राहुल गांधी ने जर्मनी यात्रा के दौरान 'भारत के दुश्मनों' से मुलाकात की : भाजपा
अमित पवनेश
- 20 Dec 2025, 10:26 PM
- Updated: 10:26 PM
नयी दिल्ली, 20 दिसंबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने जर्मनी यात्रा के दौरान ‘‘भारत के दुश्मनों’’ से मुलाकात की।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने यहां भाजपा मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बर्लिन स्थित हर्टी स्कूल की प्रेसीडेंट एवं प्रोफेसर कॉर्नेलिया वोल के साथ गांधी की कथित तस्वीर दिखायी और इसे कांग्रेस नेता द्वारा “जर्मनी में भारत-विरोधी ताकतों से मुलाकात” का “सबूत” बताया।
भाटिया ने दावा किया कि वोल सेंट्रल यूरोपियन यूनिवर्सिटी के न्यासियों (ट्रस्टी) में से एक हैं, जो अमेरिका के अरबपति निवेशक जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसाइटी फाउंडेशन से वित्तपोषित है। उन्होंने गांधी से सवाल किया कि ऐसे तत्वों के साथ हाथ मिलाकर वह देश के खिलाफ किस तरह की "साजिश" रच रहे हैं।
राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी।
पिछले साल भी, भाजपा ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के सोरोस-वित्तपोषित संगठनों से संबंध हैं, जो "भारत-विरोधी" गतिविधियों में शामिल हैं।
गांधी की विदेश यात्राओं पर सवाल उठाते हुए भाजपा प्रवक्ता ने सवाल किया कि कांग्रेस नेता या उनकी पार्टी उनका यात्रा कार्यक्रम सार्वजनिक क्यों नहीं करती।
भाटिया ने शनिवार को आरोप लगाया कि हालांकि विपक्ष के नेता के विदेश दौरे के दौरान उनके कार्यक्रम के बारे में जानना लोगों का अधिकार है, लेकिन ना तो कांग्रेस इस बारे में कोई जानकारी साझा करती है और ना ही गांधी सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कोई जानकारी देते हैं।
भाटिया ने शनिवार को आरोप लगाया, ‘‘अगर कोई भारत विरोधी ताकतों से मिलता है और विदेशी धरती से भारत का अपमान करता है, तो वह राहुल गांधी के अलावा और कोई नहीं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जॉर्ज सोरोस और राहुल गांधी दो शरीर हैं, लेकिन एक आत्मा हैं।’’
भाजपा प्रवक्ता ने सवाल किया कि गांधी संसद के लगभग हर सत्र के दौरान या उससे पहले विदेश क्यों जाते हैं और "भारत के दुश्मनों से मिलते हैं, जो भारत से जलते हैं और उसकी अखंडता पर हमला करते हैं।’’
उन्होंने सवाल किया, ‘‘यह किस तरह का भारत-विरोधी एजेंडा है कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी भारत-विरोधी ऐसी ताकतों के साथ हाथ मिला कर भारत के खिलाफ साजिश रच रहे हैं?’’
भाटिया ने आरोप लगाया कि गांधी ने अपनी पिछली विदेश यात्राओं के दौरान भी "भारत-विरोधी" ताकतों से मुलाकात की थी और अपनी टिप्पणियों से ‘‘भारत को बदनाम और अपमानित किया था।’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘यह पहली बार नहीं है, जब राहुल गांधी ऐसी देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त हुए हैं। राहुल गांधी मीर जाफर बन गए हैं।’’
भाटिया ने आरोप लगाया कि सोरोस भारत विरोधी बयान देते हैं और भारत में अशांति फैलाने और देश की अखंडता और संप्रभुता पर हमला करने के लिए धन भी देते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जॉर्ज सोरोस भारतीय नहीं हैं; वह एक विदेशी हैं। लेकिन, राहुल गांधी ने संविधान की रक्षा करने की शपथ ली है। लोगों ने उन्हें भारत के साथ खड़े होने की जिम्मेदारी दी थी और वह भारत विरोधी ताकतों के साथ इलू-इलू (आई लव यू) कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भारत के अंदर इन सपोलों का इलाज करने की जरूरत है। देश की जनता इसकी मांग कर रही है।’’
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘अब यह साफ है कि राहुल गांधी बहुत चालाक हैं। सत्ता की असीम आकांक्षा के चलते भारत के विरोध की प्रवृत्ति उनके डीएनए में है।’’
भाटिया ने कहा कि ‘‘पूरा माहौल चिंता का विषय’’ है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और जो ताकतें "भारत की बढ़ती ताकत और वैश्विक प्रतिष्ठा से नाखुश" हैं, वे देश के बारे में गलत जानकारी फैलाने में लगी हुई हैं।’’
भाजपा के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि गांधी की हाल की जर्मनी यात्रा ‘‘जनता की पड़ताल’’ के योग्य है, क्योंकि यह कई महत्वपूर्ण सवाल उठाती है। उन्होंने कहा, ‘‘यात्रा के दौरान, उन्होंने कॉर्नेलिया वोल से मुलाकात की, जो एक प्रमुख अकादमिक हैं और ऐसी संस्थाओं से जुड़ी हैं जो अक्सर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से वैश्विक राजनीतिक वित्तपोषण नेटवर्क से जुड़ी मानी जाती हैं।
उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट में दावा किया, ‘‘काफी जानकारी सार्वजनिक है कि ऐसे कई नेटवर्क को जॉर्ज सोरोस और उनके ओपन सोसाइटी परिवेशी तंत्र से जुड़े संगठन से समर्थन मिला है।’’
भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस या गांधी की ओर से वोल से उनकी मुलाकातों के उद्देश्य या नतीजों के बारे में कोई ‘‘आधिकारिक स्पष्टीकरण’’ नहीं दिया गया है, लेकिन ‘‘अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक सक्रियता, वित्तपोषण नेटवर्क और भारतीय घरेलू राजनीति के बीच संबंध स्वाभाविक रूप से सवाल उठाता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब विपक्ष का नेता विदेशों में प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय हस्तियों से मिलते हैं, तो पारदर्शिता जरूरी हो जाती है।’’
मालवीय ने कहा कि सार्वजनिक जीवन ‘‘जवाबदेही’’ मांगता है। उन्होंने कहा, ‘‘इन गुप्त बैठकों को ‘गुप्त साजिश’ कहकर खारिज करने के बजाय, अगर इनके उद्देश्य, संदर्भ और नतीजों के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाए तो यह भारत के लोकतंत्र के लिए बेहतर होगा।’’
भाषा
अमित