मंत्रिमंडल ने 2027 की जनगणना के लिए मंजूरी दी; 11,718 करोड़ रुपये स्वीकृत
आशीष पवनेश
- 12 Dec 2025, 09:25 PM
- Updated: 09:25 PM
नयी दिल्ली, 12 दिसंबर (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनगणना 2027 करवाने के लिए 11,718 करोड़ रुपये की मंजूरी दी, जिसमें पहली बार जाति गणना को भी शामिल किया जाएगा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पत्रकारों को बताया कि शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में जनगणना कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है, जो अपनी तरह की पहली डिजिटल जनगणना होगी।
लगभग 30 लाख कर्मचारी राष्ट्रीय महत्व के इस वृहद कार्य को पूरा करेंगे।
स्वतंत्रता के बाद से जनगणना का 16वां संस्करण नागरिकों को स्वयं गणना करने का विकल्प भी प्रदान करेगा।
देश भर में कोविड-19 महामारी के प्रकोप के कारण 2021 में होने वाली यह दशकीय कवायद स्थगित कर दी गई थी।
मंत्री ने कहा कि जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी। इसके तहत अप्रैल से सितंबर 2026 तक मकानों की सूची बनाने और आवास जनगणना का काम होगा; और फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना की जाएगी।
उन्होंने कहा कि लद्दाख और जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों के बर्फ से ढके दूर दराज के क्षेत्रों के लिए जनगणना कवायद सितंबर 2026 में होगी। वैष्णव ने पत्रकारों से कहा, "यह पहली डिजिटल जनगणना होगी।"
मंत्री ने बताया कि लगभग 30 लाख जनगणनाकर्मी प्रत्येक घर का दौरा करेंगे और घर-परिवार सूचीकरण, आवास गणना और जनसंख्या गणना के लिए अलग-अलग प्रश्नावली के माध्यम से सर्वेक्षण करेंगे। इससे 1.02 करोड़ मानव दिवस का रोजगार सृजित होगा।
वैष्णव ने कहा कि संपूर्ण डिजिटल जनगणना प्रणाली को एक अत्यंत सुदृढ़ प्रणाली के रूप में तैयार किया गया है और इस पर व्यक्तिगत डेटा संरक्षण से संबंधित सभी कानून लागू होंगे। उन्होंने कहा कि जनगणना प्रत्येक व्यक्ति और परिवार का सूक्ष्म स्तर का और व्यापक स्तर का डेटा प्रस्तुत करेगी।
मंत्री ने कहा, "प्रत्येक परिवार से सूक्ष्म स्तर के आंकड़े एकत्र किए जाएंगे और एक व्यापक तस्वीर प्रस्तुत की जाएगी। व्यक्तिगत आंकड़े गोपनीय रखे जाएंगे जबकि जनगणना के व्यापक स्तर के आंकड़े प्रकाशित किए जाएंगे।"
सरकार के एक बयान में कहा गया है, "जनगणना के सभी कर्मचारियों को जनगणना के काम के लिए उचित मानदेय दिया जाएगा क्योंकि वे यह काम अपने नियमित कर्तव्यों के अतिरिक्त करेंगे।"
वैष्णव ने बताया कि जनगणना 2027 के प्रारंभिक चरण में जातिगत आंकड़े भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से एकत्र किए जाएंगे। मंत्री ने कहा कि डेटा संग्रह के लिए मोबाइल ऐप और निगरानी उद्देश्यों के लिए केंद्रीय पोर्टल का उपयोग बेहतर गुणवत्ता वाले डेटा सुनिश्चित करेगा।
उन्होंने कहा कि डेटा का प्रसार कहीं बेहतर और उपयोगकर्ता के अनुकूल तरीके से होगा ताकि नीति-निर्माण के लिए आवश्यक मापदंडों से संबंधित सभी प्रश्नों के उत्तर एक बटन क्लिक करने पर उपलब्ध हो सकें।
सरकार के एक बयान में कहा गया है, "जनगणना प्रक्रिया के संपूर्ण प्रबंधन और निगरानी के लिए एक विशेष पोर्टल विकसित किया गया है, जिसका नाम जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस) है।"
मंत्री ने कहा कि जनगणना-आधारित सेवा (सीएएएस) मंत्रालयों को स्वच्छ, मशीन-पठनीय और कार्रवाई योग्य प्रारूप में डेटा उपलब्ध कराएगी।
बयान में कहा गया है कि स्थानीय स्तर पर लगभग 18,600 तकनीकी कर्मचारियों को लगभग 550 दिनों के लिए नियुक्त किया जाएगा, जिसका अर्थ है कि लगभग 1.02 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार सृजित होगा।
यह विशाल जनगणना गांव, शहर और वार्ड स्तर पर प्राथमिक आंकड़ों का सबसे बड़ा स्रोत है, जो आवास की स्थिति, सुविधाएं और संपत्ति, जनसांख्यिकी, धर्म, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, भाषा, साक्षरता और शिक्षा, आर्थिक गतिविधि, प्रवासन और प्रजनन दर सहित विभिन्न मापदंडों पर सूक्ष्म स्तर के आंकड़े प्रदान करती है।
पिछली व्यापक जाति-आधारित जनगणना अंग्रेजों द्वारा 1881 और 1931 के बीच की गई थी। स्वतंत्रता के बाद से आयोजित सभी जनगणनाओं में जाति को शामिल नहीं किया गया।
आगामी जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने का निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की राजनीतिक मामलों की समिति ने 30 अप्रैल को लिया था।
भाषा आशीष