भूपेश बघेल ने झीरम हमले पर नड्डा के बयान पर कहा: नेताओं के शहादत का अपमान
संजीव राजकुमार
- 22 Dec 2025, 10:59 PM
- Updated: 10:59 PM
रायपुर (छत्तीसगढ़), 22 दिसंबर (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले पर बयान को लेकर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को आड़े हाथों लेते हुए सोमवार को कहा कि उन्होंने इस घटना में जान गंवाने वाले पार्टी नेताओं की शहादत का अपमान किया है।
बघेल ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘..आज फिर एक बार छत्तीसगढ़ आकर भाजपा के 'पर्ची' राष्ट्रीय अध्यक्ष ने झीरम की घटना में अपनी जान गंवाने वाले शहीदों का अपमान किया है। सबसे पहले तो एनआईए समेत सुरक्षा एजेंसियों को जे पी नड्डा जी से पूछताछ कर उनके दावों के सबूत मांगने चाहिए। जे पी नड्डा जी, नक्सलियों के हमले में हमने अपने नेताओं की जान गंवाई है। आप सांठगांठ का आरोप लगाकर उनकी शहादत का अपमान कर रहे हैं।’’
बघेल ने लिखा है,‘‘आपको बताना चाहिए: - प्रदेश में कांग्रेस सरकार के समय जब हम चाहते थे कि नक्सली हमले के पीछे षड्यंत्रकारी कौन है, उसका पता लगे। तब आप अदालतों में याचिका लगवाकर जांच को क्यों रोक रहे थे? आप क्यों नहीं षड्यंत्रकारियों का पता चलने देना चाहते थे? आप बताइए कि अब झीरम के कथित हमलावर हिरासत में हैं तो उनसे षड्यंत्र के बारे में पूछताछ होगी? आप नक्सलियों से लड़िए, यह हम सब चाहते हैं। आज जिस रास्ते पर चलकर नक्सलवाद सिकुड़ रहा है, वह रास्ता कांग्रेस की सरकार ने ही तैयार किया है। लेकिन आप उसे दरकिनार क्यों करना चाहते हैं? ’’
बघेल ने कहा, ‘‘ नड्डा जी, 15 साल आपकी सरकार रही तब आपने नक्सलवाद खत्म क्यों नहीं किया? तब तो नक्सली जनसंहार कर रहे थे। आदिवासियों को मार रहे थे। 700 गांव खाली हो गए थे। और डॉ रमन सिंह जी तो सुरक्षा सलाहकार केपीएस गिल से कह रहे कि वेतन लो और मौज करो।’’
विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली वर्तमान भाजपा सरकार के दो साल पूरे होने पर राज्य के जांजगीर-चांपा जिले में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नड्डा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के अंदरूनी लोग ही 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले को अंजाम देने में शामिल थे, जिसके कारण कांग्रेस नेताओं की हत्या हुई।
माओवादियों ने 25 मई, 2013 को बस्तर जिले की झीरम घाटी में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी की ‘परिवर्तन रैली’ के दौरान नेताओं के काफिले पर हमला किया था, जिसमें तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 32 लोग मारे गए थे।
घटना के बाद बस्तर पुलिस ने इस संबंध में एक प्राथमिकी दर्ज की थी और बाद में एनआईए ने इसकी जांच अपने हाथ में ले ली थी। अपनी जांच पूरी करने के बाद, एजेंसी ने सितंबर 2014 में जगदलपुर में एनआईए अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।
रमन सिंह के नेतृत्व वाली तत्कालीन भाजपा सरकार ने भी 28 मई, 2013 को तत्कालीन छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में इस हमले की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया था। आयोग ने नवंबर, 2021 में अपनी रिपोर्ट राज्य के राज्यपाल को सौंपा था।
तब के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सवाल उठाया था कि रिपोर्ट राज्य सरकार को देने की "स्थापित प्रथा" के बजाय राज्यपाल को क्यों सौंपी गई। बघेल ने यह भी दावा किया था कि रिपोर्ट "अधूरी" लगती है। तब रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई थी।
इसके बाद, तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उसी न्यायिक आयोग का पुनर्गठन किया और उसका कार्यकाल बढ़ाया।
बाद में 2022 में, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भाजपा के वरिष्ठ नेता धरमलाल कौशिक की याचिका पर तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा पुनर्गठित आयोग की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
भाषा संजीव