अनुराग ठाकुर ने ‘कार्तिगई दीपम’ मामले में तमिलनाडु सरकार पर निशाना साधा, लोकसभा में हंगामा
हक हक सुभाष
- 12 Dec 2025, 01:26 PM
- Updated: 01:26 PM
नयी दिल्ली, 12 दिसंबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद अनुराग ठाकुर ने शुक्रवार को लोकसभा में तमिलनाडु के ‘कार्तिगई दीपम’ का विषय उठाया और राज्य सरकार पर मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ के आदेश की अवमानना करने का आरोप लगाया, जिस पर द्रमुक सदस्यों ने सख्त विरोध दर्ज कराया और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से लोकसभा सदस्य ठाकुर ने सदन में शून्यकाल के दौरान यह विषय उठाया और दावा किया कि द्रमुक सरकार में तमिलनाडु सनातन के प्रति विरोध का प्रतीक बन गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘मदुरै पीठ ने तमिलनाडु सरकार को फटकार लगाई है और कहा कि उसके आदेश की उपेक्षा की जा रही है।’’
भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि हिंदुओं पर लाठीचार्ज किया गया और अदालत के आदेश के बावजूद दीप प्रज्वलित नहीं करने दिया गया।
ठाकुर ने कहा, ‘‘वहां आदेश की अहवेलना की गई है और यह अदालत की अवमानना है।’’
इस पर द्रमुक सदस्यों ने विरोध दर्ज कराया और आसन के निकट पहुंच गए।
सदन में हंगामे के कारण पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने दोपहर एक बजे सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
तमिलनाडु सरकार ने एक दरगाह के पास स्थित मंदिर में ‘कार्तिगई दीपम’ प्रज्वलित करने की अनुमति देने संबंधी मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया है।
उच्चतम न्यायालय ने तिरुपरमकुंद्रम स्थित एक शिला दीप स्तंभ ‘दीपथून’ में अरुलमिघु सुब्रमणिय स्वामी मंदिर के श्रद्धालुओं को परंपरागत ‘‘कार्तिगई दीपम’ प्रज्वलित करने की अनुमति देने संबंधी मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुनवाई के लिए पांच दिसंबर को सहमति जताई थी।
मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने चार दिसंबर को मदुरै के जिला कलेक्टर और शहर के पुलिस आयुक्त द्वारा दायर एक अंतर-न्यायालयी अपील खारिज कर दी थी और एकल न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें श्रद्धालुओं को दीपथून में ‘कार्तिगई दीपम’ प्रज्वलित करने की अनुमति दी गई थी।
जब आदेश का क्रियान्वयन नहीं हुआ तो एकल न्यायाधीश ने तीन दिसंबर को एक और आदेश पारित कर श्रद्धालुओं को स्वयं दीप प्रज्वलित करने की अनुमति दे दी तथा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
हफ्ते की शुरूआत में, द्रमुक, कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों ने उक्त आदेश पारित करने वाले न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन को पद से हटाने का प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपा था।
उनका आरोप है कि न्यायाधीश का आचरण न्यायपालिका की निष्पक्षता, पारदर्शिता और धर्मनिरपेक्ष कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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