हरियाणा में सरकारी डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए; मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों से हड़ताल खत्म करने की अपील की
नोमान प्रशांत
- 10 Dec 2025, 11:51 PM
- Updated: 11:51 PM
अंबाला/कुरुक्षेत्र, 10 दिसंबर (भाषा) हरियाणा में सरकारी डॉक्टरों ने संशोधित सुनिश्चित कैरियर प्रगति योजना के कार्यान्वयन सहित अपनी मांगें पूरी नहीं होने के विरोध में बुधवार को अपना विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया और अपनी हड़ताल को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया।
इस बीच, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने डॉक्टरों से तत्काल हड़ताल वापस लेने और अपनी ड्यूटी पर लौटने का आग्रह किया है ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सैनी ने चंडीगढ़ में कहा कि डॉक्टरों की चार प्रमुख मांगें हैं, जिनमें से तीन को सरकार पहले ही स्वीकार कर चुकी है।
उन्होंने बताया कि वित्त विभाग ने 16 अगस्त 2024 को डॉक्टरों के लिए एक विशेष कैडर के गठन के संबंध में अधिसूचना जारी की थी। इसी प्रकार, 25 अक्टूबर, 2024 को एक अन्य अधिसूचना जारी कर अस्पताल परिसर से बाहर काम करने वाले डॉक्टरों के लिए यात्रा भत्ता स्वीकृत किया गया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों की सीधी भर्ती रोक दी है।
उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जा रहा है, और अंतिम रिपोर्ट प्राप्त होने तक निलंबन लागू रहेगा।
एसीपी संरचना में बदलाव से संबंधित उनकी चौथी मांग को स्वीकार नहीं किया गया है।
सैनी ने डॉक्टरों से राजनीति में शामिल होने से बचने की अपील करते हुए इस बात पर जोर दिया कि सरकार ने उनकी लगभग सभी मांगों को स्वीकार कर लिया है।
डॉक्टरों ने इससे पहले आठ से नौ दिसंबर तक दो दिवसीय हड़ताल शुरू की थी, जिसे अब उन्होंने अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया।
हरियाणा सरकार ने प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के साथ गतिरोध के बीच मंगलवार शाम को आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) लागू कर सरकारी चिकित्सकों की किसी भी हड़ताल पर रोक लगा दी थी।
राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने विरोध प्रदर्शन के कारण ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले चिकित्सकों के वेतन में कटौती का आदेश दिया।
राज्य में सरकारी चिकित्सकों का प्रतिनिधित्व करने वाले ‘हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन’ के आह्वान पर हड़ताल शुरू की गई।
‘हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन’ के अध्यक्ष डॉ. राजेश ख्यालिया ने बताया कि सरकार ने एक साल पहले उनकी मांगों को पूरा करने का वादा किया था, जिनमें वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों की सीधी भर्ती पर रोक लगाना और संशोधित सुनिश्चित कैरियर प्रगति योजना को लागू करना शामिल था।
उन्होंने कहा, “हम सरकार से अपना वादा पूरा करने का अनुरोध करते हैं। लेकिन वादा पूरा करने के बजाय, वह एस्मा के माध्यम से या पत्र जारी कर हमारी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।”
ख्यालिया ने सवाल किया, “हमारे डॉक्टरों को पदोन्नति नहीं मिल रही है। हमें समझ नहीं आ रहा कि सरकार हम पर दबाव क्यों डाल रही है। वह अपना वादा क्यों नहीं निभा रही है?”
उन्होंने कहा कि पंचकूला के तीन डॉक्टर अपनी मांगें पूरी होने तक आमरण अनशन पर बैठे हैं।
ख्यालिया ने कहा कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन उन्हें अब तक सरकार की ओर से वार्ता का कोई निमंत्रण नहीं मिला है।
हड़ताल के मद्देनजर, राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मेडिकल कॉलेजों, ईएसआईसी, सलाहकारों और आयुष क्षेत्र के डॉक्टरों को तैनात किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि स्वास्थ्य सेवाएं बिना किसी बाधा के जारी रहें।
वहीं, अंबाला और कुरुक्षेत्र में हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।
अंबाला के सिविल सर्जन डॉ. राकेश सहल ने बताया कि बुधवार को अंबाला में पंजीकृत 168 डॉक्टर उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला, अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे सहित सभी विभाग सुचारू रूप से कार्यरत हैं और मरीजों को उचित चिकित्सा देखभाल मिल रही है।
कुरुक्षेत्र में हड़ताल का कोई असर नहीं हुआ और सभी चिकित्सक लोक नायक जय प्रकाश नारायण जिला अस्पताल में ड्यूटी पर पहुंच गए।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह मेहला ने बताया कि सोमवार को 124 चिकित्सकों में से 23 अनुपस्थित थे जबकि मंगलवार को 18 चिकित्सक अनुपस्थित रहे।
हालांकि, बुधवार को एक भी डॉक्टर अनुपस्थित नहीं रहा।
उन्होंने बताया कि चिकित्सा सेवाएं सुचारू रूप से चल रही हैं और मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।
भाषा नोमान