यह ‘प्रदूषणकालीन सत्र’ था, टैगोर के अपमान से शुरू और बापू के अपमान से खत्म हुआ : कांग्रेस
हक हक दिलीप
- 19 Dec 2025, 08:09 PM
- Updated: 08:09 PM
नयी दिल्ली, 19 दिसंबर (भाषा) कांग्रेस ने संसद का शीतकालीन सत्र संपन्न होने के बाद शुक्रवार को आरोप लगाया कि इस सत्र की शुरुआत सरकार द्वारा गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के अपमान से हुई और समापन ‘‘महात्मा गांधी के अपमान’’ से हुआ।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया यह शीतकालीन सत्र नहीं ‘‘प्रदूषणकालीन सत्र’’ था और वह सरकार वायु प्रदूषण पर चर्चा से भाग गई, जो यह मानती है कि वायु प्रदूषण का फेफड़े पर कोई असर नहीं होता।
संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद रमेश ने संवाददाताओं से कहा, "हमसे सर्वदलीय बैठक में कहा गया कि 14 विधेयक पेश होंगे, जिनमें दो विधेयक औपचारिकता निभाने वाले थे। यानी कुल 12 विधेयक की जानकारी दी गई थी। लेकिन इनमें से पांच विधेयक नहीं लाए गए।"
उन्होंने कहा कि ‘वीबी जी राम जी विधेयक’’ आखिरी दो दिनों में पेश किया गया।
जी राम जी विधेयक पर लोकसभा में बुधवार देर रात तक चर्चा हुई, इसे बृहस्पतिवार को पारित किया गया, जबकि राज्यसभा में इस पर बृहस्पतिवार को करीब छह घंटे से अधिक की चर्चा के बाद 18 दिसंबर को देर रात पारित किया गया।
रमेश ने दावा किया, "इस सत्र की शुरुआत गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के अपमान से हुई... वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया।"
उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष भूल गया कि टैगोर के सुझाव पर वंदे मातरम् के दो अंतरों को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया गया था।
लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन से हुई, जबकि राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने इस चर्चा की शुरुआत की थी।
रमेश ने कहा कि सत्ता पक्ष ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का भी अपमान किया।
उन्होंने जी राम जी विधेयक का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि इस सत्र की समाप्ति ‘‘महात्मा गांधी के अपमान’’ से हुई।
रमेश ने कहा कि विपक्ष की ओर से वायु प्रदूषण पर चर्चा की मांग की गई थी, लेकिन इसे अनसुना किया गया।
उन्होंने कहा, "हमने सरकार को यह जानकारी दी थी कि वायु प्रदूषण पर चर्चा होनी चाहिए। हमें उम्मीद थी कि आज चर्चा होगी, लेकिन यह नहीं हुआ।"
जी राम जी विधेयक का उल्लेख करते हुए रमेश ने दावा किया कि जिस तरह से काले कृषि कानूनों का असर सीधा किसानों पर पड़ा था, उसी तरह मनरेगा के बदले लाए गए कानून का असर समाज के हर वर्ग पर पड़ेगा।
रमेश ने दावा किया, ‘‘वहीं, इसका बुरा असर राज्यों पर भी होगा, क्योंकि मनरेगा में 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार करती थी और 10 प्रतिशत राज्य सरकार, लेकिन इस नए कानून में अब केंद्र सरकार सिर्फ 60 प्रतिशत बजट देगी, जबकि 40 प्रतिशत राज्य सरकार को देना होगा।’’
उन्होंने कहा कि इसके कारण राज्यों पर बोझ बढ़ेगा और उनकी आर्थिक स्थिति खराब होगी।
कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘‘मोदी सरकार मनरेगा का नाम बदलकर, मजदूरों से उनके अधिकार छीन रही है, लेकिन कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को छोड़ने वाली नहीं है। 27 दिसंबर, 2025 को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक होने वाली है, जिसमें हम इस मुद्दे को लेकर रणनीति बनाएंगे। हम जनता को बताएंगे कि किस तरह से उनका कानूनी हक छीना गया है।’’
रमेश ने इस बात पर जोर दिया, ‘‘यह हमारे लिए एक बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है, हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।’’
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