राजस्थान : हनुमानगढ़ में इथेनॉल कारखाने के विरोध में किसानों की महापंचायत
पृथ्वी शफीक
- 17 Dec 2025, 10:54 PM
- Updated: 10:54 PM
जयपुर, 17 दिसंबर (भाषा) राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में प्रस्तावित इथेनॉल कारखाने के विरोध में किसानों ने बुधवार को शहर की धान मंडी में महापंचायत की। इसमें बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए और प्रस्तावित संयंत्र के लिए हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) को रद्द करने की मांग की।
महापंचायत में किसान नेता राकेश टिकैत और अन्य नेता शामिल हुए।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘जब इलाके के किसान गंभीर चिंताओं के चलते नहीं चाहते कि कारखाना यहां लगे तो सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए और उनकी मांगें माननी चाहिए।’’
महापंचायत के दौरान किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने सरकारी अधिकारियों से भी मुलाकात की। सरकार ने उन्हें मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया। किसानों को बताया गया कि सरकार ने चिंताओं पर विचार के लिए पहले ही समिति गठित कर दी है। समिति मामले की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
एक अधिकारी ने कहा, ‘‘समिति की रिपोर्ट के आधार पर उचित फैसला लिया जाएगा।’’
बाद में महापंचायत खत्म हो गई। हालांकि, किसानों ने कहा कि जब तक एमओयू रद्द नहीं हो जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के समर्थन से हो रही यह महापंचायत टिब्बी गांव के राठी खेड़ा में इथेनॉल कारखाना लगाए जाने विरोध में की गई। प्रस्तावित कारखाना चंडीगढ़ की एक कंपनी द्वारा लगाया जा रहा है और किसानों का आरोप है कि इससे इलाके में प्रदूषण और भूजल दूषित होगा।
इस बीच, वन एवं पर्यावरण विभाग ने इथेनॉल कारखाने से संभावित भूजल दूषित और प्रदूषण की जांच के लिए समिति का गठन किया है।
अधिकारियों ने बताया कि इस समिति की अध्यक्षता बीकानेर के संभागीय आयुक्त करेंगे। वन एवं पर्यावरण विभाग के विशेष सचिव इसके सदस्य सचिव होंगे। इस समिति के सदस्यों में हनुमानगढ़ के जिलाधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ पर्यावरण इंजीनियर और भूजल विभाग के मुख्य अभियंता शामिल हैं। समिति अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।
किसान राठीखेड़ा में प्रस्तावित इथेनॉल कारखाने के लिए एमओयू को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही वे किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और टिब्बी में हुई झड़पों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग कर रहे हैं।
किसानों की महापंचायत को देखते हुए प्रशासन द्वारा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई। धान मंडी के मुख्य द्वार को छोड़कर सभी द्वार बंद कर दिए गए। मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित रहीं और कई स्तरों पर अवरोधक लगाए गए तथा बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया।
इस साल जुलाई में जब कंपनी ने प्रस्तावित जगह पर चारदीवारी बनाना शुरू किया तो विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। दस दिसंबर को किसानों ने टिब्बी में उपखंड कार्यालय के सामने बड़ी सभा की। शाम तक सैकड़ों किसान ट्रैक्टरों के साथ कारखाना स्थल पर पहुंचे, दीवार तोड़ दी और पुलिस से भिड़ गए।
भाषा पृथ्वी