प्रधानमंत्री मोदी 15 से 18 दिसंबर तक जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की यात्रा करेंगे
देवेंद्र प्रशांत
- 11 Dec 2025, 11:02 PM
- Updated: 11:02 PM
नयी दिल्ली, 11 दिसंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व्यापार और रक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए सोमवार से शुरू होने वाली जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की चार दिवसीय यात्रा करेंगे।
अपनी यात्रा के पहले चरण में मोदी 15 से 16 दिसंबर तक राजा अब्दुल्ला द्वितीय बिन अल हुसैन के निमंत्रण पर जॉर्डन का दौरा करेंगे, जहां वे द्विपक्षीय संबंधों के संपूर्ण पहलू की समीक्षा करेंगे और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह दौरा भारत-जॉर्डन संबंधों को और मजबूत करने, विकास और समृद्धि के लिए सहयोग के नये रास्ते तलाशने और क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए नयी दिल्ली की प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर प्रदान करता है।
जॉर्डन से मोदी 16 से 17 दिसंबर तक दो दिवसीय यात्रा के लिए इथियोपिया जाएंगे। पूर्वी अफ्रीकी देश की यह उनकी पहली यात्रा होगी।
अदीस अबाबा में मोदी इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के साथ द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर व्यापक बातचीत करेंगे।
विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘ग्लोबल साउथ में साझेदार के रूप में, यह दौरा घनिष्ठ मित्रता और द्विपक्षीय सहयोग के संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करेगा।’’
अपनी यात्रा के तीसरे और अंतिम चरण में, मोदी सुल्तान हैथम बिन तारिक के निमंत्रण पर 17 से 18 दिसंबर तक ओमान का दौरा करेंगे।
मोदी की यह ओमान की दूसरी यात्रा होगी। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री की खाड़ी देश की यात्रा के दौरान दोनों पक्ष एक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।
विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत और ओमान सदियों पुरानी मित्रता, व्यापारिक और मजबूत संबंधों पर आधारित एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी साझा करते हैं।’’
मोदी की ओमान यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 70 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है और यह दिसंबर 2023 में सुल्तान तारिक की भारत की राजकीय यात्रा के बाद होगी।
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘यह दौरा दोनों पक्षों के लिए व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि और संस्कृति समेत विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी की व्यापक समीक्षा करने और पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का मौका होगा।’’
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