प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने 'समान न्यायिक नीति' पर बल दिया
पृथ्वी
- 13 Dec 2025, 10:16 PM
- Updated: 10:16 PM
जैसलमेर, 13 दिसंबर (भाषा) ‘एकीकृत न्यायिक नीति’ पर बल देते हुए भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि प्रौद्योगिकी अदालतों के बीच मानकों और प्रक्रियाओं को एकरूप बनाने में मदद कर सकती है, जिससे नागरिकों को उनके स्थान की परवाह किए बिना एक ‘सुगम और निर्बाध अनुभव’ मिल सके।
उन्होंने कहा कि संघीय ढांचे के कारण उच्च न्यायालयों की अपनी-अपनी प्रक्रियाएं और तकनीकी क्षमताएं रही हैं, लेकिन प्रौद्योगिकी की मदद से इन “क्षेत्रीय बाधाओं” को तोड़कर एक अधिक एकीकृत न्यायिक पारिस्थितिकी तंत्र बनाया जा सकता है।
जैसलमेर में आयोजित पश्चिम क्षेत्र क्षेत्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने “राष्ट्रीय न्यायिक पारिस्थितिकी तंत्र” की अवधारणा प्रस्तावित की और प्रौद्योगिकी के एकीकरण के साथ भारत की न्यायिक व्यवस्था में व्यापक सुधार का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, “आज, जब प्रौद्योगिकी भौगोलिक बाधाओं को कम कर रही है और एकीकरण को संभव बना रही है, यह हमें न्याय को अलग-अलग क्षेत्रीय प्रणालियों के रूप में नहीं, बल्कि साझा मानकों, सुगम इंटरफेस और समन्वित लक्ष्यों वाले एक राष्ट्रीय पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में सोचने के लिए आमंत्रित करती है।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समय के साथ न्यायपालिका में प्रौद्योगिकी की भूमिका कैसे बदली है।
उन्होंने कहा, “प्रौद्योगिकी अब केवल प्रशासनिक सुविधा तक सीमित नहीं रही है। यह एक संवैधानिक औजार बन गई है, जो कानून के समक्ष समानता को मजबूत करती है, न्याय तक पहुंच को व्यापक बनाती है और संस्थागत दक्षता को बढ़ाती है। इस प्रकार, उन्होंने डिजिटल उपकरणों की मदद से न्यायिक प्रणाली में मौजूद खामियों और अंतराल को पाटने की क्षमता पर प्रकाश डाला।’’
उन्होंने इस बात पर भी विशेष बल दिया कि कैसे 'डिजिटल टूल' न्यायिक प्रणाली की कमियों को दूर कर सकते हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने बताया कि प्रौद्योगिकी न्यायपालिका को भौतिक दूरी और ब्यूरोक्रेटिक रुकावटों को लांघने करने में मदद करती है।
उन्होंने कहा, "यह न्यायपालिका को भौतिक रुकावटों और नौकरशाही सख्ती से आगे बढ़कर समय पर पारदर्शी व सिद्धांत आधारित परिणाम देने में मदद करती है।"
सीजेआई ने यह भी कहा कि तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल न्याय 'डिलीवरी' को आधुनिक बना सकता है और देश भर के नागरिकों के लिए ज्यादा सुगम बना सकता है।
प्रधान न्यायाधीश ने " एकीकृत न्यायिक नीति" लागू करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि भारत के संघीय ढांचे ने लंबे समय में उसकी न्यायिक प्रणाली को गढ़ा है और अलग-अलग उच्च न्यायालय के अपने व्यवहार व तकनीकी क्षमताए हैं।
उन्होंने कहा, "भारत की व्यापक विविधता के चलते अलग-अलग उच्च न्यायालयों ने अपने कार्य व्यवहार, प्रशासनिक प्राथमिकताएं व तकनीकी क्षमताएं बनाई हैं। हालांकि किसी संघीय लोकतंत्र में इस तरह की भिन्नता स्वाभाविक है लेकिन इसकी वजह से देश भर में मुकदमे लड़ने वालों को अलग-अलग अनुभव हुए हैं।"
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि न्यायिक प्रणाली पर भरोसा बनाने के लिए पूर्वानुमेयता (प्रिडिक्टिबिलिटी) बहुत जरूरी है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, "नागरिकों की अदालत से एक मुख्य उम्मीद प्रिडिक्टिबिलिटी की है। नागरिकों को न सिर्फ उचित व्यवहार की उम्मीद होनी चाहिए बल्कि देश भर में मुकदमे कैसे निपटाए जाते हैं उसमें भी एकरूपता होनी चाहिए।"
'प्रिडिक्टिबिलिटी' को बेहतर बनाने में तकनीक की क्षमता की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, "तकनीक हमें प्रणाली में होने वाली देरी को 'ट्रैक' करने और समस्याओं को छिपाने के बजाय दिखाने में मदद करती है।"
उन्होंने समझाया कि डेटा आधारित टूल मामलों में देरी या रुकावटों के पीछे के कारणों को पहचान सकते हैं, जिससे तीव्र व अधिक केंद्रित समाधान मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक संवेदनशील मामलों की श्रेणी को रेखांकित करने व लंबित मामलों की रीयल टाइम निगरानी में मददगार हो सकती है।
सीजेआई ने उन 'जरूरी मामलों को प्राथमिकता देने की महत्ता पर भी प्रकाश डाला जिनमें देरी से बड़ा नुकसान हो सकता है। उन्होंने अपने हालिया प्रशासनिक आदेश पर जोर दिया जो यह सुनिश्चित करता है कि जमानत याचिका या बन्दी प्रत्यक्षीकरण मामलात जैसे जरूरी मामले सत्यापन के बाद दो दिन के भीतर सूचीबद्ध किए जाएं।
उन्होंने कहा, "जहां देरी से भारी नुकसान होता हो, वहां प्रणाली को त्वरित तरीके से जवाब देना चाहिए।''
प्रधान न्यायाधीश ने न्यायिक फैसलों की 'स्पष्टता' का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कई वादी को केस जीतने के बावजूद अक्सर फैसले की जटिल कानूनी भाषा के कारण अपने फैसले की शर्तों को समझने में दिक्कत आती है। उन्होंने फैसले लिखने के तरीके में और ज़्यादा एकरूपता लाने की वकालत की।
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