भारत ने दिखाया कि परंपरा और विज्ञान साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं: डब्ल्यूएचओ शिखर सम्मेलन में टेड्रोस
नेत्रपाल पवनेश
- 19 Dec 2025, 07:54 PM
- Updated: 07:54 PM
नयी दिल्ली, 19 दिसंबर (भाषा) विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने शुक्रवार को कहा कि स्वास्थ्य सेवा एकीकृत और समावेशी होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विज्ञान और परंपरा एक-दूसरे के पूरक हैं।
वह पारंपरिक चिकित्सा पर डब्ल्यूएचओ के दूसरे वैश्विक शिखर सम्मेलन के समापन अवसर पर बोल रहे थे।
भारत सरकार के साथ संयुक्त रूप से आयोजित यह शिखर सम्मेलन बुधवार को शुरू हुआ था और इसमें 100 से अधिक देशों के मंत्री, वैज्ञानिक, नेता तथा विशेषज्ञ शामिल हुए।
भारत की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि देश ने यह साबित कर दिया है कि परंपरा और नवाचार साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने दुनिया को दिखाया है कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।’’
शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने कहा, ‘‘पारंपरिक चिकित्सा हमारे आधुनिक विश्व के स्वास्थ्य के लिए कई खतरों, आर्थिक क्षमताओं पर बढ़ते बोझ और स्वास्थ्य सेवाओं तक असमान पहुंच को दूर करने में मदद कर सकती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व ने इस दृष्टिकोण को दुनिया के सामने लाने में मदद की है।’’
शिखर सम्मेलन के परिणामों के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘हम सामान्य और जोखिम-आधारित नियमों के माध्यम से सुरक्षा, गुणवत्ता और जनविश्वास सुनिश्चित करने पर सहमत हुए हैं। हम सांस्कृतिक विरासत, बौद्धिक संपदा और समान साझाकरण का सम्मान करते हुए जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान की रक्षा करने पर भी सहमत हुए हैं।’’
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने कहा, ‘‘हम अनुसंधान और डेटा सृजन तक पहुंच में सुधार के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों और नवाचार का जिम्मेदारी से उपयोग करने पर सहमत हुए हैं, और हम सुरक्षित एवं प्रभावी पारंपरिक चिकित्सा को स्वास्थ्य प्रणालियों, विशेष रूप से निजी स्वास्थ्य सेवा में एकीकृत करने पर सहमत हुए हैं।’’
टेड्रोस ने कहा, ‘‘इस शिखर सम्मेलन के समापन के अवसर पर, आइए हम इस साझा विश्वास के साथ एकजुट होकर जिएं कि स्वास्थ्य का भविष्य एकीकृत, समावेशी और सुविज्ञ होना चाहिए। लोगों, समुदायों और ग्रह के बीच संतुलन बहाल करके, हम आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ समाजों का निर्माण कर सकते हैं।’’
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