वायुसेना में महिला अफसरों को स्थायी कमीशन देने में भेदभाव नहीं किया गया:न्यायालय से केंद्र ने कहा
संतोष शफीक
- 10 Dec 2025, 10:33 PM
- Updated: 10:33 PM
नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा) केंद्र सरकार ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय में भारतीय वायुसेना में अल्पकालिक सेवा आयोग (एसएससी) के तहत भर्ती महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने में भेदभाव और पक्षपात के आरोपों का खंडन किया और कहा कि वर्ष 2019 से अब तक 243 पुरुष और 177 महिलाओं को भर्ती किया गया है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने स्थायी कमीशन से इनकार को चुनौती देने वाली एसएससी के तहत भर्ती महिला अधिकारियों की याचिकाओं के एक समूह पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि केंद्र द्वारा 2022 में मंजूरी दिए जाने के बाद, भारतीय वायुसेना ने एनडीए के माध्यम से महिला अधिकारियों की भर्ती शुरू की और प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा होने पर इन अधिकारियों को सीधे स्थायी कमीशन दिया जाएगा।
केंद्र सरकार की ओर से पेश हुईं भाटी ने एसएससी के तहत भर्ती कुछ अधिकारियों द्वारा स्थायी कमीशन से वंचित किए जाने के आरोप का खंडन करते हुए कहा, ‘‘इन अधिकारियों पर एचआरपी 01/2019 (मानव संसाधन नीति 2019) के प्रावधानों के तहत तीन योग्य अवसरों पर निष्पक्ष रूप से विचार किया गया था, लेकिन न्यूनतम प्रदर्शन मानदंड (एमपीसी) को पूरा न करने और/या अपने-अपने विभागों में उपलब्ध रिक्तियों के लिए योग्यता के आधार पर अर्हता प्राप्त न कर पाने के कारण उन्हें स्थायी कमीशन नहीं दिया जा सका।’’
उन्होंने कहा कि 2019 की मानव संसाधन नीति मई 2006 के बाद नियुक्त सभी जीडी (ग्राउंड ड्यूटी) शाखा के एसएससी अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान करती है।
भाटी ने कहा, ‘‘यह नीति एसएससी कार्यकाल के 11वें, 12वें और 13वें वर्ष के पूरा होने पर विचार के तीन अवसर प्रदान करती है। पिछली नीतियों में एसएससी अधिकारियों को केवल उनके एसएससी कार्यकाल के अंतिम वर्ष में ही अवसर मिलता था। 2019 से अब तक 243 पुरुष एसएससी अधिकारियों और 177 महिला एसएससी अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया जा चुका है।’’
उन्होंने कहा कि मापदंड इस प्रकार निर्धारित किए गए हैं कि सेना युवा और प्रतिस्पर्धी बनी रहे, इसलिए सीमित रिक्तियों के मुकाबले सभी अधिकारियों को स्थायी कमीशन नहीं दिया जा सकता।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत इस नीति की समीक्षा करेगी, लेकिन सीमित रिक्तियों के संबंध में कुछ नहीं किया जा सकता क्योंकि यह एक नीतिगत निर्णय है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने भाटी के तर्क का विरोध करते हुए दावा किया कि भारतीय वायु सेना में स्थायी कमीशन देने के मामले में पुरुष अधिकारियों की तुलना में महिला अधिकारियों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया जाता है।
पीठ ने दलीलें सुनने के बाद पक्षों को 19 दिसंबर तक लिखित दलीलें प्रस्तुत करने को कहा।
पीठ ने कहा कि अब तक सेना, नौसेना और भारतीय वायु सेना में एसएससी महिला अधिकारियों की दलीलें अलग-अलग सुनी जा चुकी हैं, इसलिए वह संयुक्त रूप से फैसला सुनाएगी क्योंकि स्थायी कमीशन से इनकार को चुनौती देने के कई मुद्दे और आधार समान हैं।
पीठ ने कहा कि वह तटरक्षक बल से संबंधित दलीलें किसी अन्य समय सुनेगी। उच्चतम न्यायालय ने तीन दिसंबर को कहा था कि सशस्त्र बलों में उनकी विशिष्ट भूमिकाओं से परे राष्ट्र एसएससी के तहत भर्ती महिला वायु सेना अधिकारियों पर गर्व करता है।
गुरुस्वामी ने इससे पहले सशस्त्र बलों की 2019 की मानव संसाधन नीति का हवाला देते हुए इसकी आलोचना की थी और कहा था कि स्थायी कमीशन के लिए विचार किए जाने के मानदंड बदल दिए गए हैं और यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है।
एसएससी के तहत भर्ती कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के विशिष्ट मामलों का हवाला देते हुए वरिष्ठ वकील ने कहा था कि उनके पास अपेक्षित सीजीपीए (संचयी ग्रेड प्वाइंट औसत) था, फिर भी उन पर विचार नहीं किया गया क्योंकि उनके मामले श्रेणीबद्ध नहीं किये गए थे क्योंकि वे गर्भवती थीं और मातृत्व अवकाश पर थीं।
उन्होंने विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यह माना गया है कि महिला कर्मचारियों के साथ गर्भावस्था और मातृत्व अवकाश के कारण भेदभाव नहीं किया जा सकता है।
उच्चतम न्यायालय ने 22 मई को केंद्र और भारतीय वायु सेना को निर्देश दिया था कि वे उस महिला अधिकारी को सेवा से मुक्त न करें, जो ऑपरेशन बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा थी, लेकिन जिसे स्थायी कमीशन देने से इनकार कर दिया गया था।
इस मामले में केंद्र और भारतीय वायु सेना से विंग कमांडर निकिता पांडे की याचिका पर जवाब मांगा गया था, जिन्होंने स्थायी कमीशन से वंचित किए जाने पर भेदभाव का दावा किया था।
सशस्त्र बलों में स्थायी कमीशन एक ऐसा करियर मार्ग है जो एक अधिकारी को सेवानिवृत्ति की आयु तक सेवा करने की अनुमति देता है।
एक निश्चित अवधि वाले एसएससी के विपरीत, स्थायी कमीशन एक दीर्घकालिक करियर प्रदान करता है जिसमें सर्वोच्च रैंक तक पदोन्नति के अवसर और पेंशन तथा अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का पूर्ण अधिकार शामिल है।
भाषा संतोष