राहुल और सिद्धू शीर्ष पद चाहते हैं, पर लोग उनसे पहले कुछ करके दिखाने के लिए कह रहे: मान
जितेंद्र संतोष
- 13 Dec 2025, 06:48 PM
- Updated: 06:48 PM
चंडीगढ़, 13 दिसंबर (भाषा) पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और नवजोत सिंह सिद्धू पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों ही नेता शीर्ष पदों की चाह रखते हैं लेकिन लोग उनसे पहले कुछ करके दिखाने को कहते हैं।
मान ने यहां संवाददाताओं से कहा कि जब सिद्धू पंजाब में कांग्रेस सरकार में मंत्री थे, तब अगर उन्होंने अपने विभागों की जिम्मेदारी संभाली होती तो वे जनता के कल्याण के लिए कुछ कर सकते थे।
मान ने दावा किया कि राहुल गांधी और नवजोत सिंह सिद्धू की एक ही समस्या है।
उन्होंने कहा, “राहुल गांधी कहते हैं, मुझे प्रधानमंत्री बनाओ, मैं जनता के लिए कुछ करूंगा। लेकिन लोग उनसे कहते हैं, पहले कुछ करो, फिर हम तुम्हें प्रधानमंत्री बनाएंगे।”
मान ने दोनों नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा, “नवजोत सिद्धू के साथ भी यही हाल है। वह कहते हैं, ‘मुझे मुख्यमंत्री बना दो, मैं पंजाब के लिए कुछ करूंगा’। लेकिन लोग उनसे पंजाब के लिए कुछ करने को कहते हैं, इसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री बनाएंगे।”
कुछ दिन पहले सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने कहा था कि अगर कांग्रेस पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करती है, तो उनके पति सक्रिय राजनीति में लौट आएंगे।
नवजोत कौर ने कहा था कि उनके (नवजोत सिंह सिद्धू के) पास किसी भी पार्टी को देने के लिए पैसा नहीं है लेकिन वे पंजाब को “स्वर्णिम राज्य” में बदल सकते हैं।
मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए उनके ‘500 करोड़ रुपये’ वाले बयान ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था, जिसके बाद पंजाब कांग्रेस ने उन्हें निलंबित कर दिया था।
कांग्रेस की पंजाब इकाई के पूर्व अध्यक्ष सिद्धू पिछले कई महीनों से पार्टी के कार्यक्रमों और गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले रहे हैं।
उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों में भी प्रचार नहीं किया था।
मान ने सिद्धू दंपति के ईमानदार होने के दावे पर टिप्पणी करने के लिए पूछे जाने पर कहा कि वे (मान) ईमानदारी का प्रमाण पत्र देने वाले कोई व्यक्ति नहीं हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा हालांकि उन्हें ऐसा कोई दस्तावेज नहीं मिला है, जो उनके (सिद्धू दंपति) भ्रष्टाचार को दर्शाता हो।
उन्होंने कहा, “नहीं तो मैं इसे अब तक सार्वजनिक कर चुका होता।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सिद्धू कांग्रेस की पिछली सरकार में शहरी विकास मंत्री थे, तब वे शहरों में गंदगी, सीवरेज, ‘स्ट्रीट लाइट’ और सड़क की समस्याओं का समाधान कर सकते थे।
उन्होंने कहा कि बाद में सिद्धू को बिजली विभाग मिला, जो एक महत्वपूर्ण विभाग था।
मान ने कहा, “हमने (‘आप’ सरकार ने) बिजली मुफ्त कर दी। सिद्धू को इस विभाग की जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी और उन्हें कहना चाहिए था कि वे 600 यूनिट बिजली (मुफ्त में) देंगे।”
उन्होंने कहा, “अगर अमरिंदर सिंह (तत्कालीन मुख्यमंत्री) ने मना कर दिया होता तो सिद्धू लोगों को बता सकते थे कि वे मुफ्त बिजली देना चाहते हैं लेकिन अमरिंदर ने मना कर दिया। वह हीरो बन जाते और अगर अमरिंदर ने इसे स्वीकार कर लिया होता, तब भी वह हीरो होते। दोनों ही स्थितियां फायदेमंद थीं।”
मान ने कहा कि अमरिंदर सिंह ने पहले दावा किया था कि सिद्धू ने छह महीने तक अपने विभाग की फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं किए।
उन्होंने आरोप लगाया, “ (नवजोत सिंह) सिद्धू साहब ने अपने मंत्रालय और विभाग की जिम्मेदारी नहीं ली। उन्होंने एक भी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए।”
सिद्धू ने 2019 में तत्कालीन अमरिंदर सिंह मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था।
अमरिंदर सिंह ने सिद्धू से स्थानीय सरकार और पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग छीन लिए थे तथा उन्हें बिजली एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग आवंटित किए थे लेकिन सिद्धू ने बिजली विभाग का कार्यभार नहीं संभाला।
मान ने नवजोत कौर द्वारा सुरक्षा मांगे जाने के सवाल पर कहा कि उन्हें बोलने से पहले सोचना चाहिए था।
उन्होंने कहा, “पहले लोगों को गाली दो, फिर मेरे पास (सुरक्षा के लिए) आओ।”
मान ने कहा कि सिद्धू दंपति को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मिलने के लिए पहले ही समय मांग लेना चाहिए था, जो वे अब कर रहे हैं।
भाषा जितेंद्र