वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करें : सामिक भट्टाचार्य
मनीषा अविनाश नरेश
- 10 Dec 2025, 08:11 PM
- Updated: 08:11 PM
नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को भारतीय जनता पार्टी के सामिक भट्टाचार्य ने राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम्’ पर चर्चा के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के सदस्यों से एक-दूसरे पर आरोप लगाने से बचने का आग्रह करते हुए कहा कि इस समय हमें अपने स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करना चाहिए।
‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 बरस पूरे होने पर उच्च सदन में हो रही चर्चा में हिस्सा ले रहे भट्टाचार्य ने कहा कि इस दौरान हमें अपने स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करना चाहिए, न कि एक दूसरे पर आरोप लगा कर बहस का स्तर कमतर करना चाहिए।
उन्होंने कहा ‘‘स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों की वजह से ही आज हम आजाद हवा में सांस ले रहे हैं।’’
भट्टाचार्य ने कहा कि लोकतंत्र की बात करने वाले को देखना चाहिए कि ‘वंदे मातरम्’ की पवित्र भूमि पर आज बाबरी मस्जिद बनाई जा रही है, यह देश की सुरक्षा के लिए खतरा है
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में रोहिंग्या की घुसपैठ चिंता की बात है। ‘‘हमें अपने देश की सुरक्षा के लिए हमेशा सचेत और सतर्क रहना चाहिए और आपसी मतभेदों के चलते ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिए जिससे हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों की वजह से मिली आजादी को खतरा हो।’’
भाजपा के शंभू शरण पटेल ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारत माता के चरणों की स्तुति है। यह बंकिम चंद्र चटर्जी की कलम से निकला वह उद्घोष है जिसने गांव-गांव, गली-गली में स्वतंत्रता की अलख जगाई थी।
उन्होंने कहा कि करोड़ों कंठ का मधुर नाद और करोड़ों हाथों के साथ भारत की रक्षा का संकल्प हमें ‘वंदे मातरम्’ से मिलता है। उन्होंने कहा कि बंगाल विभाजन के बाद ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियों के बीच छात्रों के स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने पर रोक लगा दी गई थी।
उन्होंने कहा कि तब नागपुर के सिटी स्कूल में निरीक्षण के लिए आए अंग्रेज अधिकारी का विद्यार्थियों ने ‘वंदे मातरम्’ के नारे से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे चिढ़ कर अंग्रेज अधिकारी ने स्कूल के प्रबंधक को पत्र लिख कर कहा था कि ‘वंदे मातरम्’ गाने वाले छात्रों को स्कूल से निकाल कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
इसी पार्टी के कणाद पुरकायस्थ ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ ने लोगों के दिलों में आजादी के लिए वह आग जलाई जिसने देश की गुलामी की जंजीरें तोड़ दीं।
उन्होंने कहा कि इस गीत की शक्ति उसके शब्दों में नहीं, उसके भाव में है जिसने सामान्य लोगों को असाधारण स्वतंत्रता सेनानियों में तब्दील कर दिया।
पुरकायस्थ ने कहा कि इस गीत के 150 वर्ष का जश्न मनाते समय हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह गीत हमें याद दिलाता है कि देशभक्ति समर्पण, एकता और साझा जिम्मेदारी की भावना है।
द्रमुक सदस्य राजाथी ने अपनी बात तमिल में रखी। उन्होंने कहा कि अतीत की बातों को उठाने से कुछ नहीं होगा, हमें सहकारी संघवाद को ध्यान में रख कर सभी राज्यों के साथ सहयोग करना चाहिए, यही वंदे मातरम् का संदेश है क्योंकि विपक्ष शासित राज्य भी हमारी मातृभूमि का ही हिस्सा हैं।
निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि अंग्रेजों ने राष्ट्र गीत को दबाने की काफी कोशिश की क्योंकि वे उन विचारों को दबाना चाहते थे जो राजनीतिक चेतना जगाते थे।
भाजपा के नरेश बंसल ने देश के बंटवारे के लिए कांग्रेस को दोषी ठहराते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ देश के लिए एक प्रार्थना है।
आप सदस्य विक्रमजीत सिंह साहनी ने ‘वंदे मातरम्’ को "एक मंत्र कहा जिसने आज़ादी का रास्ता बनाया।"
बसपा के रामजी ने कहा कि देश की आज़ादी में सभी धर्मों के लोगों ने भाग लिया और यह गीत हर भारतीय के खून में दौड़ता है।
भाजपा सदस्य धर्मशीला गुप्ता ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारतीयों की आत्मा की अभिव्यक्ति है, क्योंकि इसने ब्रिटिश शासन के खिलाफ देश को एकजुट किया।
चर्चा में भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी, डॉ संगीता बलवंत, सुमित्रा वाल्मीक, दोरजी त्सेरिंग लेपचा, महाराजा संजाओबा लेशंबा, अनिल सुखदेव राव बोंडे, माकपा के ए ए रहीम, केरल कांग्रेस (एम) के जोस के मणि, निर्दलीय कपिल सिब्बल, राकांपा (एससीपी) की फौजिया खान, बीआरएस के रविचंद्र वद्दिराजू सहित कई अन्य सदस्यों ने भी हिस्सा लिया।
भाषा मनीषा अविनाश