दिया है।
उन्होंने कहा कि साथ ही, वीबी-जी राम जी कानून में उस प्रावधान को भी हटा दिया गया है, जिसमें 100 दिनों के काम को लोगों का वैधानिक अधिकार बताया गया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भाजपा शासन के दौरान गांधी के नाम वाले ग्रामीण रोजगार कानून को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया गया और अब इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘हम इसके खिलाफ संसद में भी और जनता की अदालत में भी लड़ रहे हैं।’’
अन्नाद्रमुक महासचिव और नेता प्रतिपक्ष ई. के. पलानीस्वामी पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह खुद को किसानों के परिवार से होने का दावा करते हैं, लेकिन मनरेगा को खत्म किए जाने का विरोध करने का उनमें ‘साहस’ नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसी वजह से पलानीस्वामी ने भाजपा सरकार के जी राम जी कानून का समर्थन किया और राज्यसभा में अन्नाद्रमुक ने सरकार के पक्ष में मतदान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि द्रमुक सरकार की उपलब्धियों ने केंद्र की भाजपा सरकार और अन्नाद्रमुक को असहाय बना दिया है, क्योंकि वे तमिलनाडु की उपलब्धियों को न तो छिपा सकते हैं और न ही नकार सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने तिरुवन्नमलई जिले की जनता से आगामी चुनाव में उनकी पार्टी का समर्थन करने की अपील भी की।
भाषा
अमित